विशेषज्ञों ने पांच साल तक के मासूम बच्चों को कोरोना के संक्रमण से बचाने के लिहाज से इन्फ्लूएंजा की वैक्सीन को कारगर माना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वैक्सीन एंटी फ्लू है। ऐसे में अगर बच्चे संक्रमित होते हैं तो भी उन्हें ज्यादा दिक्कत नहीं होगी। साथ ही उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत नहीं पड़ सकती है। पांच साल से कम उम्र के बच्चे को यह वैक्सीन लगवाई जा सकती है।
कोविड महामारी के बीच 18 वर्ष से ऊपर के लोगों के लिए वैक्सीन आ गई है और लोग इसे लगवा भी रहे हैं। इसी को आधार मानकर विशेषज्ञ यह मान रहे हैं कि इस बार तीसरी लहर में बच्चे संक्रमण की चपेट में ज्यादा आ सकते हैं। क्योंकि, इनके लिए अब तक कोई वैक्सीन नहीं आई है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि अमेरिका में इन्फ्लूएंजा वैक्सीन को लेकर शोध हुए हैं। इसमें पांच साल से कम उम्र के बच्चों को यह वैक्सीन लगाई गई। वैक्सीन लगाने के बाद बच्चे संक्रमित हुए, लेकिन वह ज्यादा गंभीर नहीं हुए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
खास बात यह रही कि इन बच्चों को वेंटिलेटर की भी जरूरत नहीं पड़ी। इसी शोध को आधार मानते हुए इंडियन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने पांच साल से कम उम्र के बच्चों को इन्फ्लूएंजा वैक्सीन लगाने की सलाह दी है। वैक्सीन लगने के बाद अगर बच्चे संक्रमण की चपेट में आते हैं तो भी वह गंभीर अवस्था में नहीं पहुंचेंगे। क्योंकि यह वैक्सीन फ्लू की है। कोरोना वायरस भी एक तरह का फ्लू है। ऐसे में यह असरदार है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
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निमोनिया व कफ में वैक्सीन करती है काम
डॉ. भूपेंद्र ने बताया कि इन्फ्लूएंजा वैक्सीन ठंड, कफ व निमोनिया जैसे संक्रमण को कम करती है। फ्लू और कोरोना के लक्षण एक जैसे हैं। इसमें अंतर केवल यही है कि कोरोना का असर ज्यादा तेजी से होता है और यह फेफड़ों को जल्दी नुकसान पहुंचाता है। जबकि, सामान्य फ्लू का असर धीरे-धीरे होता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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ऐसे में पहले भी बच्चों को यह वैक्सीन लगवाने की सलाह बाल रोग विशेषज्ञ देते आए हैं। बताया कि यह वैक्सीन छह माह के बाद और पांच साल से कम के बच्चों को ही लगाने की सलाह दी गई है।
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डॉ. अमरेश सिंह
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बच्चों के अंदर भी बनेगी एंटीबॉडी
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ अमरेश सिंह ने बताया कि स्तनपान कराने वाली मां अगर संक्रमित हुई है और वह ठीक हो गई है तो उनके अंदर भी एंटीबॉडी बन जाती है। इस दौरान अगर वह बच्चों को दूध पिलाती है तो बच्चे के शरीर में भी एंटीबॉडी बन जाएगी। दूध के जरिये मासूमों के अंदर प्रतिरोधक्षक क्षमता का विकास तेजी से होता है। इसलिए ऐसी महिलाएं बच्चों को स्तनपान कराती रहें।