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दस्तक अभियान में पहली बार घर-घर ढूंढे जाएंगे टीबी के मरीज, जानिए कब होगी इसकी शुरुआत

Thu, 18 Feb 2021 06:44 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 18 Feb 2021 06:44 PM IST
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Dastak campaign start from 10 March to 24 March in gorakhpur
टीबी। (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Social Media

गोरखपुर जिले में पहली बार दस्तक अभियान के तहत घर-घर टीबी मरीज ढूंढे जाएंगे। दस्तक अभियान के तहत टीबी मरीजों को ढूंढने का हिस्सा बनाया गया है। अभियान 10 मार्च से शुरू होकर 24 मार्च तक चलेगा।





 

Dastak campaign start from 10 March to 24 March in gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रामेश्वर मिश्र ने बताया कि अभियान के दौरान लक्षणों के आधार पर आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संभावित टीबी रोगियों का पता लगाएंगी साथ ही संभावित रोगी मिलेने पर उन घरों पर स्टीकर लगाएंगी। ऐसे रोगियों की जानकारी हेल्थ वर्कर एएनएम के माध्यम से ब्लॉक मुख्यालय को देंगी। सूचना के आधार पर जांच कराकर टीबी रोगी का निशुल्क इलाज कराया जाएगा।

 

Dastak campaign start from 10 March to 24 March in gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

जानकारी के मुताबिक वर्ष 2017 से ही दस्तक अभियान चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य दिमागी बुखार की रोकथाम के लिए बुखार के रोगियों को ढूंढना है। लेकिन बार इसमें टीबी को भी जोड़ा गया है। डॉ. रामेश्वर मिश्र ने बताया कि दस्तक अभियान के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा टीबी रोगी ढूंढे जा सकेंगे। क्योंकि इस अभियान का दायरा जिले के हर घर तक है।

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Dastak campaign start from 10 March to 24 March in gorakhpur
टीबी। (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बुखार के रोगियों को ढूंढने के साथ-साथ टीबी के लक्षण वाले रोगियों को ढूंढेगी। अगर किसी को दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी आ रही है, शाम को पसीने के साथ बुखार होता है, तेजी से वजन घट रहा है, सीने में दर्द है, भूख नहीं लगती है और दवा लेने के बावजूद खांसी स्थाई तौर पर नहीं रुक रही है तो यह टीबी का लक्षण हो सकता है। ऐसे लक्षण वाला व्यक्ति मिलने पर उसके घर के सामने स्टीकर लगाया जाएगा और उसकी सूचना ब्लॉक मुख्यालय को दी जाएगी।

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टीबी। (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया।
एक नजर टीबी रोगियों पर
इस साल अब तक कुल 8574 टीबी रोगी नोटिफाइड किए जा चुके हैं। पिछले साल कुल 11473 रोगी ढूंढे गए थे। इनमें सफलता दर 87 फीसदी रही। अब तक कुल 57 बाल टीबी रोगियों को गोद लिया गया। इनमें 42 ठीक हो चुके हैं। कुल 15 बच्चों का अभी भी इलाज चल रहा है। जिले में अब तक 16228 टीबी रोगियों को निक्षय पोषण योजना के तहत 500 रुपये प्रति माह की रकम उनके खाते में दी जा चुकी है।

सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने कहा कि पहली बार दस्तक अभियान में टीबी रोगियों को खोजने की जिम्मेदारी आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को दी गई है। बुखार के रोगियों, क्षय रोगियों के साथ जन्म-मृत्यु पंजीकरण से वंचित लोगों, कुपोषित बच्चों और दिमागी बुखार से दिव्यांग हुए लोगों की सूची तैयार भी तैयार करने को कहा गया है।
 
 
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