गोरखपुर में आज एक बार फिर आईपीएस चारू निगम की चर्चा खूब हो रही है। इसकी वजह यह है कि साल 2017 में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के भगवानपुर वार्ड के बसंती-कोईलहवा गांव के 118 लोगों के विरूद्ध दर्ज मुकदमा वापस लेने का निर्देश जारी कर दिया गया है। इस मामले में भाजपा नगर विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल और तत्कालीन एएसपी चारू निगम के बीच तीखी झड़प हुई थी। इस घटना के बाद चारू ने ऐसा काम किया कि लोग उनकी तारीफ करते नहीं थकते थे। आगे की स्लाइड्स में जानें पूरी कहानी...
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IPS Charu nigam
- फोटो : अमर उजाला।
बात मई 2017 की है, गोरखपुर जिले की खजनी के मझगांवा गांव की रहने वाली आरती को मेडिकल कॉलेज के गायनी विभाग में भर्ती कराया गया था। आरती की तीमारदारी में ननद सुमन भी अपने आठ महीने के बेटे राजीव को लेकर आई थी।
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आठ माह के राजीव संग आईपीएस चारू निगम। (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला।
अगले दिन की सुबह आरती ने बच्चे को जन्म दिया। सुमन भी अपने बेटे राजीव को लेकर आरती के साथ वार्ड में थी। घरवालों के मुताबिक करीब सवा छह बजे राजीव रोने लगा। बेटे को चुप कराने के लिए सुमन ने उसे दूध पिलाया। इसी बीच मां-बेटे की आंख लग गई। दस मिनट बाद जब सुमन की आंख खुली तो बच्चा गायब था। इससे परेशान घरवालों ने बच्चा चोरी की सूचना पुलिस को दी। एसपी चारू के नेतृत्व में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए राजीव को 36 घंटे के भीतर पुलिस ने खोज निकाला।
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36 घंटे के अंदर आईपीएस चारू ने बच्चे को खोजकर आरोपी महिला को पकड़ा था।
- फोटो : अमर उजाला।
पुलिस ने बच्चा चुराने वाली महिला तबस्सुम को भी गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी महिला बच्चे को 12 हजार रुपये में बेचने की फिराक में थी, लेकिन अखबारों में बच्चे की फोटो छप जाने से वह पकड़ ली गई। उसने बच्चे के बदले 12 हजार रुपये भी मांगे थे। राजीव को पाकर सुमन ने रोते हुए कहा था कि सरकारी अधिकारी ऐसे ही होना चाहिए। बिना समय गंवाए उन्होंने मेरा बच्चा वापस दिला दिया।
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IPS Charu nigam
- फोटो : अमर उजाला।
इस घटना के बाद पूरे शहर में इस घटना की चर्चा हुई थी, लोगों ने आईपीएस चारू के काम को खूब सराहा था। बता दें कि इस घटना से पहले भाजपा विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल और आईपीएस अधिकारी चारू निगम के बीच शराब की दुकान बंद कराने को लेकर तीखी बहस हुई थी।