फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कोरोना संक्रमण से मुक्ति के बाद भी हो रही है मौत, जानिए क्या है वजह

Wed, 18 Nov 2020 08:22 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 18 Nov 2020 08:22 AM IST
विज्ञापन
Death of corona-infected patients due to residual damage in Gorakhpur
कोरोना वायरस। - फोटो : PTI

कोरोना से मुक्ति के बाद भी लोगों की जान जा रही है। रेजीडुअल डैमेज होने की वजह से कोरोना से जंग जीत चुके छह लोगों की मौत अब तक हो चुकी है। ऐसे में डॉक्टर सलाह दे रहे हैं कि संक्रमण से मुक्त होने के बाद लापरवाही बिल्कुल न बरतें। अगर ऐसा कर रहे हैं तो खतरे को दावत दे रहे हैं। इतना ही नहीं संक्रमण से मुक्त होने के बाद 30 से 40 ऐसे लोग हैं, जो दोबारा संक्रमित भी हो चुके हैं।



 

Death of corona-infected patients due to residual damage in Gorakhpur
कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI

जानकारी के मुताबिक जिले का पहला संक्रमित बुजुर्ग अप्रैल के अंतिम माह में संक्रमित होने के बाद एक महीने तक बीआरडी में भर्ती रहा। बीआरडी डॉक्टरों ने उसे ठीक करके घर भेज दिया। लेकिन निगेटिव होने के एक महीने बाद उसकी मौत हार्ट अटैक से हो गई। इसी तरह शहर के झारखंडी मोहल्ले के रहने वाले 59 वर्षीय व्यक्ति जुलाई माह में संक्रमित हुए थे।

Death of corona-infected patients due to residual damage in Gorakhpur
कोरोना वायरस। - फोटो : PTI

अगस्त के दूसरे सप्ताह में वह ठीक होकर घर आ गए। अचानक उन्हें दोबारा सांस लेने में तकलीफ हुई तो परिजन तत्काल जिला अस्पताल लेकर गए। डॉक्टरों ने देखते हुए मृत घोषित कर दिया। इसके अलावा चार ऐसे लोग हैं, जिनकी मौत निगेटिव होने के बाद हुई है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Death of corona-infected patients due to residual damage in Gorakhpur
कोरोना वायरस। - फोटो : PTi

रेजीडुअल कर रहा डैमेज
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट विभागध्यक्ष डॉ अश्वनी मिश्रा ने बताया कि कोरोना संक्रमण से मुक्त होने के बाद लोग लापरवाह हो जा रहे हैं। जबकि यह वायरस आंतरिक अंगों को ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है। इनमें दिल, फेफड़ा, लिवर व किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंग है। फेफड़ों पर इसका असर काफी लंबे समय तक रहता है।  इसे रेजीडुअल डैमेज कहते हैं। यह काफी जानलेवा होता है।

 

विज्ञापन
Death of corona-infected patients due to residual damage in Gorakhpur
कोरोना वायरस। - फोटो : PTI
छह महीने तक बरतें विशेष सावधानी
जिला अस्पताल के फिजिशियन व कोरोना योद्धा डॉ राजेश कुमार ने बताया कि निगेटिव होने के बाद भी लोग कम से कम छह महीने तक विशेष सतर्कता बरते। अगर निगेटिव होने के बाद लापरवाही कर रहे हैं, तो ज्यादा खतरनाक है। हर महीने फेफड़े और डी-डाईमर और क्लाटिंग प्रोफाइल की जांच जरूरी है। एंटीक्लाटिंग दवाएं डॉक्टरों के सलाह पर ही लें। तबीयत खराब होती है तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed