सामान्य तौर पर बाजार में मिलने वाली शकरकंद (स्वीट पोटैटो) का अंदर का हिस्सा (पल्प) सफेद होता है, लेकिन गोरखपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. रामचेत चौधरी ने पोषक तत्व से भरपूर सुनहरा पल्प वाला शकरकंद विकसित किया है। यह न सिर्फ बीटा कैरोटीन से भरपूर है बल्कि इसमें काफी मात्रा जिंक और लौह तत्व है, जो गर्भवती महिलाओं के लिए भी काफी फायदेमंद है।
गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद है सुनहरा शकरकंद, जानिए क्या है इसमें खास
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अभी हाल में गोरखपुर विश्वविद्यालय में आयोजित पूर्वांचल के समग्र विकास पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिक डॉ. रामचेत चौधरी ने कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही को सुनहरा शकरकंद भेंट की थी। यह सुनहरा शकरकंद अपने आप में सेहत का खजाना है। शकरकंद की नई प्रजाति न सिर्फ पूर्वांचल के बच्चों की सेहत के लिए काफी बेहतर है बल्कि गर्भवती महिलाओं को सेहत संबंधी कई जरूरतों को पूरा करने वाला है।
विटामिन ए की कमी को आसानी से करता है पूरा
डॉ. रामचेत चौधरी ने शकरकंद की जो नई प्रजाति विकसित की है, वह गोरखपुर के बच्चों की सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद है। दरअसल, लो लैंड एरिया होने ी वजह से यहां के बच्चों में डायरिया की शिकायत बनी रहती थी। डॉ. चौधरी का कहना है कि नए शोध के अनुसार अब डॉक्टर डायरिया के मरीजों को पहले विटामिन-ए की खुराक देते हैं। इसके बाद डायरिया की दवा देते हैं। इससे मरीज बहुत जल्द स्वस्थ हो जाता है। इसी को ध्यान में देखते हुए उन्होंने शकरकंद की यह प्रजाति तैयार की है।
उन्होंने बताया कि मात्र 100 ग्राम की मात्रा में इस शकरकंद को खाने से ही एक सप्ताह में विटामिन-ए की जरूरत पूरी हो जाती है। इसमें गाजर की तुलना में दोगुना बीटा कैरोटीन है। बीटा कैरोटीन किसी भी फल में पाया जाने वाला ऐसा पोषक तत्व है, जो शरीर में विटामिन-ए की जरूरतों को पूरा करता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए है फायदेमंद
शकरकंद में बीटा कैरोटीन के अलावा जिंक और आयरन की मात्रा है। इस वजह से यह गर्भवती महिलाओं के लिए भी काफी फायदेमंद है।
बलुई दोमट मिट्टी शकरकंद के लिए बेहतर होती है। 20 से 35 डिग्री तापमान में इसकी उपज काफी अच्छी होती है। सामान्य तौर पर शकरकंद की उपज 10 से 15 टन प्रति हेक्टेयर होती है, लेकिन इस नई प्रजाति की उपज 20 से 25 टन होती है।