उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के बड़हलगंज विकास खंड के कछारांचल स्थित राप्ती नदी पर बने कोठा-नवलपुर जर्जर तटबंध के भरोसे विभाग बाढ़ से लड़ने की तैयारी कर रहा है। कई दिनों से चल रहा मरम्मत कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में विभागीय लापरवाही का खामियाजा कछारवासियों को भुगतना पड़ सकता है। जिसे लेकर उनमें भय व्याप्त है।
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gorakhpur river
- फोटो : अमर उजाला।
शासन ने 15 जून तक बंधों की मरम्मत का आदेश जारी किया था। उसके बावजूद बंधों की मरम्मत अधूरी रह गई। कछार क्षेत्र के 53 गांवों को राप्ती नदी से सुरक्षा के लिए बनाया गया कोठा-नवलपुर बांध जर्जर हालत में है। इस बांध पर खुटभार, कंसासुर, सेमराबुजुर्ग, बैरियाडीह, मझवलिया, रूदौली, ददरी, नवलपुर, आछीडीह गांव के पास बना बड़ा रेनकट तबाही मचाने को काफी है।
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- फोटो : अमर उजाला।
यह तटबंध टूटा तो कछार में तबाही मच सकती है। कहने को तो यह बांध है लेकिन इसके किनारे बसे सैकड़ों गांवों के लिए यह लाइफलाइन है। लोगों का आवागमन बांध पर दिन भर लगा रहता है लेकिन मरम्मत के अभाव में इसकी स्थिति काफी जर्जर हो गई है। बंधे पर उगे झाड़-झंखाड़ स्थिति को नाजुक बनाए हुए हैं। बंधे पर जगह-जगह रेनकह, होल हो गए है।
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- फोटो : अमर उजाला।
अगर बांध टूटा तो मझवलिया, रूदौली, बैरियाडीह, बहसुआ, कंशासुर, ददरी, सेमराखुर्द, सेमराबुजुर्ग, नवलपुर, आछीडीह, मठिया सहित 53 गांव बाढ़ से प्रभावित होंगे। क्षेत्र के गोपाल सिंह, प्रशांत सिंह, घनश्याम विश्वकर्मा, विजय कुमार निषाद, हरिश्चंद्र शाही, बलवीर यादव, रामशकल यादव, मुन्ना प्रसाद आदि का कहना है कि बाढ़ के समय मरम्मत का कार्य प्रारंभ होने से धन का अपव्यय होता है। बाढ़ हटते ही जिम्मेदार चैन से बजट का अभाव बताकर सोते हैं। यदि नदी का जलस्तर ऐसे ही बढ़ता रहा तो बाढ़ से इन गांवों को कोई बचा नहीं पाएगा।
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सिंचाई विभाग बाढ़ खंड दो के अधिशासी अभियंता आरके खरे ने बताया कि बांध के अधिकांश हिस्से की मरम्मत करा दी गई थी। लागातार हो रही बारिश के कारण बंधों पर रेनकट हुए हैं। मौसम सही होते ही मरम्मत करा दी जाएगी। विभाग नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए है।