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गोरखपुर: जलभराव हुआ कम, दुश्वारियां बरकरार, तस्वीरों में देखें शहर का हाल
Sat, 24 Jul 2021 02:15 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 24 Jul 2021 02:15 PM IST
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गोरखपुर में जलभराव।
- फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर शहर के विभिन्न इलाकों में जलभराव शुक्रवार को तीसरे दिन कुछ कम हुआ, लेकिन लोगों की दुश्वारियां अब भी बरकरार हैं। मंगलवार रात से बुधवार सुबह तक हुई बारिश के बाद शहर के विभिन्न इलाकों में जलभराव हो गया था। शुक्रवार को तीसरे दिन कुछ जलनिकासी हुई पर अभी ज्यादातर स्थानों पर समस्या बनी हुई है। सदर सांसद रवि किशन शुक्ला के आवास के पास जलनिकासी के लिए सड़क खुदवाकर नाली बनानी पड़ी। इधर, बीआरडी मेडिकल कॉलेज रोड पर लोक निर्माण विभाग ने ह्यूमपाइप डलवाकर जलनिकासी के इंतजाम किए।
गोरखपुर में जलभराव।
- फोटो : अमर उजाला।
नगर आयुक्त ने लिया जायजा, खुदवाए नाले
नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने नगर निगम की टीम संग जलभराव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण किया। रामजानकी नगर एवं राप्तीनगर वार्डों के निरीक्षण के दौरान कई निर्देश भी दिए। पंप लगाकर एवं सड़क खुदवाकर पानी निकासी की व्यवस्था बनाई गई। गोरक्षनगर में सदर सांसद के आवास के पास जल निकासी के लिए रास्ते को खोदवाकर पानी निकालने की व्यवस्था बनाई गई।
नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने नगर निगम की टीम संग जलभराव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण किया। रामजानकी नगर एवं राप्तीनगर वार्डों के निरीक्षण के दौरान कई निर्देश भी दिए। पंप लगाकर एवं सड़क खुदवाकर पानी निकासी की व्यवस्था बनाई गई। गोरक्षनगर में सदर सांसद के आवास के पास जल निकासी के लिए रास्ते को खोदवाकर पानी निकालने की व्यवस्था बनाई गई।
गोरखपुर में जलभराव।
- फोटो : अमर उजाला।
देवरिया रोड पर कम हुआ पानी
सिंघड़िया एवं एक कंपनी के शोरूम के बीच देवरिया रोड पर शुक्रवार को जलभराव काफी कम हो गया। हालांकि, प्रकृति नगर कॉलोनी, गोरक्षनगर, वसुंधरानगर, मालवीय नगर आदि मोहल्लों में पानी भरा हुआ है। नगर आयुक्त ने बताया कि जलभराव को देखते हुए सभी इलाकों में पंप लगाए गए हैं।
सिंघड़िया एवं एक कंपनी के शोरूम के बीच देवरिया रोड पर शुक्रवार को जलभराव काफी कम हो गया। हालांकि, प्रकृति नगर कॉलोनी, गोरक्षनगर, वसुंधरानगर, मालवीय नगर आदि मोहल्लों में पानी भरा हुआ है। नगर आयुक्त ने बताया कि जलभराव को देखते हुए सभी इलाकों में पंप लगाए गए हैं।
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गोरखपुर में जलभराव।
- फोटो : अमर उजाला।
उपसभापति ने भी किया विभिन्न इलाकों का निरीक्षण
उपसभापति ऋषि मोहन वर्मा के साथ मनोनीत पार्षद वीर सिंह सोनकर, रणंजय सिंह जुगनू, धर्मदेव चौहान एवं उप नगर आयुक्त संजय शुक्ला, मुख्य अभियंता सुरेश चंद, प्रवर्तन दल के प्रभारी कर्नल सीपी सिंह ने महादेव झारखंडी, सिंघड़िया, नंदानगर, गणेशपुरम, स्पोर्ट्स कॉलेज चरगावां, रामजानकी नगर आदि मोहल्लों के जलनिकासी के लिए लगे पंपिंग सेट मशीनों का निरीक्षण किया तथा व्यवस्था देखी। उपसभापति ने बताया कि कई स्थानों पर जल निकासी के मामले को लेकर अगल-बगल के मोहल्ले के नागरिक आपस में ही भिड़ जा रहे हैं। ऐसे में नागरिकों को समझा-बुझाकर जलनिकासी की व्यवस्था बनाई गई।
उपसभापति ऋषि मोहन वर्मा के साथ मनोनीत पार्षद वीर सिंह सोनकर, रणंजय सिंह जुगनू, धर्मदेव चौहान एवं उप नगर आयुक्त संजय शुक्ला, मुख्य अभियंता सुरेश चंद, प्रवर्तन दल के प्रभारी कर्नल सीपी सिंह ने महादेव झारखंडी, सिंघड़िया, नंदानगर, गणेशपुरम, स्पोर्ट्स कॉलेज चरगावां, रामजानकी नगर आदि मोहल्लों के जलनिकासी के लिए लगे पंपिंग सेट मशीनों का निरीक्षण किया तथा व्यवस्था देखी। उपसभापति ने बताया कि कई स्थानों पर जल निकासी के मामले को लेकर अगल-बगल के मोहल्ले के नागरिक आपस में ही भिड़ जा रहे हैं। ऐसे में नागरिकों को समझा-बुझाकर जलनिकासी की व्यवस्था बनाई गई।
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गोरखपुर में जलभराव।
- फोटो : अमर उजाला।
नाले-पोखरे में बने मकान, नगर निगम के लिए परेशानी का सबब
नाले-पोखरे और प्राकृतिक जलभराव वाले क्षेत्रों में बने मकान नगर निगम के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। नगर आयुक्त ने ऐसे मकानों के खिलाफ जिला प्रशासन को पत्र भेजने का निर्णय लिया है। वजह यह है कि जो जमीन नाले-पोखरे या प्राकृतिक जलभराव वाली श्रेणी के हैं वहां अनधिकृत रूप से मकान कैसे बन गए? दरअसल गोरखपुर शहर तकरीबन चारों ओर पानी का प्राकृतिक बहाव है। दशकों पहले इन सभी इलाकों में ही बारिश का पानी भरता था। गोड़धोइया नाला, झझवा गड्ढा, डोमिनगढ़, मोतीपोखरा, चक्सा हुसैन, रसूलपुर भट्टा, इलाहीबाग, सुमेर सागर, सिंघड़िया इलाका प्राकृतिक जलभराव का क्षेत्र था, लेकिन इन सभी इलाकों में आज मकान बन चुके हैं। ऐसे में जब भी बारिश हो रही है कि तब इन सभी इलाकों में पानी भर जाता है।
नाले-पोखरे और प्राकृतिक जलभराव वाले क्षेत्रों में बने मकान नगर निगम के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। नगर आयुक्त ने ऐसे मकानों के खिलाफ जिला प्रशासन को पत्र भेजने का निर्णय लिया है। वजह यह है कि जो जमीन नाले-पोखरे या प्राकृतिक जलभराव वाली श्रेणी के हैं वहां अनधिकृत रूप से मकान कैसे बन गए? दरअसल गोरखपुर शहर तकरीबन चारों ओर पानी का प्राकृतिक बहाव है। दशकों पहले इन सभी इलाकों में ही बारिश का पानी भरता था। गोड़धोइया नाला, झझवा गड्ढा, डोमिनगढ़, मोतीपोखरा, चक्सा हुसैन, रसूलपुर भट्टा, इलाहीबाग, सुमेर सागर, सिंघड़िया इलाका प्राकृतिक जलभराव का क्षेत्र था, लेकिन इन सभी इलाकों में आज मकान बन चुके हैं। ऐसे में जब भी बारिश हो रही है कि तब इन सभी इलाकों में पानी भर जाता है।