कहते हैं कि सबसे बड़ा कष्ट एक पिता के ऊपर पुत्र का जनाजा होता है। रविवार की देर शाम एक बुजुर्ग पिता ने लड़खड़ाते कदमों से बेटे के साथ ही बहू की भी चिता को मुखाग्नि दी। वहीं छह महीने की मासूम बच्ची का दाह संस्कार किया तो पूरे गांव के लोगों की आंखें नम हो गईं। बुजुर्ग पिता को बिलखते देख वहां मौजूद हर किसी का कलेजा फट जा रहा था। दंपती व मासूम बच्ची की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। रविवार की देर शाम कालेसर मोक्ष धाम पर एक साथ अंतिम संस्कार किया गया।
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बेटे-बहू और पोती का दाह संस्कार कर रो पड़े बुजुर्ग पिता, बोले- भगवान दुश्मन को भी न दिखाए ये दिन
Mon, 15 Feb 2021 06:16 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 15 Feb 2021 06:16 PM IST
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मृत पति-पत्नी व मासूम बच्ची की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला।
मृतकों की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला।
जानकारी के मुताबिक, गोरखपुर जिले के सहजनवां के मुंडा गांव निवासी राजेश पांडेय पत्नी कुसुमलता और छह महीने की बच्ची कृतिका के साथ सहजनवां में इलाज कराने आए थे। बाइक से तीनों वापस लौट रहे थे कि तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बच्ची कुसुमलता की गोद से छूटकर दूर जा गिरी। जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। वहीं कुसुमलता और उसके पति राजेश भी गिर गए। गंभीर चोट लगने से वह बेहोश हो गए। ग्रामीणों की मदद से पुलिस उन्हें अस्पताल ले जा रही थी। बच्ची की मौत से अंजान कुसुमलता को जैसे ही होश आया उसने बेटी के बारे में पूछा। लोगों ने सोचा इसकी जान बच जाए तो बताएंगे, लेकिन अस्पताल तक पहुंचते-पहुंचते पति राजेश पांडेय और कुसुमलता की भी सांसें थम गईं।
मृत मासूम बच्ची की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला।
पोती को हाथ में उठाते ही कांप गए राधेश्याम
छह महीने की बच्ची कृतिका पांडेय को जल प्रवाह के लिए जब राधेश्याम ने हाथों में लिया तो वह कांपने लगे। घाट पर ही दहाड़े मारकर रोने लगे, लेकिन मौजूद लोगों ने उन्हें समझाया और फिर शव को जल में प्रवाहित करवा दिया गया।
छह महीने की बच्ची कृतिका पांडेय को जल प्रवाह के लिए जब राधेश्याम ने हाथों में लिया तो वह कांपने लगे। घाट पर ही दहाड़े मारकर रोने लगे, लेकिन मौजूद लोगों ने उन्हें समझाया और फिर शव को जल में प्रवाहित करवा दिया गया।
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मृत कुसुमलता की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला।
दो साल की उम्र में छिन गया मां-बाप का साया
हादसे के दौरान राजेश और कुसुमलता की एक मासूम बेटी घर पर भी थी। दो साल की उम्र में ही बच्ची के सिर से उसके मां-बाप का साया छिन गया है। वह बिलख रही है। उसकी एक ही जिद थी कि मां के पास जाना है। घरवाले उसे संभाल नहीं पा रहे थे। रिश्तेदारी से आए लोग बच्ची को लेकर किनारे गए। पड़ोसियों ने टॉफी बिस्किट देकर किसी तरह उसे चुप कराया। मगर बच्ची के आंसू कब तक रुके रहेंगे कोई नहीं जानता।
हादसे के दौरान राजेश और कुसुमलता की एक मासूम बेटी घर पर भी थी। दो साल की उम्र में ही बच्ची के सिर से उसके मां-बाप का साया छिन गया है। वह बिलख रही है। उसकी एक ही जिद थी कि मां के पास जाना है। घरवाले उसे संभाल नहीं पा रहे थे। रिश्तेदारी से आए लोग बच्ची को लेकर किनारे गए। पड़ोसियों ने टॉफी बिस्किट देकर किसी तरह उसे चुप कराया। मगर बच्ची के आंसू कब तक रुके रहेंगे कोई नहीं जानता।
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मृतक राजेश की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला।
बड़े भाई को कोई संतान नहीं
मृतक राजेश पांडेय के बड़े भाई को कोई संतान नहीं है। वह छोटे भाई के बच्चों को ही अपना मानकर जी रहे थे, मगर एक बच्ची के साथ ही भाई और उसकी पत्नी की मौत ने परिवार को झकझोर दिया है।
मृतक राजेश पांडेय के बड़े भाई को कोई संतान नहीं है। वह छोटे भाई के बच्चों को ही अपना मानकर जी रहे थे, मगर एक बच्ची के साथ ही भाई और उसकी पत्नी की मौत ने परिवार को झकझोर दिया है।