लॉकडाउन-तीन में औद्योगिक इकाइयों को छूट मिलने के बाद नदियों का प्रदूषण फिर से बढ़ने लगा है। रोहिन नदी के बाद शनिवार को राप्ती नदी में जहरीला पानी आ गया। इसकी वजह से पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो गई।
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- फोटो : अमर उजाला।
इससे काफी संख्या में मछलियां मरकर पानी के ऊपर तैरती हुई नजर आयीं। मरी हुई मछलियों को पकड़ने के लिए लोगों का जमावड़ा लगा रहा। प्रदूूषण नियंत्रण बोर्ड के कर्मचारियों ने पानी का सैंपल लेकर जांच की तो उसमें ऑक्सीजन की मात्रा काफी कम मिली। शनिवार को राजघाट पुल से ग्रामसभा डांगीपार व विशुनपुरा से सटे मलौनी बंधे के किनारे राप्ती नदी में मछलियां उतारकर किनारे आ गईं। नदी के आसपास रहने वाले लोगों ने मछलियों को पकड़ना शुरू कर दिया।
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देखते ही देखते यह बात आसपास के गांवों में फैल गई और काफी संख्या में ग्रामीण जाल व डंडा लेकर नदी किनारे पहुंच गए और मछलियों को पकड़ने लगे। लोगों का कहना था कि नदी का पानी हल्का लाल दिखाई पड़ रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि पानी में कोई जहरीला तत्व आ गया है, जिससे मछलियां मरने लगी हैं।
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जानकारी मिलने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक सहायक राममिलन वर्मा ने दो कर्मचारियों अयोध्या प्रसाद और हंसराज को जांच के लिए भेजा। दोनों कर्मचारी उस स्थान पर पहुंचे जहां काफी संख्या में मछलियों के मरने की घटना हुई थी। उन्होंने नदी के पानी का सैंपल एकत्र कर उसकी जांच की, जिसमें आक्सीजन की मात्रा मानक से कम मिली।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक सहायक राममिलन वर्मा ने कहा कि पानी में ऑक्सीजन का स्तर कम होकर मात्र चार मिलीग्राम प्रति लीटर रह गया था। इसकी वजह से मछलियों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल सकी। पानी भी काफी मटमैला था। यह प्रदूषण किस वजह से हुआ है। इसकी पूरी जानकारी नहीं मिल सकी है। उधर, रोहिन नदी में भी प्रदूषण को लेकर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को लिखा गया है।