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Good News: दिवाली आने से पहले ही मन गई टेराकोटा कारीगरों की दिवाली, दक्षिण भारत से मिला लाखों रुपये का आर्डर

Tue, 30 Aug 2022 02:10 PM IST
vivek shukla राजीव रंजन, गोरखपुर।
राजीव रंजन, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 30 Aug 2022 02:10 PM IST
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Craftsmen got orders worth lakhs of rupees from South India for Diwali festival
गोरखपुर टेराकोटा। - फोटो : अमर उजाला।

एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) में शुमार गोरखपुर के टेराकोटा की धमक देश के तकरीबन सभी राज्यों में हो रही है। आज की तारीख में स्थिति ऐसी है कि दीपावली की वजह से टेराकोटा शिल्प के उत्पादों की मांग इतनी ज्यादा हो गई है कि तकरीबन सभी शिल्पकारों ने एडवांस लेना बंद कर दिया है। जबकि, दीपावली में अभी तकरीबन दो महीने का समय है। वहीं, एडवांस सिर्फ इस शर्त पर ले रहे हैं कि इनकी आपूर्ति दीपावली के बाद की जाएगी।



सामान्य तौर पर गोरखपुर के औरंगाबाद गांव से बाहर निकलकर टेराकोटा शिल्प वैश्विक हो गया है। वहीं औरंगाबाद गांव से बाहर निकलकर यह शिल्प गुलरिहा, पादरी बाजार, भगतपुरवा आदि गांव तक फैल गया है। सिर्फ औरंगाबाद गांव में इसके 75 शिल्पकार हैं। वहीं, गोरखपुर में इसके 250 से ज्यादा शिल्पकार हैं। इतने ज्यादा टेराकोटा शिल्पकार होने के बावजूद इस शिल्प से बने उत्पादों की पूर्ति नहीं हो पा रही है, जबकि टेराकोटा शिल्पकारों ने अप्रैल से ही उत्पादों को बनाना शुरू कर दिया है।
 

Craftsmen got orders worth lakhs of rupees from South India for Diwali festival
गोरखपुर टेराकोटा। - फोटो : अमर उजाला।

इस बार दक्षिण भारत में बढ़ी टेराकोटा उत्पादों की मांग
प्रत्येक साल दीपावली के समय देश के विभिन्न राज्यों से कई व्यापारी औरंगाबाद, पादरी बाजार, गुलरिहा पहुंचकर टेराकोटा शिल्प का आर्डर देते हैं। पिछले साल तक मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, उत्तराखंड आदि राज्यों से इन उत्पादों की खरीदारी के लिए आते थे, लेकिन इस बार दक्षिण भारत के भी कई व्यापारी पहुंचे। हैदराबाद, अहमदाबाद, कोटा आदि के व्यापारी माल बुक कराकर चले गए हैं।

Craftsmen got orders worth lakhs of rupees from South India for Diwali festival
गोरखपुर टेराकोटा। - फोटो : अमर उजाला।

राज्यवार पसंद भी अलग-अलग
टेराकोटा के शिल्पकार 500 से ज्यादा तरह के उत्पाद तैैयार करते हैं। अलग-अलग प्रदेशों में इन उत्पादों की मांग भी अलग-अलग है। हैदराबाद के व्यापारियों ने हाथी, घोड़ा, ऊंट, जिराफ आदि के उत्पादों का आर्डर दिया है। वहीं, अहमदाबाद और कोटा के व्यापारियों ने लालटेन, झूमर, भगवान गणेश समेत सजावटी उत्पादों के लिए आर्डर दिया है।

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टेराकोटा। - फोटो : अमर उजाला।

टेराकोटा के लिए बहुत खास होती है काबिस मिट्टी
टेराकोटा के उत्पादों के लिए काबिस मिट्टी खास होती है। इस मिट्टी के बिना उत्पादों का खास लाल रंग आता है। दरअसल यह मिट्टी कुछ इलाकों के तालाबों में मिलती है जो तालाब की तलहटी से तकरीबन एक फीट मिट्टी हटाने के बाद मिलती है और इसकी मोटाई सिर्फ दो इंच होती है।

 

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गोरखपुर टेराकोटा। - फोटो : अमर उजाला।
इस बार दक्षिण भारत से टेराकोटा उत्पादों की मांग काफी बढ़ी है। हैदराबाद, अहमदाबाद, कोटा, चेन्नई आदि से काफी ज्यादा आर्डर मिला है। अब कोई नया आर्डर नहीं लिया जा रहा है। इस शर्त पर आर्डर ले रहे हैं कि उनकी आपूर्ति दीपावली के बाद की जाएगी। - राजन प्रजापति, टेराकोटा शिल्पकार।

दक्षिण भारत में जो उत्पाद भेजे जा रहे हैं उनमें काफी संख्या जानवरों की आकृतियों की है। अब तक 10 ट्रक से ज्यादा माल भेजा चुका है। दीपावली तक की बुकिंग तो जुलाई में ही खत्म कर दी गई थी। अब नया आर्डर ले पाना संभव नहीं है। - गुलाब प्रजापति, टेराकोटा शिल्पकार।
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