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Triple suicide: बाप संग बेटियों की आत्महत्या, लिखा- मैं जान दे सकती हूं, पिता का सिर नहीं झुकने दे सकती...

Thu, 17 Nov 2022 11:52 AM IST
vivek shukla नीरज मिश्रा, गोरखपुर।
नीरज मिश्रा, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 17 Nov 2022 11:52 AM IST
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Daughters died with father Triple suicide news gorakhpur
गोरखपुर समाचार। - फोटो : अमर उजाला।

पिता जीतेंद्र श्रीवास्तव और बहन मानवी के साथ खुदकुशी करने वाली नौवीं की छात्रा मान्या ने अपनी डायरी में जो भावनाएं दर्ज की हैं वह झकझोर देने वाली हैं। पढ़कर ऐसा लगता है कि उसे किसी अपने ने गहरी भावनात्मक चोट पहुंचाई थी। यही वजह है कि उसने लिखा है कि वह जान दे सकती है, लेकिन पिता का सिर नहीं झुकने दे सकती... अब मैं आराम करना चाहती हूं, कृपया मुझे माफ कर दें... लिखकर उसने अपने आत्मघाती कदम उठाने का भी संकेत दिया था। काश कोई उसकी इस डायरी को पढ़ा होता...



 

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मान्या ने बाल दिवस पर स्कूल के कार्यक्रम में लिया था हिस्सा। - फोटो : अमर उजाला।

मान्या ने अंग्रेजी में अपनी डायरी में लिखा है कि मैं कभी यह कल्पना नहीं कर सकती थी कि जिसको मैंने अपना इतना घनिष्ठ दोस्त माना, वह मेरे बारे में इतनी घटिया सोच रखती है। शायद मैं मूर्ख थी, जो किसी के भी दुख में दुखी हो जाती थी, तो किसी की भी खुशियों में खुलकर हंसती थी और सबका उत्साहवर्धन करती थी। परंतु मैं गलत थी।

मान्या ने आगे लिखा है कि यह जरूर है कि हमारी मां नहीं है, परंतु हम भी एक अच्छे और सम्मानित परिवार से आते हैं। हमें मरना पसंद है, पर अपने परिवार के सम्मान और प्रतिष्ठा को ताक पर रखना कतई बर्दाश्त नहीं है। अब मैंने प्रण किया है कि चाहे कोई कितना भी करीबी क्यों न हो, अपने दिल की भावनाएं किसी भी परिस्थिति में किसी से भी साझा नहीं करूंगी।

 

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घर के बाहर जुटी भीड़। - फोटो : अमर उजाला।

मान्या के दर्द को इन शब्दों से भी समझा जा सकता है। उसने लिखा है कि आखिर क्यों मुझे इन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है? क्यों इतनी मानसिक यातना? शायद इसका जवाब मेरे पास नहीं है। मैंने अपने स्तर पर इन सवालों के जवाब ढूंढने की काफी कोशिश की, लेकिन विफल रही। मेरा हृदय अब एक पत्थर की तरह हो गया है। मेरी आंखें पीड़ा से भर जातीं हैं, जब मैं किसी नई समस्या में पड़ती हूं।

मान्या ने लिखा है कि इन सबके बावजूद मैंने खुद को संभाल कर रखा है, परंतु मैं नहीं जानती कि कब तक मैं इसमें सफल रहूंगी। यह जीवन परेशानियों और दुखों से भरा पड़ा है। यहां कोई किसी का साथ नहीं देता, कोई किसी को समझने का प्रयास नहीं करता। ये अनुभूतियां मुझे अंदर से झकझोर देती हैं। अगर इस पूरे संसार में मेरा कोई अपना है, तो वे हैं मेरे पिता और मेरी बहन, पर कभी-कभी वे भी मुझे नहीं समझते। मैं हमेशा से एक शांत स्वाभाव कि लड़की रही हूं और खुद को खुश रखने का प्रयास भी बहुत किए हैं। पर अब मैं पूरी तरह से टूट चुकी हूं। अपना संबल खो चुकी हूं। मुझमें अब हिम्मत नहीं बची है। अब मैं आराम करना चाहती हूं। कृपया मुझे माफ कर दें...
 

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गोरखपुर समाचार। - फोटो : अमर उजाला।

मकान में ताला बंद कर शाहपुर पुलिस ने रखी है चाबी
शाहपुर इलाके के घोसीपुरवा में पिता और दो बेटियों की आत्महत्या से पूरा शहर स्तब्ध है। बुधवार को हर किसी की जुबां पर घटना की चर्चा रही। मान्या के दादा ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि मंगलवार को ही शाहपुर पुलिस छानबीन के लिए मकान में ताला बंद कर चाबी अपने पास रखी ली। बीपी की दवा देने के लिए ताला पुलिस ने खोला था। इसके बाद से ताला बंद है। जीतेंद्र, मान्या और मानवी की आत्मा की शांति के लिए बुधवार की दोपहर ओम प्रकाश ने घर के बाहर दरवाजे की सीढ़ी पर ही गायत्री परिवार की ओर से हवन-पूजन किया। यह कहते-कहते ओमप्रकाश भावुक हो गए। बोले, गार्ड की नौकरी से जब वेतन मिलता था, तो दोनों बच्चियों को प्रत्येक माह 50-50 रुपये देता था, जो आर्थिक तंगी के चलते इधर तीन माह से नहीं दे पाया था।

 

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दो बेटियों संग पिता ने आत्महत्या कर लिया। - फोटो : अमर उजाला।

पिता और दोनों पुत्रों ने पिछले माह कराई थी जमानत
वर्ष 2006 में कॉलोनी की ही एक महिला से ओमप्रकाश और दोनों बेटों जीतेंद्र और नितेश के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। तीनों का वारंट 21 अक्तूबर को आया था। मामले में शाहपुर पुलिस ने तीनों को हिरासत में लिया था। बाद में तीनों ने जमानत कराई थी।

छह माह से बिजली का बिल भी बकाया
ओमप्रकाश श्रीवास्तव की आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से जीतेंद्र काफी परेशान रहते थे। बेटी की फीस के साथ छह माह का बिजली का बिल भी बकाया था। करीब सात हजार रुपये बिजली का बिल हो चुका था। कई बार जमा करने की कोशिश हुई, लेकिन रुपये इकट्ठा नहीं हो पा रहे थे।

 

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