निर्भया के दरिंदों के बचने के सभी विकल्प बुधवार को समाप्त हो गए। आज कोर्ट इनके फांसी की अगली तारीख 20 मार्च को घोषित कर दी है। निर्भया के चारों दोषियों पवन गुप्ता, अक्षय ठाकुर, विनय शर्मा और मुकेश सिंह की फांसी तय है। ऐसे में एक दोषी पवन गुप्ता उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के जगन्नाथपुर का रहने वाला है। उस गांव के लोग पहली बार निर्भया मामले पर खुलकर बोल रहे हैं। उनका कहना है कि निर्भया कांड गांव के माथे पर एक ऐसा कलंक है, जिसे कभी धोया नहीं जा सकता है।
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निर्भया केस।
- फोटो : अमर उजाला
निर्भया का दोषी पवन गुप्ता के गांववाले कोर्ट के फैसले से थोड़े मायूस हैं। जगन्नाथपुर गांव के प्रधान पति संजय कुमार कहते हैं कि जो हुआ वो नहीं होना चाहिए था लेकिन हमारे लिए तो पवन पहले ही मर गया था। पवन का अपराध माफी योग्य नहीं है उसने जो किया है वो शर्मनाक है। निर्भया कांड की जब भी बात होती है तो पूरे गांव का सिर शर्म से झुक जाता है।
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निर्भया केस।
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पवन के पड़ोस के घरों में सन्नाटा पसरा हुआ है। उसके पड़ोसी जनार्दन गोस्वामी ने कहा कि यह घटना क्षेत्र के लिए बड़ी दुखद है। फांसी की सूचना से पूरा गांव सहमा हुआ है। निर्भया के साथ अन्याय हुआ है और उसकी सजा मौत से कम नहीं हो सकती है। इस कांड के बाद गांव का कोई भी सदस्य अपना सिर ऊपर नहीं कर पाया है। वहीं सुखई ने कहा पवन अपने गलतियों से सबक ले चुका है उसे फांसी की सजा नहीं होनी चाहिए थी लेकिन कानून के सामने किसी की दलील काम नहीं आती है।
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निर्भया केस: निर्भया का दोषी पवन गुप्ता का महादेवा में बना घर।
- फोटो : अमर उजाला।
गौरतलब है कि पवन गुप्ता के चाचा कुछ दिन अपने गांव जगन्नाथपुर आए हुए थे। इस दौरान उन्होंने कहा था कि उन्हें पवन की पैदाइश का साल तो ठीक से याद नहीं है, मगर जिस समय घटना हुई, उस समय वह बालिग नहीं था। पवन का जन्म दिल्ली में ही हुआ था और वह कभी भी गांव नहीं आया। दो भाई व दो बहन में सबसे बड़ा पवन दुकानदारी के अलावा ग्रेजुएशन की पढ़ाई भी कर रहा था। पिता ने यहां लालगंज थाने के महादेवा चौराहे के पास गांव में भी जमीन ली थी और उस पर मकान बनवाना शुरू किया था, मगर 16 दिसंबर 2012 में हुए निर्भया कांड के बाद से काम ठप हो गया। मौजूदा समय में वह खंडहर जैसा दिखता है।
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निर्भया केस: इसी बस में निर्भया के साथ हुई थी हैवानियत। (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला।
पवन के पिता, दादी और बहन आदि परिवार के सदस्य आरकेपुरम इलाके में उसके साथ संत रविदास कैंप में रहते थे। उसकी बहन और दादी ने 2017 में फांसी की सजा के बाद अदालत और कानून पर टिप्पणी की थी। दोनों का मानना था कि उन्हें न्याय पाने के लिए प्रयास करने का मौका नहीं दिया गया। पवन के चाचा भी दिल्ली में रहकर काम करते हैं।