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कोरोना महामारी: सीने में दफन गम दे रहा मानसिक दर्द, चिकित्सक दे रहे खुलकर रोने की सलाह

Sat, 29 May 2021 09:11 AM IST
vivek shukla नीरज मिश्र, गोरखपुर।
नीरज मिश्र, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 29 May 2021 09:11 AM IST
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Doctors say people mentally disturbed due to fear in second wave of corona
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : istock
कोरोना महामारी ने कईयों को ऐसा गम दिया है कि उनकी रातों की नींद और दिन का चैन गायब हो गया है। ऐसे लोग मानसिक तनाव में उल्टे-सीधे फैसले ले रहे हैं। सीने में गम दबाने और खुलकर नहीं रोने से कईयों को शारीरिक और मानसिक दर्द मिल रहा है। ऐसे मामले पोस्ट कोविड ओपीडी में प्रतिदिन आ रहे हैं। चिकित्सक इन्हें खुलकर रोने की सलाह दे रहे हैं। चिकित्सक बताते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर में लोग भय और आशंकाओं से घिर गए। रात में उठकर बैठ जाना, मन में नकारात्मक बातें आना, सीने में दर्द का एहसास होना, हर वक्त अनहोनी की आशंका सताना कई लोगों में आम बात हो गई। मनोचिकित्सकों का कहना है कि तेजी से बढ़ते यह मामले कोरोना महामारी के कारण पैदा हुए हैं। ऐसे लोगों की काउंसिलिंग कर उन्हें सलाह दी जा रही है कि वह जी भर के रो लें। दोस्तों से खुलकर बातें करें, जिनके करीब हो उनके पास जाएं और उन्हें अपनी बातें बताएं। अगर ऐसा नहीं करते हैं तो यह मानसिक तनाव उनकी पूरी जिदंगी तबाह कर सकता है।
Doctors say people mentally disturbed due to fear in second wave of corona
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : पिक्साबे
केस- एक
शहर के पादरी बाजार के रहने वाले एक युवक के बड़े भाई का अप्रैल माह में कोरोना से निधन हो गया। इसके बाद परिवार के सदस्य भी संक्रमित हो गए। भाई को खोने का गम ऐसा रहा कि युवक अवसाद ग्रस्त हो गया। छोटे भाई ने जिला अस्पताल में दिखाया। डॉक्टरों ने परिजनों से कहा कि यदि वह रोता है, तो रोने दें। अब वह तनाव से उबर रहा है।
Doctors say people mentally disturbed due to fear in second wave of corona
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।
केस- दो
जिला अस्पताल के निकट रहने वाला एक युवक परिवार सहित कोरोना संक्रमित हो गया। सभी ठीक हो गए, लेकिन कोरोना से हो रही मौतों ने दिगाम पर ऐसा असर डाला कि वह नकारात्मक बातें सोचने लगा। सरकारी नौकरी छोड़ने की बात कहते हुए खुद को परिवार से दूर जाने का फैसला कर लिया। पत्नी ने पोस्ट कोविड ओपीडी में दिखाया तो एंटी एंग्जाइटी इलाज शुरू किया गया। अब ठीक है।
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Doctors say people mentally disturbed due to fear in second wave of corona
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
केस- तीन
कोविड पॉजिटिव पिता को खोने के बाद एक युवक इतना बेचैन हो गया कि उसकी नींद गायब हो गई। उसे डर था कि कहीं वह अपनी मां और अपनी पत्नी को न खो दे। इसी डर का नतीजा था कि वह पिता को खाने के बाद रोया ही नहीं। घरवालों को लगा कि मामला कुछ दिन बाद ठीक हो जाएगा। लेकिन यह सिलसिला चलता रहा। परिजन उसे मनोचिकित्सक के पास ले गए। काउंसिलिंग के दौरान वह खूब रोया। अभी डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है।
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Doctors say people mentally disturbed due to fear in second wave of corona
डॉ अमित शाही। - फोटो : अमर उजाला।
ग्रीफ काउंसिलिंग की जरूरत
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ अमित शाही ने बताया कि प्रतिदिन इस तरह केस पोस्ट कोविड ओपीडी में सामने आ रहे हैं। जिन लोगों ने अपनों को खो दिया है वह लोग एकदम टूट गए हैं। परिवार को संभालने के चक्कर में वह मानसिक तनाव में हैं। ऐसे लोगों को ग्रीफ (दुखी होना) काउसिंलिंग की जरूरत है। इन लोगों का दुखी होना, रोना बेहद जरूरी है। कई केस में काउसिंलिंग करके लोगों को रुलाया गया है। उन्हें सलाह दी गई है कि अगर रोने का मन करें तो जी भर के रो लें। ऐसा करने से मानसिक तनाव से वह मुक्त हो जाएंगे। अगर ऐसा नहीं करते हैं, तो उनकी जिदंगी तबाह हो जाएगी। वह कभी भी ऐसा कदम उठा सकते हैं, जिसकी लोगों ने कल्पना नहीं की होगी।
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