गोरखपुर शहर के बाहरी इलाकों में ‘जमीन का पानी’ तेजी से नीचे जा रहा है। चरगांवा विकास खंड क्षेत्र में भूगर्भ जलस्तर पिछले वर्षों की तुलना में दो मीटर से ज्यादा नीचे चला गया। विशेषज्ञ इसका मुख्य कारण भूगर्भ जल का ज्यादा दोहन बता रहे हैं। हालांकि, शहर के अंदरूनी क्षेत्रों में भूगर्भ जलस्तर के आंकड़े पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर हैं।
Water Problem: गोरखपुर शहर के बाहरी इलाकों में तेजी से नीचे जा रहा 'जमीन का पानी'
भूगर्भ जल विभाग ने मानसून आने से पहले भूजल स्तर का सर्वे कराया। अब आंकड़े जारी किए गए हैं। इसके मुताबिक, सिक्टौर और नौसड़ में भी जलस्तर नीचे गया है। शहरी क्षेत्र के बेतियाहाता, मंडी परिसर, घंटाघर, हांसूपुर और रुस्तमपुर के पास बड़गो में भूगर्भ जलस्तर पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर मिला है।
शहर के छह इलाकों में लगाया गया है पीजो मीटर
भूगर्भ जल विभाग मानसून आने के पहले और मानसून के जाने के बाद भूगर्भ जलस्तर का सर्वे करता है। सामान्य तौर पर शहर और आसपास के इलाकों में छह स्थानों पर लगे पीजो मीटर के माध्यम से यह गणना की जाती है। भूगर्भ जल विभाग इसकी रिपोर्ट शासन को भेजता है।
भूगर्भ जल विभाग के टेक्निकल असिस्टेंट दिनेश चंद्र जायसवाल ने कहा कि गोरखपुर शहर के बाहरी इलाकों में जलस्तर दो मीटर तक नीचे गया है। शासन के निर्देशानुसार इन इलाकों में जलस्तर बेहतर करने के लिए उपाय किए जा रहे हैं।
| स्थान | 2020 | 2021 | 2022 |
| नौसड़ | 5.85 | 5.95 | 6.00 |
| मंडी परिषद | 7.00 | 6.45 | 6.85 |
| हांसूपुर | 9.70 | 8.95 | 9.05 |
| चरगांवा | 2.60 | 3.95 | 4.70 |
| सिक्टौर | 5.67 | 5.95 | 7.05 |
| बड़गो | 6.11 | 5.83 | 5.70 |
(आंकड़े मीटर में)