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यूपी: यहां कागजों में अच्छे से चल रहे हैं मातृ-शिशु केंद्र, हकीकत जानकर हो जाएंगे हैरान

Fri, 19 Feb 2021 09:47 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 19 Feb 2021 09:47 AM IST
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Health Center News special report of Maternal Child Family Welfare Center in Gorakhpur
गोरखपुर में मातृ-शिशु केंद्रों की हालत बदतर। - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के 250 मातृ शिशु परिवार कल्याण केंद्रों (उप स्वास्थ्य केंद्र) की हालत बदतर है। ज्यादातर केंद्रों के दरवाजे गायब हैं। रंगाई-पुताई के अभाव में केंद्र खंडहर से दिखने लगे हैं। साफ-सफाई की व्यवस्था बेहद खराब है। एक केंद्र में भूसा भरा मिला है। लिहाजा, टीकाकरण का काम भी नहीं हो पाता है। एएनएम व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता किसी झोपड़ी में बैठकर टीकाकरण करती हैं। अमर उजाला की पड़ताल से पता चला कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने, टीकाकरण और गर्भवतियों की जांच के लिए खोले गए केंद्र सिर्फ कागजों में अच्छे से चल रहे हैं। वास्तविकता कुछ और है। पेश है रिपोर्ट- 
Health Center News special report of Maternal Child Family Welfare Center in Gorakhpur
मातृ-शिशु केंद्र में भरा भूसा। - फोटो : अमर उजाला।
खुटभार केंद्र में भूसा भरा मिला
चिल्लूपार क्षेत्र के खुटभार गांव में बना सेंटर बदहाल है। कमरों में भूसा भरा है। दरवाजा टूट चुके हैं। गांव के भारतेंदु सिंह, प्रशांत सिंह, गोपाल सिंह, अयोध्या सिंह, अरविंद पासवान, जमदीन के मुताबिक सेंटर में आज तक प्रसव नहीं कराया गया है। ज्यादातर महिलाएं प्रसव के लिए निजी अस्पतालों में जाती हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति क्षेत्र के मझवलिया गांव में बने मातृ-शिशु केंद्र की है। केंद्र जर्जर हालत में है। जानकारी के मुताबिक डेरवा पीएचसी के अंतर्गत 30 केंद्र बने हैं। इनकी स्थिति खराब है। इन सभी केंद्रों पर एएनएम की तैनाती भी है, लेकिन पिछले कई सालों से केंद्रों पर प्रसव ही नहीं कराए ही गए हैं।  
Health Center News special report of Maternal Child Family Welfare Center in Gorakhpur
हाटा बाजार का मातृ-शिशु केंद्र। - फोटो : अमर उजाला।
बदहाली का शिकार हाटा बाजार का केंद्र
गगहा क्षेत्र के हाटा बाजार में बना मातृ-शिशु केंद्र पिछले कई सालों से बंद है। अगल-बगल गंदगी का अंबार लगा है। सालों से प्रसव नहीं कराए गए हैं। ग्रामीण यह भी नहीं जानते कि केंद्र पर टीकाकरण होता है। सब सीएचसी और पीएचसी जाकर टीक लगवाते हैं। केंद्र अतिक्रमण की चपेट में आ चुका है। 
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उनवल मातृ-शिशु केंद्र। - फोटो : अमर उजाला।
पांच सालों से बदहाल है व्यवस्था
संग्रामपुर (उनवल) नगर पंचायत का मातृ शिशु केंद्र भी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। गंदगी का ढेर लगा है। आसपास के लोगों के मुताबिक पांच वर्षों से रंगाई-पुताई नहीं हुई है। केंद्र तक पहुंचने के लिए भी पापड़ बेलने पड़ते हैं। आसान रास्ता नहीं है। इसी का नतीजा है कि टीका लगवाने और जांच के लिए गर्भवतियों को सीएचसी, पीएचसी जाना पड़ता है। घर के पास टीकाकरण की व्यवस्था नहीं हो पाती है। केंद्र पर तैनात एएनएम स्नेहलता चौरसिया के मुताबिक केंद्र पर आने-जाने का कोई रास्ता ही नहीं है। साफ-सफाई की हालत भी बदतर है। लोगों ने अतिक्रमण भी कर रखा है। आसपास की झोपड़ी में बैठकर टीकाकरण पूरा करते हैं। 
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Health Center News special report of Maternal Child Family Welfare Center in Gorakhpur
किराए के मकान में चल रहे केंद्र पर कर्मियों की तैनाती नहीं। - फोटो : अमर उजाला।
सालों से नहीं खुला ताला
बुढ़नपुरा गांव, सेमरा बुजुर्ग, मिश्रौली व पटना गांव में बने केंद्रों की स्थित खराब मिली है। इन केंद्रों पर कर्मियों की तैनाती नहीं पाई गई। ज्यादा केंद्र बदहाल मिले हैं। रंगाई-पुताई व साफ-सफाई वर्षों से नहीं हुई है। ऐसा लगता है कि केंद्रों के दरवाजों पर लटके ताले सालों से नहीं खुले हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति पीड़ाहनी, नरहरपुर, मुजौना, बेदौली, चौतीसा गांव के केंद्रों की मिली है। इन केंद्रों पर इतनी गंदगी है कि प्रसव कराया नहीं जा सकता है। ग्रामीण प्रसव के लिए सीएचसी या फिर जिला मुख्यालय जाते हैं।
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