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नेशनल हाउस वाइफ-डे: जो संवारती हैं घर-संसार, उन्होंने निकाला आज का अमर उजाला अखबार

Thu, 03 Nov 2022 10:48 AM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 03 Nov 2022 10:48 AM IST
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Housewife brought out today Amar Ujala newspaper on national house wife day
नेशनल हाउस वाइफ-डे - फोटो : अमर उजाला।

अमर उजाला में बुधवार को गेस्ट एडिटर बनकर गृहलक्ष्मी पधारीं। घर-गृहस्थी का प्रबंधन करने वाली गृहिणी, अखबार का भी संपादन बखूबी कर सकती है, इसे शहर की तीन हाउस वाइफ अभिलाषा सिंह, प्रिया सोनी और रीना सिंह ने साबित कर दिखाया। नेशनल हाउस वाइफ-डे के अवसर पर अमर उजाला के तीन नवंबर के अंक की खबरों का चयन और संपादन इन्हीं तीन गेस्ट एडिटर्स ने किया। अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत  ‘बनिए गेस्ट एडिटर’ कॉन्टेस्ट जीत कर इन तीन गृहिणियों ने बुधवार को अतिथि संपादक का गरिमामयी पद संभाला।



गृहणियों ने घर गृहस्थी संभालने की जिम्मेदारी खुद ली है, वरना वे देश भी संभाल सकती हैं। इस थीम पर अमर उजाला ने नेशनल हाउस वाइफ-डे के अवसर पर विशेष आयोजन किया। नेशनल हाउस वाइफ-डे संस्करण की खबरों का चयन करने के लिए अतिथि संपादक अभिलाषा सिंह, प्रिया सोनी और रीना सिंह सुबह साढ़े दस बजे मोहद्दीपुर स्थित अमर उजाला के सिटी कार्यालय पहुंचीं। अतिथि संपादक की कुर्सी संभालने के बाद सभी संवाददाताओं से अभिवादन-परिचय हुआ। घर गृहस्थी और परिवार संभालने वाली इन गृहिणियों की समाचारों के चयन में भी पैनी नजर देखने को मिली।


 

Housewife brought out today Amar Ujala newspaper on national house wife day
नेशनल हाउस वाइफ-डे - फोटो : अमर उजाला।

अभिलाषा सिंह ने शहर में सोसाइटी के पास नियमित सफाई संबंधित खबरों को प्राथमिकता दी तो प्रिया सोनी ने धर्मकर्म की खबरों को पर फोकस करने का सुझाव दिया। वहीं, रीना सिंह ने डेंगू के बढ़ते प्रकोप और शहर में बड़े अपराधियों की धर-पकड़ न होने पर चिंता जताते हुए अखबार में इस विषय को स्थान देने की बात कही। संवाददाताओं की मीटिंग के बाद समाचार पत्र का कलेवर, समाचारों का स्थान निश्चित करने आदि के संबंध में संपादक से परिचर्चा की। बहुत सारे सुझाव भी दिए। आज का अमर उजाला इन्हीं अतिथि संपादकों के कुशल निर्देशन का प्रतिरूप है।

सम्मान पाकर गदगद हुईं अतिथि संपादक
अमर उजाला की अतिथि संपादक बनने का सम्मान पाकर अभिलाषा सिंह, प्रिया सोनी और रीना सिंह गदगद दिखीं। रीना सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अमर उजाला का अतिथि संपादक बनने का स्टेटस अपडेट किया है, जिसे बहुत सारे लोगों ने पसंद किया। प्रिया सोनी ने कहा उनका मायका अयोध्या है। एक दिन के संपादकीय प्रभारी बनने से मायके के लोग भी काफी खुश हैं। वे इस पल को पूरे जीवन यादों में सजो कर रखेंगे। अभिलाषा ने कहा कि अमर उजाला का गेस्ट एडिटर बनना उनके पोर्टफोलियो में बड़ा एडिशन है। यह सम्मान उनके नाम के साथ आजीवन जुड़ा रहेगा। तीनों गेस्ट एडिटर ने कहा कि भविष्य में भी वे अमर उजाला के सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों से जुड़ना पसंद करेंगी।


 

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गेस्ट एडिटर प्रिया सोनी। - फोटो : अमर उजाला।

गेस्ट एडिटर की कलम से
सामाजिक समस्याओं का निस्तारण कर सकती हैं महिलाएं
कूड़ाघाट निवासी प्रिया सोनी ने कहा कि महिला सशक्तीकरण आज के वक्त की मांग है। इसके बिना समाज और देश का समुचित विकास नहीं हो सकता है। महिलाएं सामाजिक समस्याओं को पुरुषों की अपेक्षा अधिक सुगमता से हल कर सकती हैं। जब एक स्त्री घर-परिवार को बिना थके-हारे सुचारु रूप से चला सकती है, मां बन सकती है तो वह राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक आदि क्षेत्रों में भी अपना योगदान दे सकती है। खासकर, पूर्वांचल में महिलाओं को समाज में उनके वास्तविक अधिकार हासिल करने के लिए अभी और सक्षम होने की जरूरत है। हमारे समाज के लोगों का रूढ़िवादी सोच बदलने की जरूरत है और बताने की जरूरत है कि महिलाएं अपने जीवन में बहुत कुछ कर सकती हैं। मेरे सोच में महिला-पुरुष में भेदभाव करना सही नहीं है। महिलाएं और पुरुष दोनों ही समाज के विकास और उत्थान में कंधे से कंधा मिलाकर अपना सहयोग दे तो समाज का तेजी से विकास हो सकता है।


 

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गेस्ट एडिटर अभिलाषा। - फोटो : अमर उजाला।

ठंड के मौसम में जरूरतमंदों की करें मदद
तारामंडल सिद्धार्थ इंक्लेव निवासी अभिलाषा सिंह ने कहा कि ठंड धीरे-धीरे अपने रंग में आ रही है। जल्द ही तापमान 10 डिग्री से भी नीचे हो जाएगा। ऐसे में सड़क किनारे रहकर जीवन यापन करने वाले जरूरतमंदों की मदद के लिए संभ्रांत परिवार आगे आएं। ताकि ठंड से किसी को जान न गंवानी पड़े। हम ऐसे लोगों की मदद करें तो उन लोगों के लिए काफी सहूलियत होगी। जरूरतमंद परिवारों के पास जो अनुपयोगी कपड़े हैं, उन्हें जरूरतमंदों तक ले जाने के लिए भी एक प्लेटफॉर्म विकसित करने की जरूरत है। इससे आवश्यकता पड़ने पर जरूरतमंद तक मदद पहुंचाई जा सकेगी। सरकार भी अपनी ओर से दी जाने वाली मदद की कड़ाई से निगरानी करे, ताकि जरूरतमंद को इसका लाभ मिले।

 

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गेस्ट एडिटर रीना। - फोटो : अमर उजाला।

गांवों के विकास पर भी ध्यान देने की जरूरत
वृंदावन कॉलोनी निवासी रीना सिंह ने कहा कि शहर का विकास वर्तमान में तेजी से हो रहा है। हर तरह की सुविधाएं लोगों को शहर में मिल रहीं हैं। शहर की तर्ज पर ही गांवों के विकास की भी जरूरत है, क्योंकि देश की 70 फीसदी आबादी गांवों में ही रहती है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर शहर की तुलना में काफी नीचे है। गांव में शिक्षा के प्रति लोग जागरूक हों, इसके लिए सरकार को गांव के लिए शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योजना बनानी चाहिए। गांव की समस्याओं से उच्च अधिकारियों को अवश्य अवगत कराएं, ताकि उनका समाधान हो सके। महिलाएं परिवार बनाती हैं, परिवार घर बनाता है, घर समाज बनाता है और समाज ही देश बनाता है। इसका सीधा-सीधा अर्थ यही है कि महिलाओं का योगदान हर जगह है। महिला की क्षमता को नजरंदाज करके समाज की कल्पना करना व्यर्थ है। शिक्षा और महिला सशक्तीकरण के बिना परिवार, समाज और देश का विकास नहीं हो सकता।

 

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