गोरखपुर के झंगहा में तीन बुजुर्गों के हत्यारोपी मानसिक रूप से विक्षिप्त बताए जा रहे रामदयाल ने पुलिस की पूछताछ में कहा कि वह रावण वध कर रहा था, इसमें बाधक बने राक्षसों का भी अंत कर दिया। भैंस के बच्चे को रावण बता रहे रामदयाल ने कहा कि मेरे और भगवान के बीच में जो आएगा उसे मार दूंगा। पुलिस टीम उसे थाने ले जाने लगी तो रास्ते भर कहता रहा कि मैं रातभर पैदल चलता रहता हूं, मेरे प्रभु भी पैदल ही चलते थे।
मोतीराम अड्डा के कोईरान टोला निवासी कुबेर के परिवार में तीन पीढ़ियों से लोग मानसिक बीमारी के शिकार होते आ रहे हैं। गांव के लोगों का कहना है कि कुबेर के घर में बुरी आत्मा का वास बताते हुए एक साल पहले एक तांत्रिक ने तंत्र-मंत्र किया था। इसके एवज में उसने 50 हजार रुपये लिए थे और बुरी आत्मा को शांत करने के लिए घर में मिट्टी की एक पिंडी बनाई थी जिसकी परिवार के सदस्य रोजाना पूजा करते थे।
2 of 9
घटनास्थल पर जुटी भीड़ और पुलिस
- फोटो : संवाद
कोईरान टोला के लोगों का कहना है कि कुबेर दो भाई थे। कुबेर के भाई साधू ने शादी नहीं की थी, उनको भी मानसिक बीमारी थी। वहीं कुबेर और उनकी पत्नी द्रौपदी देवी के दो बेटे विजय बहादुर और मेवा लाल हैं। दोनों भाई का मानसिक रोग का इलाज चलता है। विजय बहादुर और उनकी पत्नी कुसमावती का इकलौता बेटा आरोपी रामदयाल भी मानसिक विक्षिप्त है।
3 of 9
आरोपी रामदयाल
- फोटो : संवाद
अजीब हरकतें करने की वजह से उसका भी इलाज चलता है। ग्रामीणों ने बताया कि पूरे परिवार की जिम्मेदारी कुबेर पर ही थी और सब्जी की खेती करके परिवार चलाते थे। घर में झगड़ा होने पर कुबेर ही सबको समझाकर शांत कराते थे। वह दवा से इलाज के साथ तंत्र-मंत्र कराकर घर में शांति का माहौल बनाना चाहते थे।
4 of 9
घटनास्थल पर जुटी भीड़ और पुलिस
- फोटो : संवाद
इस तरह दिया घटना को अंजाम
कोईरान टोला में घर से 200 मीटर दूर कुबेर ने पशुओं को रखने के लिए गोशाला बनवाई थी जहां पर गाय-भैंस पाले हुए थे। ग्रामीणों ने बताया कि शुक्रवार को तड़के पांच बजे के करीब गोशाला में रामदयाल को भैंस के पड़वा ने धक्का दे दिया। इसके बाद वह फावड़े से उसे मारने लगा। पड़वा को लहूलुहान देखकर दादी और कुबेर और उनकी पत्नी और साधू रोकने आए। इस पर रामदयाल उनकी तरफ हमला करने लिए दौड़ा।
5 of 9
आरोपी के कमरे के बाहर लगा तंत्र मंत्र
- फोटो : संवाद
डर की वजह से कोई आगे नहीं आया
तीनों बुजुर्ग भागे तो रामदयाल फिर जाकर पड़वा को मारने लगा, तभी दूर से ही द्रौपदी ने चिल्लाकर रामदयाल को मना किया। इसके बाद वह पड़वा को छोड़कर एक हाथ में कुल्हाड़ी और दूसरे में फावड़ा लिए दादी को मारने के लिए दौड़ा। इसके बाद घर की तरफ भाग रहे तीनों बुजुर्ग को दौड़ा-दौड़ाकर उसने मारकर लहूलुहान कर दिया। यह देखकर सहमी रामदयाल की मां कुसमावती खेतों के रास्ते भागी और गांव के लोगों से मदद की गुहार लगाई। गांव के लोग पहुंचे तो वह खून से सनी कुल्हाड़ी लिए घायल पड़े बुजुर्गों के पास बैठा दिखा। डर के मारे को आगे नहीं बढ़ सका। रामदयाल शव के पास थोड़ी देर तक बैठा रहा, इसके बाद घर जाकर अपने कमरे में भीतर से दरवाजा बंर करके बैठ गया।