डीजल की कीमतें बढ़ने से माल भाड़े में बढ़ोतरी हो गई है। इसकी वजह से तकरीबन हर वस्तु महंगी हो गई है। खाने-पीने की चीजों से लेकर घर बनाने की निर्माण सामग्रियों की कीमतों में भी 15-20 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है। इसके अलावा लोगों का आवागमन भी महंगा हो गया है। वहीं, ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस की घोषणा के अनुसार एक मार्च के बाद माल-भाड़े में और बढ़ोतरी होनी है। ऐसे में तकरीबन सभी चीजों की कीमतें बढ़ेंगी और महंगाई आसमान छूने लगेगी।
एक्सक्लूसिव: मार्च के बाद आसमान छूने लगेगी महंगाई, जानिए किस वजह से बढ़ रही हैं इन सामानों कीमतें
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चार महीने में डीजल 10 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है। नवंबर में डीजल 71.82 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था। फरवरी में फिलहाल डीजल की कीमत 81.44 रुपये हो गई है। डीजल के दाम बढ़ने से भवन निर्माण सामग्रियों (गिट्टी, मोरंग, ईंट, सरिया) की कीमतें 25 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। वहीं, सबसे ज्यादा मार किचन पर पड़ी है। सब्जी, राशन से लेकर खाद्य तेलों तक की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हुई है। नई फसल की आवक के बावजूद दालों की कीमतों में भी कमी नहीं आई, क्योंकि उसमें माल भाड़ा जोड़ दिया जा रहा है।
आलू और प्याज के दामों में इजाफा होने का एक कारण डीजल का बढ़ा हुआ दाम भी है। जानकार बताते हैं कि कुछ चीजों की ढुलाई के लिए भाड़े में वृद्धि हुई है, जबकि कुछ मामलों में कंपनियों ने अपने फ्राइट ऑन रोड (एफओआर) में बढ़ोतरी कर दी है। इसका मतलब है कि उत्पाद बनाने वाली कंपनी से माल पहुंचाने में जो खर्च आ रहा है उसे भी वस्तु की कीमत में जोड़ दिया जा रहा है। इस तरह माल भाड़ा भले ही घोषित तौर पर नहीं बढ़ा है, लेकिन वसूला जा रहा है। इसकी कीमत उपभोक्ताओं को ही चुकानी पड़ रही है।
एफओआर में पांच से सात हजार रुपये का इजाफा
चेंबर ऑफ ट्रेडर्स के पूर्व अध्यक्ष मनीष चांदवासिया ने बताया कि घी, तेल, दाल और चावल का कारोबार करने वाली कंपनियां एफओआर सिस्टम पर काम करती हैं। इसके तहत कंपनी से थोक विक्रेता की दुकान या गोदाम तक पहुंचाने में ट्रांसपोर्ट पर जो खर्च आता है उसे भी वस्तु के मूल्य में जोड़ दिया जाता है। इस वजह से उत्पाद की कीमतें बढ़ जाती हैं। तीन माह पहले आगरा से दस टन वाली गाड़ी जितने किराये में गोरखपुर आ जाती थी, अब उसमें पांच से सात हजार रुपये (एफओआर) का इजाफा हो गया है।
नई फसल आने के बावजूद दाल के दाम नहीं घटे
सरसों का तेल दिसंबर में 128 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा था। अब होलसेल में रेट 152 रुपये प्रति लीटर है। इसी तरह दाल की कीमतों में नई फसल की आवक के बावजूद कमी नहीं आई है। सभी कंपनियों ने एफओआर में पांच से सात हजार रुपये का इजाफा कर दिया है। यह बढ़ोतरी डीजल की बढ़ी कीमतों की वजह से है।