इंग्लैंड के बर्मिंघम में चल रहे 18वें कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो खिलाड़ी विजय कुमार यादव (60 किलो) ने कांस्य पदक हासिल कर गोरखपुर विश्वविद्यालय का नाम रोशन किया है। गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह और प्रो. विजय चहल समेत क्रीड़ा परिषद के पदाधिकारियों ने विजय को बधाई दी है। विजय ने भी पदक को अपने गुरुओं को समर्पित किया है।
Commonwealth Games 2022: विजय यादव के कांस्य पदक से गोरखपुर भी चमका, DDU के हैं छात्र
मूलरूप से बनारस के रहने वाले विजय यादव गोरखपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध गुरुकुल पीजी कॉलेज ददरी में एमए अंतिम वर्ष के छात्र हैं। वर्ष 2009 में विजय यादव गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षक प्रो. विजय चहल और कोच काशी के संपर्क में आए। दोनों के मार्गदर्शन में रीजनल स्पोर्ट्स स्टेडियम में जूडो की प्रैक्टिस प्रारंभ की।
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एक सामान्य दिनचर्या में जितनी प्रैक्टिस खिलाड़ी कर सकता है, विजय उससे दो से तीन घंटे अधिक समय तक प्रैक्टिस करता है। इनाम की राशि का इस्तेमाल भी वह अपनी प्रैक्टिस पर खर्च करता है। जो आर्थिक मदद सरकार से मिली, उसी से विजय ने जापान, स्पेन, क्रोएशिया, बुडापेस्ट में जाकर प्रशिक्षण लिया।
मूलरूप से बनारस के रहने वाले विजय यादव गोरखपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध गुरुकुल पीजी कॉलेज ददरी में एमए अंतिम वर्ष के छात्र हैं। वर्ष 2009 में विजय यादव गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षक प्रो. विजय चहल और कोच काशी के संपर्क में आए। दोनों के मार्गदर्शन में रीजनल स्पोर्ट्स स्टेडियम में जूडो की प्रैक्टिस प्रारंभ की।
इसके बाद विजय का चयन स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) लखनऊ में हुआ। वर्ष 2013 के बाद विजय ने जूनियर स्तर की प्रतियोगिता में चमक बिखेरनी शुरू की। आगे चलकर अर्जुन अवार्डी कोच यशपाल मलिक के संपर्क में आया। उन्होंने विजय की तकनीक और फिजिकल फिटनेस पर ध्यान दिया। धीरे-धीरे विजय राज्य स्तरीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में चमकने लगा। बड़ा बदलाव विजय के जीवन में तब आया जब उनका चयन टारगेट ओलंपिक पोडियम स्किम (टॉप्स) के तहत हुआ। आर्थिक तंगी दूर हुई।
गुरु शिष्य की बातचीत
- सर, ये पदक तो आपका है। आप लोगों के मार्गदर्शन और दुआ का असर है कि ये पदक मेरे गले में है। - विजय कुमार यादव, राष्ट्रमंडल खेल में जूडो में कांस्य पदक हासिल करने वाले खिलाड़ी
- शाबाश बेटा, पदक की चमक अब फीकी नहीं पड़नी चाहिए। अगला लक्ष्य देश के लिए ओलंपिक में पदक हासिल करना होना चाहिए। खुश रहिए।
-प्रो. विजय कुमार चहल, गोरखपुर विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग के आचार्य
विजय पदक के थे प्रबल दावेदार
कॉमनवेल्थ गेम्स में 26 वर्षीय जूडोका विजय यादव पदक के प्रबल दावेदार थे। छोटे से कॅरियर में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में चमक बिखेरने वाले विजय मूलरूप से वाराणसी के महुरिया के रहने वाले हैं। विजय के सुनहरे भविष्य में गोरखपुर विश्वविद्यालय अहम पड़ाव रहा है। विश्वविद्यालय ने कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए आर्थिक मदद तक की है।
ये हैं उपलब्धियां
- कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप में स्वर्ण
- वर्ष 2018 में हांगकांग में आयोजित एशियन ओपन में कांस्य पदक
- दक्षिण एशियाई जूडो चैंपियनशिप में स्वर्ण
- 18वें एशियाई खेल में के टीम स्पर्धा में पांचवां स्थान
- तीन बार सीनियर राष्ट्रीय जूडो स्वर्ण पदक जीता
कॉलेज परिवार ने दी बधाई
बड़हलगंज के ददरी स्थित गुरुकुल संस्थान समूह के निदेशक डॉ. बिपिन शाही ने कहा की कॉमनवेल्थ गेम्स में विजय का पदक प्राप्त करना कछारांचल और कॉलेज के लिए गौरव की बात है। विजय कुमार यादव कई बार अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय खेल प्रतियोगिताओं में गौरवान्वित होने का अवसर प्रदान किया है। विद्यालय के समस्त खेल प्रेमियों की तरफ से हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई देता हूं।