गोरखपुर में दो दिन तक हुई बारिश का असर नदियों के जलस्तर पर दिखाने लगा है। जनपद में बहने वाली रोहिन नदी एक बार फिर खतरे का निशान पार कर गई। वह खतरे के निशान से 42 सेमी ऊपर बहने लगी है। वहीं घाघरा नदी खतरे के निशान से मात्र तीन सेंमी नीचे बह रही है। राप्ती स्थिर है। प्रशासन की तरफ से सभी तहसीलदारों को कहा गया है कि जहां भी जरूरत पड़े नाव लगा लें।
केंद्रीय जल आयोग से मिले आंकड़ों के मुताबिक घाघरा नदी अयोध्या में खतरे के निशान से तीन सेंमी नीचे बह रही है। जबकि राप्ती नदी बर्डघाट में खतरे के निशान से 37 नीचे बह रही है, राहत की बात यह है कि राप्ती का जलस्तर गुरुवार की शाम को स्थिर हो गया था। वहीं गोर्रा नदी पीड़रा घाट मे बढ़ रही है पर खतरे के निशान से काफी नीचे है।
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नदी का जलस्तर।
- फोटो : अमर उजाला।
रोहिन नदी जब खतरे के निशान से ऊपर होती है तो जंगल कौड़िया ब्लाक के दर्जनों गांव पानी से घिर जाते हैं। कुछ रोज पहले रोहिन खतरे का निशान पार की थी, तब कई गांवों में नाव लगाई गई थी।
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गोरखपुर में बाढ़ का खतरा।
- फोटो : अमर उजाला।
आपदा कार्यालय के मुताबिक अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने सभी तहसीलदारों को निर्देश दिया है कि जहां भी जरूरत पडे वहां पर नाव की व्यवस्था कर नाव लगा लें। अभी फिलहाल कैंपियरगंज तहसील में रोहिन की वजह से कुछ गांवों का आवागमन बाधित हो सकता है। ऐसे आधा दर्जन गांवों में चंद रोज पहले रोहिन के खतरे का निशान पार करने पर नाव को लगाया गया था।
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गोरखपुर में बाढ़ का खतरा।
- फोटो : अमर उजाला।
घाघरा यदि खतरे का निशान पार करेगी तो बड़हलगंज और गोला क्षेत्र के दर्जनों गांव प्रभावित होंगे। बड़हलगंज का कछारांचल एरिया के दजनों गांव का आवागमन बाधित होता है। घाघरा का पानी जब तरैना नाला में से होकर गनगरी नाले में पहुचता है तो देवरिया को जोड़ने वाला असवनपार-साऊखोर मार्ग बाधित हो जाता है। ऐसे में बाढ़ की आशंका में ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।
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गोरखपुर में बाढ़ का खतरा।
- फोटो : अमर उजाला।
खतरे का मतलब अलर्ट हो जाइये
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता दिनेश सिंह ने बताया कि लाल निशान का मतलब अलर्ट हो जाइये। जब नदी खतरे का निशान पार करती है तो विभाग पूरी तरह से सजग हो जाता है कि खतरा हो सकता है। अभी सभी बांध सुरक्षित हैं। निगरानी बढ़ा दी गई है।