पापा के खुद कई कई लड़कियों से अफेयर थे लेकिन वह मम्मी पर शक करते थे। इस बात को लेकर उनके बीच लड़ाई भी होती रहती थी। मम्मी बहुत अच्छी थीं। मेरी खुशी के लिए वह दिन-रात मेहनत करती थीं। हर ख्वाहिश पूरी करती थीं। कभी नहीं सोचा था कि पापा मेरी खुशियां छीन लेंगे।
शनिवार को खजनी क्षेत्र के पुरैनी कटया गांव स्थित ममता के मायके में मुखाग्नि देने के बाद बेटी मुक्ति मामा संदीप से लिपटकर रो पड़ी। मामा ने किसी तरह से उसे संभाला। शाहपुर इलाके के गीता वाटिका के पास बुधवार शाम विवाद के बाद आरोपी पति विश्वकर्मा चौहान ने पिस्टल से गोली मारकर ममता की हत्या कर दी थी। इस मामले में बेटी मुक्ति चश्मदीद है।
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आरोपी पति और ममता का फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मुक्ति ने पुलिस और अपने मामा संदीप को बताया कि बुधवार शाम वह मां के साथ स्कूटी से सामान लेने गई थी। ममता ने गीता वाटिका के पास एक फोटो स्टूडियो पर स्कूटी रोकी। इसके बाद बेटी के साथ पड़ोस की दुकान में राशन लेने चली गई। मुक्ति को वहां रोकने के बाद खुद फोटो लेने की बात कहकर ममता स्टूडियो में चली गई। कुछ देर बाद जब वह मां के पास जा रही थी तो देखा कि उसके पिता विश्वकर्मा फोटो स्टूडियो के बाहर खड़े थे।
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बेटी ममता की मौत के बाद मां
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मुक्ति ने बताया कि पहले तो उसे लगा कि वह सामान्य बातचीत करने के लिए मां के पास आए हैं लेकिन कुछ देर बाद दोनों में धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पहले पापा नीचे गिर गए। वापस उठने के बाद उन्होंने मम्मी को धक्का दे दिया। मम्मी के नीचे गिरते ही उन्होंने पिस्टल निकालकर मां पर गोली चला दी।
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घटनास्थल पर मामा के साथ आई ममता की बेटी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एक पल लगा कि पापा मुझे ही न मार दें, मैं सहम गई...
मुक्ति ने बताया कि उसकी आंखों के सामने मम्मी जमीन पर गिर गई थीं। खून से लथपथ थीं, तड़प रही थीं। मैंने नजरें उठाकर पापा की तरफ देखा तो वह वहीं पर मम्मी को तड़पते देख रहे थे। एक पल लगा कि पापा उसे भी न गोली न मार दें। थोड़ी देर सहम कर वहीं ठहर गई, तब तक लोगों की भीड़ लग गई। सब लोग जल्दी-जल्दी मम्मी को हॉस्पिटल लेकर गए। वह भी उनके साथ थी। डॉक्टर ने देखने के बाद कहा-अब तुम्हारी मम्मी नहीं रहीं।
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हत्यारोपी पति विश्वकर्मा पुलिस की गिरफ्त में
- फोटो : पुलिस
मामा बोले-मुक्ति मेरी जिम्मेदारी
संदीप ने बताया कि ममता की अंतिम संस्कार की सारी रस्म भांजी मुक्ति ने ही निभाई है। भांजी अब उनकी जिम्मेदारी है। वह उसे अपने साथ रखेंगे। हमें डर है कि अगर विश्वकर्मा जेल से छूट गया तो कहीं मुक्ति को भी नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसा इसलिए कि वही इस पूरी वारदात की चश्मदीद गवाह और केस की वादी है।