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नवजात को मिला न्याय: दबंग आरोपी को नहीं था पुलिस से डर, अब पता चला 'कानून के हाथ लंबे हैं'

Mon, 24 Feb 2020 05:45 PM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 24 Feb 2020 05:45 PM IST
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rape and baby Murder Accused Vibhasm singh threat to police in Peppeganj
बाएं आरोपी विभाष्म सिंह, दाएं मामले की जांच करती पुलिस। - फोटो : अमर उजाला।
शायद ही किसी नवजात को मौत के बाद ऐसा इंसाफ मिला होगा। नवजात जिंदा या मृत लावारिस पाए जाने के मामले में पुलिस केस तक नहीं दर्ज करती थी, गोरखपुर में यह पहला मामला जब, अफसरों ने संवेदना दिखाई तो मुकदमा भी दर्ज हुआ और आरोपी जेल भी गए। पीपीगंज में नवजात की हत्या का जिस तरह से पुलिस ने पर्दाफाश किया, उसने गोरखपुर के कानूनी इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया। वास्तव में साबित हुआ कि कानून के हाथ लंबे होते हैं। कोई चाहे कितना भी दबाव बना ले, मगर पुलिस अगर काम करना चाहे तो उसे कोई रोक नहीं सकता है। हालांकि मुख्य आरोपी विभाष्म सिंह अभी भी फरार है।
rape and baby Murder Accused Vibhasm singh threat to police in Peppeganj
पुलिस आरोपी विभाष्म सिंह की तलाश शुरू कर दी है। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
31 जनवरी को नवजात का शव मिलने के बाद पुलिस ने पहले तो इसे दबाने की कोशिश की। साफ तौर पर कहा जा सकता है कि एक अफसर खुद इस मामले को रफा दफा करना चाहते थे, लेकिन पोस्टमार्टम में हत्या की पुष्टि होने के बाद अमर उजाला ने इसे प्रमुखता उठाया। मुहिम बनी तो डीआईजी राजेश डी मोदक, एसएसपी डॉ. सुनील गुप्ता भी इंसाफ के पक्ष में खड़े नजर आए। खबर दर खबर छपने के बाद भी कान में तेल डाले बैठी कैंपियरगंज पुलिस को जगाने के लिए डीआईजी ने एडिशनल एसपी और एसपी को कार्रवाई का निर्देश दिया। साथ ही संदेश दिया कि यदि पर्दाफाश नहीं हुआ तो अफसरों के खिलाफ कार्रवाई तय है।
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आरोपी विभाष्म सिंह फिलहाल फरार है। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।

डीआईजी की यह सख्ती ही थी कि मुख्यमंत्री के दौरे का हवाला देने वाली पीपीगंज और कैंपियरगंज पुलिस उसी दिन सक्रिय हो गई। फिर एसएसपी डॉ. सुनील कुमार गुप्ता ने पुलिस से रोजाना फीडबैक लेना शुरू कर दिया। अफसरों के हस्तक्षेप का नतीजा शनिवार को सामने आ गया। मामले का पर्दाफाश कर पुलिस ने आरोपियों को दबोच लिया। हालांकि मुख्य आरोपित अभी फरार है मगर उसका नाम सामने आने की वजह से उसे बचा पाना अब संभव नहीं है। उधर, सत्ताधारी नेताओं के दबाव में काम कर रही पुलिस पर्दाफाश करने के बाद खुद पर गर्व कर रही है। थानेदार को भी अब लगने लगा है कि वास्तव में इस इंसाफ से उन्हें खुद में आत्म संतोष मिला है।

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आरोपी विभाष्म सिंह को नहीं था कानून से डर। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।

एसएसपी डॉ. सुनील कुमार गुप्ता ने कहा कि पुलिस से लगातार संपर्क कर कार्रवाई का निर्देश दिया गया। पुलिस को बताया गया कि कानून के दायरे में काम करें। किसी के दबाव में आने की जरूरत नहीं है। इसके बाद नतीजा सबके सामने है। आगे भी पुलिस निष्पक्ष रूप से काम करेगी, जो भी दोषी होगा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इसमें हो सकती है यह सजा
धारा 302 (हत्या): सजा साबित होने पर आजीवन कारावास या फांसी में से एक, जुर्माना या फिर दोनों।
धारा 376 (दुष्कर्म) : दुष्कर्म के पॉक्सो की धारा लगने पर उम्र के हिसाब से सजा होती है अधिकतम फांसी या फिर दस साल की कैद।
धारा 120 (आपराधिक साजिश) : यह सजा जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज है उसकी सजा के हिसाब से होती है।
धारा 201 (साक्ष्य छिपाने) : आरोपित को सात साल की कैद हो सकती है
धारा 506 (जान से मारने की धमकी): दो साल की सजा या आर्थिक दंड अथवा दोनों
धारा 318 (पैदाइश छिपाना): दो साल की कैद, जुर्माना या दोनों

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इस मामले में पुलिस ने दिखा दिया कि कानून के हाथ बहुत लंबे हैं। - फोटो : अमर उजाला।

अब क्या करना है पुलिस को ..
अभियुक्त विभाष्म सिंह की गिरफ्तारी। मृत नवजात की मां के उम्र के निर्धारण और प्रसव होना तय करने के लिए चिकित्सकीय परीक्षण। सीआरपीसी की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष उसका कलमबंद बयान करना। मृत नवजात के डीएनए प्रोफाइल से नाबालिग मां के डीएनए फिंगर प्रिंट का मैच करवाना। विभाष्म की गिरफ्तारी के बाद उसके डीएनए फिंगर प्रिंट से मृत नवजात के डीएनए फिंगर प्रिंट का मिलान करवा कर वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर यह साबित करना कि बच्ची आरोपियों की ही थी।

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