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वह प्रेमपत्र लिखता रहा, मैं करियर बना बैठी, मैत्रेयी पुष्पा के निजी जिंदगी पर चौंकाने वाले खुलासे
Thu, 06 Feb 2020 11:42 AM IST
विजय जैन
राजन राय, गोरखपुर
राजन राय, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Thu, 06 Feb 2020 11:42 AM IST
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maitree pushpa
- फोटो : अमर उजाला
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गांव के परिवेश को अपनी कल्पनाओं में जीवंत कर खेत खलिहान को अपने लेखन का मुख्य केंद्र बनाने वाली प्रख्यात साहित्यकार एवं हिंदी अकादमी की पूर्व उपाध्यक्ष मैत्रेयी पुष्पा का मानना है कि जब पढ़ेंगे तभी लिखेंगे।
गोरखपुर लिटेररी फेस्टिवल।
- फोटो : अमर उजाला
सवाल : आपके भीतर साहित्यकार कब जिंदा हुआ?
जवाब : पढ़ाई के दौरान मेरा भी एक प्रेमी था। वह मुझे प्रेमपत्र लिखता था, उसमें कविताएं होती थी। मैंने भी जवाब में कविताएं लिखी। पर उसमें गलतियां होती थी तो वह गलतियों को बताता था। मैंने सोचा कि कविताएं ऐसी लिखूंगी कि गलती न हो। यकीन मानिए बस यहीं से मेरे भीतर साहित्यकार जग गया। सच कहूं, मेरा प्रेमी ही मेरा प्रेरणा बना। वह प्रेमपत्र लिखता रह गया और मैं साहित्य के एक मुकाम पर पहुंच गई। आपको जानकार आश्चर्य होगा कि दो बार मेरा लेख नहीं छपा। तीसरी बार जब छपा तो मेरे अंदर का साहित्यकार उत्साहित हो गया।
जवाब : पढ़ाई के दौरान मेरा भी एक प्रेमी था। वह मुझे प्रेमपत्र लिखता था, उसमें कविताएं होती थी। मैंने भी जवाब में कविताएं लिखी। पर उसमें गलतियां होती थी तो वह गलतियों को बताता था। मैंने सोचा कि कविताएं ऐसी लिखूंगी कि गलती न हो। यकीन मानिए बस यहीं से मेरे भीतर साहित्यकार जग गया। सच कहूं, मेरा प्रेमी ही मेरा प्रेरणा बना। वह प्रेमपत्र लिखता रह गया और मैं साहित्य के एक मुकाम पर पहुंच गई। आपको जानकार आश्चर्य होगा कि दो बार मेरा लेख नहीं छपा। तीसरी बार जब छपा तो मेरे अंदर का साहित्यकार उत्साहित हो गया।
मैत्रेयी पुष्पा ।
- फोटो : अमर उजाला।
सवाल : साहित्यकार बनने के बाद कभी आपके प्रेमी से बात हुई?
जवाब : कई बार हुई। मैं खुले विचारधारा की रही हूं। हंसते हुए, उसने मुझसे कहा कि तुम तो बड़ी साहित्यकार बन गई जबकि कविताएं लिखना नहीं आता था। मैंने, कहा तुम प्रेमपत्र लिखते रह गए और मैंने कॅरियर बना लिया।
जवाब : कई बार हुई। मैं खुले विचारधारा की रही हूं। हंसते हुए, उसने मुझसे कहा कि तुम तो बड़ी साहित्यकार बन गई जबकि कविताएं लिखना नहीं आता था। मैंने, कहा तुम प्रेमपत्र लिखते रह गए और मैंने कॅरियर बना लिया।
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मैत्रेयी पुष्पा
- फोटो : अमर उजाला।
सवाल : शुरूआत कविताओं से हुई और फिर स्त्री विमर्श कब आ गया। बाद में यही आपका प्रिय सब्जेक्ट कैसे बन गया?
जवाब : जिंदगी सिर्फ रोमानियत में नहीं गुजरती है। संघर्ष भी होता है। जब गांव की महिलाओं को देखा कि कैसे वह बिना सहायता के लड़ रही है। जब महिलाओं को सहयोग नहीं मिलता है तो वह ज्यादा साहसी हो जाती है। बस यहीं से मैंने ठान लिया कि स्त्री विमर्श को उठाऊंगी। मेरे पात्र बोलने से ज्यादा करते भी हैं। इसी से बदलाव आता है।
जवाब : जिंदगी सिर्फ रोमानियत में नहीं गुजरती है। संघर्ष भी होता है। जब गांव की महिलाओं को देखा कि कैसे वह बिना सहायता के लड़ रही है। जब महिलाओं को सहयोग नहीं मिलता है तो वह ज्यादा साहसी हो जाती है। बस यहीं से मैंने ठान लिया कि स्त्री विमर्श को उठाऊंगी। मेरे पात्र बोलने से ज्यादा करते भी हैं। इसी से बदलाव आता है।
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मैत्रेयी पुष्पा ।
- फोटो : अमर उजाला।
चर्चित पुस्तकें
अल्मा कबूतरी, चाक, इदन्नम, खुली खिड़कियां, कही ईसुरी फाग, ललमनियां, अगनपाखी, छांह, फरिश्ते निकले आदि।
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