गोरखपुर महानगर में स्थित गुरु गोरक्षनाथ मंदिर में मकर संक्रांति पर्व पर बाबा गोरक्षनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा युगों पुरानी है। भगवान सूर्य के प्रति आस्था से जुड़े इस पर्व पर खिचड़ी चढ़ाने का इतिहास त्रेतायुग का है। जिसका आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निर्वाह किया जा रहा है।
Khichdi Mela 2022: जानिए कब और कैसे शुरू हुई गुरु गोरक्षनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा
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उधर, उन्होंने भोजन बनाने के लिए आग पर पात्र में पानी चढ़ा दिया। वहां से गुरु भिक्षा मांगते हुए गोरखपुर चले आए। यहां उन्होंने राप्ती व रोहिणी नदी के संगम पर एक स्थान का चयन कर अपना अक्षय पात्र रख दिया और साधना में लीन हो गए। उसी दौरान जब खिचड़ी यानी मकर संक्रांति का पर्व आया तो लोगों ने एक योगी का भिक्षा पात्र देखा तो उसमें चावल और दाल डालने लगे। जब काफी मात्रा में अन्न डालने के बाद भी पात्र नहीं भरा तो लोगों ने इसे योगी का चमत्कार माना और उनके सामने श्रद्धा से सिर झुकाने लगे।
तभी से गुरु की इस तपोस्थली पर खिचड़ी पर चावल-दाल चढ़ाने की जो परंपरा शुरू हुई, वह आज तक उसी आस्था व श्रद्धा के साथ चल रही है। उधर, ज्वाला देवी मंदिर में आज भी बाबा गोरक्षनाथ के इंतजार में पानी खौल रहा है। मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी चढ़ाने की शुरुआत ब्रह्ममुहूर्त में गोरक्षपीठाधीश्वर द्वारा होती है, उसके बाद यह सिलसिला देर शाम तक चलता रहता है। मान्यता है कि शिवावतारी बाबा गोरक्षनाथ को खिचड़ी चढ़ाने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है।
गोरक्षपीठाधीश्वर ब्रह्म मुहूर्त में चढ़ाएंगे खिचड़ी
शनिवार 15 जनवरी को ब्रह्म मुहूर्त में तीन बजे गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ बाबा गोरखनाथ की विशेष पूजा-अर्चना करेंगे। मंदिर की तरफ से बाबा को खिचड़ी अर्पित की जाती है। इसके बाद नेपाल राजपरिवार से आई खिचड़ी चढ़ाई जाती है। इसके बाद नाथ संप्रदाय के योगी, पुजारी और मंदिर के गृहस्थ शिष्य खिचड़ी चढ़ाएंगे।
मंदिर पहुंची नेपाल राजपरिवार की खिचड़ी
गोरक्षनाथ मंदिर के कार्यालय प्रभारी द्वारिका तिवारी ने बताया कि नेपाल राजपरिवार की खिचड़ी गोरक्षनाथ मंदिर पहुंच चुकी है। 15 जनवरी को पूजन के बाद महारोट का प्रसाद लेकर संस्कृत विद्यालय के आचार्य नेपाल जाएंगे।