नवजात को मिला न्याय: दबंग आरोपी को नहीं था पुलिस से डर, अब पता चला 'कानून के हाथ लंबे हैं'
डीआईजी की यह सख्ती ही थी कि मुख्यमंत्री के दौरे का हवाला देने वाली पीपीगंज और कैंपियरगंज पुलिस उसी दिन सक्रिय हो गई। फिर एसएसपी डॉ. सुनील कुमार गुप्ता ने पुलिस से रोजाना फीडबैक लेना शुरू कर दिया। अफसरों के हस्तक्षेप का नतीजा शनिवार को सामने आ गया। मामले का पर्दाफाश कर पुलिस ने आरोपियों को दबोच लिया। हालांकि मुख्य आरोपित अभी फरार है मगर उसका नाम सामने आने की वजह से उसे बचा पाना अब संभव नहीं है। उधर, सत्ताधारी नेताओं के दबाव में काम कर रही पुलिस पर्दाफाश करने के बाद खुद पर गर्व कर रही है। थानेदार को भी अब लगने लगा है कि वास्तव में इस इंसाफ से उन्हें खुद में आत्म संतोष मिला है।
एसएसपी डॉ. सुनील कुमार गुप्ता ने कहा कि पुलिस से लगातार संपर्क कर कार्रवाई का निर्देश दिया गया। पुलिस को बताया गया कि कानून के दायरे में काम करें। किसी के दबाव में आने की जरूरत नहीं है। इसके बाद नतीजा सबके सामने है। आगे भी पुलिस निष्पक्ष रूप से काम करेगी, जो भी दोषी होगा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इसमें हो सकती है यह सजा
धारा 302 (हत्या): सजा साबित होने पर आजीवन कारावास या फांसी में से एक, जुर्माना या फिर दोनों।
धारा 376 (दुष्कर्म) : दुष्कर्म के पॉक्सो की धारा लगने पर उम्र के हिसाब से सजा होती है अधिकतम फांसी या फिर दस साल की कैद।
धारा 120 (आपराधिक साजिश) : यह सजा जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज है उसकी सजा के हिसाब से होती है।
धारा 201 (साक्ष्य छिपाने) : आरोपित को सात साल की कैद हो सकती है
धारा 506 (जान से मारने की धमकी): दो साल की सजा या आर्थिक दंड अथवा दोनों
धारा 318 (पैदाइश छिपाना): दो साल की कैद, जुर्माना या दोनों
अब क्या करना है पुलिस को ..
अभियुक्त विभाष्म सिंह की गिरफ्तारी। मृत नवजात की मां के उम्र के निर्धारण और प्रसव होना तय करने के लिए चिकित्सकीय परीक्षण। सीआरपीसी की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष उसका कलमबंद बयान करना। मृत नवजात के डीएनए प्रोफाइल से नाबालिग मां के डीएनए फिंगर प्रिंट का मैच करवाना। विभाष्म की गिरफ्तारी के बाद उसके डीएनए फिंगर प्रिंट से मृत नवजात के डीएनए फिंगर प्रिंट का मिलान करवा कर वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर यह साबित करना कि बच्ची आरोपियों की ही थी।