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Gorakhpur News: स्तन कैंसर के उपचार में नई राह दिखा रहीं आधुनिक सर्जरी की तकनीकें

Sun, 25 Oct 2026 02:55 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 25 Oct 2026 02:55 AM IST
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Modern surgical techniques are paving a new path in the treatment of breast cancer
गोरखपुर। स्तन कैंसर का इलाज अब केवल कैंसरग्रस्त स्तन को हटाने तक सीमित नहीं है। आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की मदद से कई मरीजों में स्तन को सुरक्षित रखते हुए सर्जरी करना संभव है। बीमारी की सही पहचान, कैंसर की अवस्था, ट्यूमर की प्रकृति और उपचार के प्रति मरीज की प्रतिक्रिया के आधार पर इलाज की रणनीति तैयार की जाती है।
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इसी दिशा में चिकित्सकों को नवीनतम जानकारियों से जोड़ने के लिए एम्स गोरखपुर के सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग की ओर से शनिवार को अंतरराष्ट्रीय स्तन कैंसर जागरूकता माह के अवसर पर ‘अपडेट्स ऑन ब्रेस्ट कैंसर’ विषय पर सीएमई एवं सर्जिकल कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। पांच मॉड्यूल में आयोजित इस कार्यक्रम में जांच से लेकर सर्जरी और आधुनिक दवाओं तक के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
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कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि एवं संस्थान की कार्यकारी निदेशक और सीईओ मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता ने किया। उन्होंने कहा कि स्तन कैंसर भारतीय महिलाओं में सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर है। समय पर पहचान और प्रमाण-आधारित उपचार से अनेक जीवन बचाए जा सकते हैं। आयोजन अध्यक्ष एवं सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग के अपर आचार्य व विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता ने स्वागत भाषण में कहा कि स्तन कैंसर का उपचार सटीक निदान, स्तन-संरक्षण और ऑन्कोप्लास्टिक सर्जरी तथा मरीज की जरूरत के अनुसार दवाओं के चयन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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इसके लिए सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट और ऑन्कोलॉजिस्ट के बीच समन्वय जरूरी है। आयोजन सचिव एवं विभाग के सह-आचार्य डॉ. हरिकेश यादव ने उद्घाटन व्याख्यान में आधुनिक स्तन सर्जरी के विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने रेडिकल सर्जरी से स्तन को बचाने वाली ऑन्कोप्लास्टिक तकनीकों तक हुए बदलाव और बगल के लिम्फ नोड्स की सर्जरी को सीमित करने की दिशा में हुई प्रगति की जानकारी दी।



जांच से बीमारी की प्रकृति समझने तक की जानकारी
पहले मॉड्यूल में एनाटॉमी विभाग के डॉ. चेतन साहनी ने स्तन, पेक्टोरल क्षेत्र और बगल की सर्जिकल संरचना समझाई। फिजियोलॉजी विभाग की डॉ. संगीता गुप्ता ने एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोनों की भूमिका तथा स्तन कैंसर से उनके संबंध पर जानकारी दी। डॉ. गौरव गुप्ता ने स्तन कैंसर के लक्षणों और क्लिनिकल जांच की मानक विधि का प्रदर्शन किया। दूसरे मॉड्यूल में रेडियोडायग्नोसिस के प्रो. आनंद हटगांवकर और पैथोलॉजी विभाग की डॉ. काजल हटगांवकर ने ट्रिपल असेसमेंट की प्रक्रिया समझाई। पैथोलॉजी विभाग की डॉ. मिमना ने कैंसर के हिस्टोपैथोलॉजिकल वर्गीकरण और ग्रेडिंग की जानकारी दी। वहीं, विभाग के डॉ. मुकुल सिंह ने मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी (एमआरएम) और एक्सिलरी क्लीयरेंस के ऑपरेशन संबंधी चरणों पर चर्चा की। तीसरे मॉड्यूल में विभाग के डॉ. रवि गुप्ता ने ऑन्कोप्लास्टिक सर्जरी के मूल सिद्धांतों और मरीजों के चयन पर व्याख्यान दिया। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉ. नीरज नथानी ने वीडियो के माध्यम से वॉल्यूम डिस्प्लेसमेंट और वॉल्यूम रिप्लेसमेंट तकनीकों की बारीकियां समझाईं। रेडियोथेरेपी विभाग के डॉ. शशांक शेखर ने कम सत्रों में पूरी होने वाली फास्ट-फॉरवर्ड हाइपोफ्रैक्शनेशन रेडियोथेरेपी के बारे में बताया। अन्य मॉड्यूल में फार्माकोलॉजी विभाग के डॉ. तेजस पटेल और पैथोलॉजी विभाग की डॉ. दीपिका ने बायोमार्करों की भूमिका समझाई।
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