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Exclusive: गोरखपुर के इन अस्पतालों में कोविड के इलाज की अनुमति पर उठे सवाल, आईएमए के पदाधिकारी बोले- इन अस्पतालों को जानते ही नहीं
Thu, 03 Jun 2021 11:56 AM IST
vivek shukla
नीरज मिश्र, गोरखपुर।
नीरज मिश्र, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 03 Jun 2021 11:56 AM IST
सार
जिले के 15 निजी अस्पतालों में इलाज की अनुमति पर आईएमए ने सवाल उठाए हैं।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : istock
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की गोरखपुर इकाई ने कोरोना के इलाज के लिए 15 निजी अस्पतालों को अनुमति देने पर सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन का कहना है कि हम इन्हें जानते तक नहीं। इन अस्पतालों के पास पर्याप्त सुविधा और संसाधन भी नहीं हैं। अब मरीजों के परिजनों से ज्यादा शुल्क वसूली की बात सामने आ रही है। तथ्यों के मुताबिक ‘अनजान’ अस्पतालों में ही मनमानी हुई है। इन्होंने निजी अस्पताल व डॉक्टरी के पेशे को बदनाम किया है। ऐसे अस्पतालों की सूची तैयार की जा रही है।
प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
मनमाने ढंग से मंगवाए इंजेक्शन
कुछ निजी अस्पतालों ने बिना जरूरत मरीजों के परिजनों से रेमडेसिविर और टोसलीजुमैब इंजेक्शन मंगवाए। दोनों इंजेेक्शन बाजार में महंगे मिल रहे थे। एक शिकायत ऐसी भी आई कि निजी अस्पताल के चिकित्सक इंजेक्शन मंगा रहे हैं, लेकिन मरीज को लगाए नहीं जा रहे। अस्पताल का स्टाफ इंजेक्शन बेच देता था।
कुछ निजी अस्पतालों ने बिना जरूरत मरीजों के परिजनों से रेमडेसिविर और टोसलीजुमैब इंजेक्शन मंगवाए। दोनों इंजेेक्शन बाजार में महंगे मिल रहे थे। एक शिकायत ऐसी भी आई कि निजी अस्पताल के चिकित्सक इंजेक्शन मंगा रहे हैं, लेकिन मरीज को लगाए नहीं जा रहे। अस्पताल का स्टाफ इंजेक्शन बेच देता था।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : पीटीआई
शव देते समय भी उगाही
कोरोना संक्रमित के निधन के बाद भी कुछ निजी अस्पतालों में मनमानी की गई। शव देने के बदले धन उगाही की शिकायतें मिली हैं। शिकायत के आधार पर जांच हुई तो मामला सही मिला। कई निजी अस्पताल हैं, जिन्होंने अधिक रकम वसूली है। इन रुपयों को प्रशासन ने परिजनों और उनके तीमारदारों को वापस कराए हैं।
कोरोना संक्रमित के निधन के बाद भी कुछ निजी अस्पतालों में मनमानी की गई। शव देने के बदले धन उगाही की शिकायतें मिली हैं। शिकायत के आधार पर जांच हुई तो मामला सही मिला। कई निजी अस्पताल हैं, जिन्होंने अधिक रकम वसूली है। इन रुपयों को प्रशासन ने परिजनों और उनके तीमारदारों को वापस कराए हैं।
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गोरखपुर राणा हॉस्पिटल।
- फोटो : अमर उजाला।
इन अस्पतालों पर कसा शिकंजा
बद्रिका हॉस्पिटल की तीन शिकायतें मिलीं। अस्पताल को सील करके मुकदमा दर्ज कराया गया। राणा हॉस्पिटल ने एक लाख रुपये वापस किए। डिग्निटी हॉस्पिटल के खिलाफ दो शिकायतें दर्ज हैं। अस्पताल का पंजीकरण निरस्त करके मरीजों की भर्ती पर रोक लगाई। एबीएस हॉस्पिटल, अर्पित हॉस्पिटल, मृत्युंजय हॉस्पिटल और जीवनदीप हॉस्पिटल ने भी ज्यादा शुल्क वसूले और वापस किए हैं।
बद्रिका हॉस्पिटल की तीन शिकायतें मिलीं। अस्पताल को सील करके मुकदमा दर्ज कराया गया। राणा हॉस्पिटल ने एक लाख रुपये वापस किए। डिग्निटी हॉस्पिटल के खिलाफ दो शिकायतें दर्ज हैं। अस्पताल का पंजीकरण निरस्त करके मरीजों की भर्ती पर रोक लगाई। एबीएस हॉस्पिटल, अर्पित हॉस्पिटल, मृत्युंजय हॉस्पिटल और जीवनदीप हॉस्पिटल ने भी ज्यादा शुल्क वसूले और वापस किए हैं।
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corona patient
- फोटो : istock
मरीजों को खरीदा और बेचा
नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ खालिद अब्बासी ने कहा कि कोविड काल में कई निजी अस्पतालों ने मरीजों को खरीदा और बेचा है। एंबुलेंस चालकों से सेटिंग करके ऐसे अस्पतालों ने जमकर उगाही की है। अगर ऐसा नहीं होता तो ऐसे अस्पतालों को अनुमति नहीं दी जाती, जिन अस्पतालों में डॉक्टर विजिट ही नहीं करते हैं।
नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ खालिद अब्बासी ने कहा कि कोविड काल में कई निजी अस्पतालों ने मरीजों को खरीदा और बेचा है। एंबुलेंस चालकों से सेटिंग करके ऐसे अस्पतालों ने जमकर उगाही की है। अगर ऐसा नहीं होता तो ऐसे अस्पतालों को अनुमति नहीं दी जाती, जिन अस्पतालों में डॉक्टर विजिट ही नहीं करते हैं।