पांच दिनों तक चलने वाले दिवाली महापर्व की शुरुआत गुरुवार को धनतेरस से हो रही है। शुक्रवार को नरक चतुर्दशी व छोटी दिवाली, शनिवार को दिवाली, रविवार को गोवर्धन व अन्नकूट पूजा और सोमवार को भाई दूज पर्व के साथ पांच दिवसीय दीपोत्सव का समापन होगा।
Diwali 2020 Puja: धनतेरस से शुरू होगा पांच दिवसीय दिवाली महापर्व, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त
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ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि दिवाली पर्व कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी से कार्तिक शुक्ल द्वितीया तक मनाया जाता है। इस दिन सायंकाल घर के बाहर मुख्य द्वार पर एक पात्र में अन्न रखें और यमराज के निमित्त दक्षिणाभिमुख होकर दीप दान करें। इस दीप का गंध अक्षत इत्यादि से पूजन करें। धनतेरस पर्व के दिन देवताओं के वैद्य धन्वंतरि की जयंती भी मनाई जाती है।
पंडित डॉ. जोखन पांडेय ने बताया कि सनातन धर्म में पंचोत्सव के सभी दिनों को शुभ माना गया है। हर दिन अलग-अलग विधान और महत्व है। धनतेरस पर नए उपहार, सोने-चांदी के सिक्के, बर्तन व गहनों की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। इस दिन शुभ मुहूर्त में पूजन करने के साथ सात धान्यों की पूजा की जाती है।
ऐसे करें धनतेरस का पूजन
ज्योतिषाचार्य पंडित प्रियरंजन त्रिपाठी के अनुसार, सबसे पहले 13 दीपक जलाकर कुबेर का पूजन करना चाहिए। कुबेर को पुष्प चढ़ाएं और ध्यान करें और कहें कि एक श्रेष्ठ विमान पर विराजमान रहने वाले, गरुड़मणि के समान आभा वाले, दोनों हाथों में गदा व वर धारण करने वाले, सिर श्रेष्ठ मुकुट से अलंकृत शरीर वाले, भगवान शिव के प्रिय मित्र देव कुबेर का ध्यान करना चाहिए। इसके बाद धूप, दीप नवैद्य से पूजन करें और ‘यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्य अधिपतये धन-धान्य समृद्धि में देहि दापय स्वाहा मंत्र का जाप करें।
ये है मान्यता
ज्योतिषार्च राकेश पांडेय के अनुसार, इस दिन भगवान धन्वंतरि समुद्र से कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन बर्तन, चांदी के सामान की खरीदारी की जाती है। इससे घर की संपन्नता में 13 गुना वृद्धि होने की संभावना होती है। इस दिन सूखी धनिया को खरीद कर घर में रखना भी परिवार की धन संपदा में वृद्धि करता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, यमराज का कहना है कि धनतेरस के दिन मेरे निमित्त दीपदान करने से मनुष्य को कभी अकाल मृत्यु का सामना नहीं करना पड़ेगा। जिस घर में यह पूजन किया जाएगा उस घर पर कोई सदस्य अकाल मृत्यु का शिकार नहीं होगा।