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गोरखपुर चिड़ियाघर: डेढ़ साल में 85 नए मेहमानों से बढ़ा वन्यजीवों का परिवार, नए सदस्यों को भी मिला सहारा

Mon, 19 Sep 2022 01:17 PM IST
vivek shukla रोहित सिंह, गोरखपुर।
रोहित सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 19 Sep 2022 01:17 PM IST
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Gorakhpur Zoo Wildlife family grew from 85 new guests in one and a half year
Gorakhpur zoo - फोटो : अमर उजाला।

गोरखपुर के शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान के संरक्षित वन्यजीव को अब प्राणि उद्यान का परिवेश रास आने लगा है। अनुकूल वातावरण में वन्यजीवों ने एक वर्ष सात माह में 85 बच्चों को जन्म दिया है। लगभग 180 से अधिक वन्यजीवों का जीवन बचाया भी गया है। वन्यजीवों का जीवन बचाने के जज्बे के चलते चिड़ियाघर प्रदेश में भरोसे का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। इसी वजह से इस नए चिड़ियाघर में लखनऊ व कानपुर के करीबी जिलों से वन्यजीव रेस्क्यू कर भेजे जा रहे हैं।



 

Gorakhpur Zoo Wildlife family grew from 85 new guests in one and a half year
Gorakhpur Zoo - फोटो : अमर उजाला।

चिड़ियाघर में बजरीगर पक्षी ने अंडे दिए थे, जिनसे छह बच्चे निकले हैं। काकाटिल पक्षी के चार और मस्कवी डक के तीन बच्चे हैं। लव बर्ड के अंडे से दो बच्चे निकले हैं। कांकड़ हिरण और सेही ने एक-एक बच्चे को जन्म दिया है।

पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि कोरोना काल में प्राणि उद्यान बंद होने की वजह से वन्यजीवों को शांत माहौल मिला। इस अवधि में कई वन्यजीवों ने बच्चे जने हैं। प्राणि उद्यान के सभी वन्यजीवों की सतर्कता के साथ देखभाल की जा रही है।

 

Gorakhpur Zoo Wildlife family grew from 85 new guests in one and a half year
Gorakhpur zoo - फोटो : अमर उजाला।

इसी का नतीजा है कि वन्यजीवों का परिवार बढ़ रहा है। हालांकि, पिछले दिनों में कुछ वन्य जीवों की मौत हो हुई है। एक बंदर सर्पदंश से, जबकि एक कम उम्र के मगरमच्छ और मोर की मौत आपसी संघर्ष में हो गई।

जन्म लेने वाले वन्यजीव
कछुआ- 13
हिरण- 13
बजरीगर -28
मस्कवी डक- 5
सेही- 3
लवबर्ड- 13
रोजरिंग पैराकीट- 5
मगरमच्छ- 5
 

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Gorakhpur Zoo Wildlife family grew from 85 new guests in one and a half year
सिंबा और सिंबी। - फोटो : अमर उजाला।

तीन तेंदुओं सहित कई वन्य जीवों की जान बचाई
बहराइच के कर्तिनियाघाट से आदमखोर तेंदुए को वन विभाग की टीम पकड़कर लाई थी। इलाज के बाद जब वह स्वस्थ हो गया तो उसे कर्तिनियाघाट भेज दिया गया। इसी तरह मेरठ से 20 दिन के तेंदुए के शरीर से मानव गंध आने के कारण उसे उसकी मां ने नहीं अपनाया। बिना मां के 20 दिन के तेंदुए को पालना कठिन था, लेकिन मेरठ वन विभाग की टीम उसे कानपुर न ले जाकर गोरखपुर लेकर आई। यहां इलाज के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ है।
 

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Gorakhpur Zoo Wildlife family grew from 85 new guests in one and a half year
Gorakhpur Zoo - फोटो : अमर उजाला।

महाराजगंज और बिजनौर से भी ऐसे ही घायल तेंदुए को पकड़कर चिड़ियाघर लाया गया था। इलाज के बाद सात तेंदुओं के अलावा, हिमालयी गिद्ध, हिमालयी उल्लू, अजगर, बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी सहित 180 वन्यजीवों का जीवन बचाया जा चुका है।
 

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