कोरोना ने बहुत से लोगों की जिंदगी निगल ली। तमाम परिवार उजड़ गए और कई बच्चे अनाथ हो गए। यह दास्तां भी गोरखपुर के पीपीगंज कस्बे के रहने वाले ऐसे ही एक पीड़ित परिवार की है। कोरोना की चपेट में आए पति को बचाने के लिए उसकी पत्नी, गोद में 25 दिन का बच्चा और साथ में तीन साल की बेटी के साथ घर से अस्पताल तक दौड़ती रही। पेट काटकर किसी अनहोनी और बच्चों के भविष्य के लिए जो भी जमा पूंजी इकट्ठा की थी वह इलाज में चली गई। जो दो-चार गहने थे उन्हें भी बेचना पड़ा। मगर ये सारे जतन भी बेकार साबित हुए। पति जिंदगी की जंग हार गया। सब कुछ गंवाने के बाद पत्नी के पास बाकी बचा घनघोर अंधेरा, हताशा और आंसू।
यूपी: पति को बचाने में बिक गए गहने फिर भी नहीं बची जान, पत्नी बोली- अब तो सिर्फ बच्चों के लिए जिंदा हूं
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वह कहती है कि जिंदगी तब भी आसान नहीं थी। पति सब्जी का ठेला लगाकर थोड़ा बहुत ही कमा पाते थे। मगर इस बात की तसल्ली थी कि उनका साया था। उम्मीद थी कि आज नहीं तो कल सब ठीक हो जाएगा। 25 दिन पहले जब छोटा बेटा पैदा हुआ तो उसने संकल्प लिया था कि उसके साथ ही साथ तीन साल की बेटी को भी अच्छी शिक्षा दिलाएंगे। भले इसके लिए कितनी ही मेहनत क्यों नहीं करनी पड़े। इतना कहते हुए फफक कर रो पड़ी। थोड़ी देर में किसी तरह अपने आप को संभाला और बोली कि किसे पता था कि पढ़ाई तो दूर उनका गुजर बसर करना भी इतना कठिन हो जाएगा। पति ने साथ छोड़ा तो रिश्तेदारों ने भी मुंह मोड़ लिया।
अभी कोई झांकने तक नहीं आया
16 जून को ही ब्रह्मभोज है मगर जरूरी रस्म तक पूरा करने के रुपये नहीं रह गए। अगल-बगल के लोग भरोसा दिला रहे कि कोरोना से अनाथ हुए बच्चों की परवरिश के लिए सरकार मदद करेगी मगर अभी तक कोई झांकने तक नहीं आया। पति के बिछड़ने के सदमे ने उसे भीतर से इतना तोड़ दिया है वर्ना शायद वह यह नहीं कहती कि यदि बच्चों की फिक्र न होती तो वह भी अब तक दुनिया छोड़ चुकी होती।
आप चाहें तो कर सकते हैं इस पीड़ित परिवार की मदद
खबर में पीड़ित परिवार की पहचान नहीं उजागर की गई है। मगर कोई इस परिवार की मदद करना चाहता है तो वह 9794822057 पर संपर्क कर पूरी तस्दीक करने के बाद मदद कर सकता है। यह पीड़ित परिवार का नंबर है।
अनाथ बच्चों की मदद के लिए शुरू हुई है बाल सेवा योजना
सरकार ने कोरोना महामारी से अनाथ हुए बच्चों और उनकी देखरेख करने वालों की मदद के लिए बाल सेवा योजना शुरू की है। इसके तहत ऐसे सभी बच्चों को चिह्नित किया जा रहा है। बच्चों की देखभाल करने के लिए चार हजार रुपये की हर माह वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसी तरह जिनकी कोई भी देखभाल करने वाला नहीं है, सरकार उनके रहने-खाने और पढ़ाई आदि सभी की व्यवस्था करेगी। डीएम ऐसे बच्चों के अभिभावक होंगे। जिले में फिलहाल अभी सर्वे कर ऐसे बच्चों को चिह्नित करने का काम चल रहा है। प्रशासन का कहना है कि जल्द ही इन बच्चों को मदद मिलनी शुरू हो जाएगी।