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Lockdown in UP: इतिहास में पहली बार गोरखपुर स्टेशन से नहीं चली एक भी ट्रेन, 115 साल पहले इस वजह से यात्रियों ने किया था आंदोलन

Sat, 18 Apr 2020 09:46 AM IST
vivek shukla राजन राय, गोरखपुर।
राजन राय, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 18 Apr 2020 09:46 AM IST
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Coronavirus Lockdown in Gorakhpur, UP (Uttar Pradesh) News in Hindi: Foundation Day First time Train not run due to coronavirus
गोरखपुर में लॉकडाउन, उत्तर प्रदेश: रेलवे स्टेशन की पुरानी तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
कोरोना महामारी के चलते रेलवे में बृहस्पतिवार को एक और इतिहास दर्ज हो गया। 157 वर्षों के लंबे सफर में पहली बार ऐसा हुआ है कि रेलवे के स्थापना दिवस पर भी ट्रेनों (यात्री गाड़ी) के पहिए थमे हुए हैं। यहां तक की रेलवे को अपना स्थापना दिवस समारोह भी स्थगित करना पड़ा है।
Coronavirus Lockdown in Gorakhpur, UP (Uttar Pradesh) News in Hindi: Foundation Day First time Train not run due to coronavirus
गोरखपुर में लॉकडाउन, उत्तर प्रदेश: पहले इस तरह होते थे ट्रेन के कोच। - फोटो : अमर उजाला

देश में पहली ट्रेन 16 अप्रैल 1853 को बोरीबंदर (छत्रपति शिवाजी टर्मिनल) से ठाणे के बीच चलाई गई थी। ट्रेनों के संचालन के लिए 1905 में रेलवे बोर्ड का गठन किया गया। जबकि, गोरखपुर से 1885 में पहली बार ट्रेन चली। इसी समय गोरखपुर स्टेशन को स्थापित किया गया था।

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गोरखपुर में लॉकडाउन, उत्तर प्रदेश: पहले ऐसा दिखता था गोरखपुर रेलवे स्टेशन। - फोटो : अमर उजाला
पूर्वोत्तर रेलवे का गठन 14 अप्रैल 1952 को हुआ। इस क्षेत्रीय रेलवे के पहले जनरल मैनेजर जी. पांडे बने थे। पहले डिस्ट्रिक्ट पैटर्न पर क्षेत्र बनाया गया तब एक जोन में आठ डिस्ट्रिक्ट होते थे।

एक मई 1969 को मंडलीय पैटर्न किया गया तब चार डिवीजन लखनऊ, समस्तीपुर, बनारस और इज्जतनगर बने। बाद में सोनपुर का गठन हुआ और एनईआर (पूर्वोत्तर रेलवे) में पांच डिवीजन हो गए। एक अक्तूबर 2002 को दो डिवीजन सोनपुर और समस्तीपुर को अलग कर पूर्व मध्य रेलवे में मिला दिया गया।
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Coronavirus Lockdown in Gorakhpur, UP (Uttar Pradesh) News in Hindi: Foundation Day First time Train not run due to coronavirus
गोरखपुर में लॉकडाउन, उत्तर प्रदेश: पहली विद्युत इंजन से चलने वाली ट्रेन। - फोटो : अमर उजाला
1925 में चली थी पहले इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेन
रेलवे में 1925 में पहली विद्युत इंजन से ट्रेन चली। यह ट्रेन कुर्ला और मुंबई के बीच में चलाई गई। जबकि एनईआर (पूर्वोत्तर रेलवे) में पहले इलेक्ट्रिक इंजन से मेमू ट्रेन 2002 में चली थी, इसे लखनऊ से बाराबंकी के बीच चलाया गया था। इसका शुभारंभ तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था।
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गोरखपुर में लॉकडाउन, उत्तर प्रदेश: विद्युत इंजन से चलने वाली ट्रेन में बैठे लोग। - फोटो : अमर उजाला

ट्रेन में शौचालय के लिए यात्रियों ने किया था आंदोलन
ट्रेन में सफर के दौरान यात्रियों के सामने सबसे बड़ी समस्या शौचालय की थी। इसके लिए बड़े स्टेशनों पर ट्रेन रुकती थी। 1905 में यात्रियों ने इसके लिए आंदोलन शुरू कर दिया। यह चिंगारी पूरे देश में फैली और अंग्रेजों ने शौचालय के बारे में मंथन शुरू किया।


पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक कार्यालय में उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक कोच में एक सीट को नीचे से होल कर टॉयलेट का शक्ल दिया गया। लेकिन, पर्दा न होने के चलते लोग इसका उपयोग करने से हिचकते थे। यह तरकीब सफल नहीं हुई। इसके बाद एक कोना निर्धारित कर उसे घेरा गया। बाद में विस्तार कर बाकायदा कोच के दोनों ओर दो-दो शौचालय बनाए गए।
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