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तस्वीरें: जान जोखिम में डालकर रोडवेज में सफर कर रहे यात्री, लोगों ने कहा- 'सुरक्षा के इंतजाम नहीं'
Thu, 17 Dec 2020 10:26 AM IST
vivek shukla
अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 17 Dec 2020 10:26 AM IST
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गोरखपुर बस स्टेशन।
- फोटो : अमर उजाला।
परिवहन निगम के गोरखपुर डिपो का रेलवे बस स्टेशन बदहाल है। मूलभूत यात्री सुविधाओं की कमी तो है ही, कोरोना गाइडलाइन की भी पूरी तरह अनदेखी की जा रही है। 'अमर उजाला' संवाददाता की पड़ताल में सामने आया कि बस स्टेशन पर न शुद्ध पेयजल की व्यवस्था है न ही शौचालय। सुरक्षा के भी कोई इंतजाम दिखाई नहीं देते हैं।
गोरखपुर बस स्टेशन।
- फोटो : अमर उजाला।
कोविड गाइडलाइन के प्रति बेपरवाह
कोविड-19 गाइडलाइन के मुताबिक यात्रियों को मास्क के बिना बस में प्रवेश की अनुमति नहीं है, लेकिन बस अड्डे से लेकर बसों तक में इसका पालन नहीं हो रहा है। न यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग हो रही है, न ही हाथों को सैनिटाइज कराया जा रहा है। जून में रेलवे बस स्टेशन पर कोविड हेल्प डेस्क बनाई गई थी जो अब गायब है।
कोविड-19 गाइडलाइन के मुताबिक यात्रियों को मास्क के बिना बस में प्रवेश की अनुमति नहीं है, लेकिन बस अड्डे से लेकर बसों तक में इसका पालन नहीं हो रहा है। न यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग हो रही है, न ही हाथों को सैनिटाइज कराया जा रहा है। जून में रेलवे बस स्टेशन पर कोविड हेल्प डेस्क बनाई गई थी जो अब गायब है।
गोरखपुर बस स्टेशन।
- फोटो : अमर उजाला।
सुरक्षा के इंतजाम नहीं
न मेटल डिटेक्टर है और न ही स्कैनर। कोई क्या सामान ले जा रहा है, इसकी पूछताछ करने वाला कोई नहीं है। जब जिम्मेदारों से इस बारे में बात की गई तो उनका कहना था कि ज्यादातर बसें रेलवे स्टेशन से यूनिवर्सिटी चौराहे के बीच खड़ी होती हैं। यात्री सड़क पर ही बसों में चढ़ जाते हैं। ऐसे में उन सभी के सामानों की जांच संभव नहीं है।
न मेटल डिटेक्टर है और न ही स्कैनर। कोई क्या सामान ले जा रहा है, इसकी पूछताछ करने वाला कोई नहीं है। जब जिम्मेदारों से इस बारे में बात की गई तो उनका कहना था कि ज्यादातर बसें रेलवे स्टेशन से यूनिवर्सिटी चौराहे के बीच खड़ी होती हैं। यात्री सड़क पर ही बसों में चढ़ जाते हैं। ऐसे में उन सभी के सामानों की जांच संभव नहीं है।
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गोरखपुर बस स्टेशन।
- फोटो : अमर उजाला।
सालों पहले लगा आरओ प्लांट कबाड़ में तब्दील
रेलवे बस स्टेशन का भवन जर्जर हो चुका है। सालों पहले पीपीपी मॉडल के तहत इसके निर्माण के लिए प्रोजेक्ट बनाकर मुख्यालय भेजा गया है, लेकिन अबतक इस मामले में कोई प्रगति नहीं हुई। मूलभूत सुविधाएं नदारद हैं। शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है। सालों पहले आरओ प्लांट लगाया लगाया गया था, लेकिन बगैर सेवा दिए ही वह कबाड़ में तब्दील हो चुका है। शौचालय में हमेशा ताला लगा रहता है। बस स्टेशन परिसर में एक सार्वजनिक शौचालय है, जिसके इस्तेमाल के लिए लोगों को पैसे खर्च करने पड़ते हैं।
रेलवे बस स्टेशन का भवन जर्जर हो चुका है। सालों पहले पीपीपी मॉडल के तहत इसके निर्माण के लिए प्रोजेक्ट बनाकर मुख्यालय भेजा गया है, लेकिन अबतक इस मामले में कोई प्रगति नहीं हुई। मूलभूत सुविधाएं नदारद हैं। शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है। सालों पहले आरओ प्लांट लगाया लगाया गया था, लेकिन बगैर सेवा दिए ही वह कबाड़ में तब्दील हो चुका है। शौचालय में हमेशा ताला लगा रहता है। बस स्टेशन परिसर में एक सार्वजनिक शौचालय है, जिसके इस्तेमाल के लिए लोगों को पैसे खर्च करने पड़ते हैं।
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गोरखपुर बस स्टेशन।
- फोटो : अमर उजाला।
बढ़ गई है रोडवेज की आय
कोरोना संकट के बीच अधिकतर ट्रेनें बंद हैं। ऐसे में इन दिनों रोडवेज की बसों में काफी भीड़ हो रही है। खासतौर पर दिल्ली जाने वाली बसों में तो पैर रखने तक की जगह नहीं मिल रही। यात्रियों की बढ़ती संख्या से रोडवेज को मुनाफा हो रहा है। त्योहारी एवं लगन के सीजन में प्रतिदिन रोडवेज को लगभग एक करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति हुई।
कोरोना संकट के बीच अधिकतर ट्रेनें बंद हैं। ऐसे में इन दिनों रोडवेज की बसों में काफी भीड़ हो रही है। खासतौर पर दिल्ली जाने वाली बसों में तो पैर रखने तक की जगह नहीं मिल रही। यात्रियों की बढ़ती संख्या से रोडवेज को मुनाफा हो रहा है। त्योहारी एवं लगन के सीजन में प्रतिदिन रोडवेज को लगभग एक करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति हुई।