कोरोना से डर तो लगता है, लेकिन क्या करें? ड्यूटी तो करनी ही है। तमाम मुश्किलों को झेलते हुए जो भी श्रमिक यहां आ रहे हैं उन्हें उनके परिवार तक पहुंचाना भी तो हम सभी का कर्तव्य है। ये कहना है उन रोडवेज चालकों और परिचालकों का जो अपने घर-परिवार की चिंता को छोड़कर दूसरे प्रांतों से आ रहे श्रमिकों को उनके घर तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
यात्रा के दौरान उन्हें तमाम तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है बावजूद इसके वे जान जोखिम में डालकर जो भी जिम्मेदारी मिल रही है उसका सही तरीके से निर्वहन कर रहे हैं।
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जय पांडेय।
- फोटो : अमर उजाला।
चालक जय पांडेय ने कहा कि जो भी श्रमिक बाहर से आ रहे हैं, उनकी जांच हो रही है। लेकिन फिर भी डर तो लगा रहता है कि कहीं बस में बैठा कोई शख्स कोरोना पॉजिटिव न हो। इसी डर के बीच हम ड्यूटी करते हैं। बस लेकर पीलीभीत गया था। इस दौरान रास्ते में खाने-पीने की बहुत दिक्कत हुई।
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पवन कुमार मिश्र।
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परिचालक पवन कुमार मिश्र ने कहा कि कोरोना के नाम से ही डर लग रहा है लेकिन क्या करें, ड्यूटी है तो करनी ही पड़ेगी। हम अपने परिवार से दूर होकर बाहर से आ रहे श्रमिकों को उनके घर तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। वह जब अपने घर पहुंचते हैं तो उनकी खुशी देखकर अच्छा लगता है।
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रमाकांत पासवान।
- फोटो : अमर उजाला।
चालक रमाकांत पासवान ने कहा कि घर से दूर रहकर बिना अपने परिवार की चिंता किए हम काम कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से जहां भी जाने का निर्देश मिलता है हम वहां बस के साथ निकल पड़ते हैं। लॉकडाउन से जूझ रहे श्रमिकों को उनके घर तक पहुंचाना भी देश सेवा की तरह ही है।
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जितेंद्र सिंह।
- फोटो : अमर उजाला।
परिचालक जितेंद्र सिंह ने कहा कि लॉकडाउन के बीच फंसे श्रमिकों को हम उनके घरों तक पहुंचा रहे हैं। इससे बड़ी बात हम सभी केे लिए और क्या होगी। लेकिन देश में कोरोना को लेकर जो माहौल है, उससे डर तो लगा ही रहता है। खुद के परिवार को कोई खतरा न हो इसके लिए परिवार से दूर रह रहा हूं।