मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर बताया कि फर्ज क्या है? गोरखपुर से सोनौली के लिए बन रहे फोरलेन के लिए उन्होंने गोरखनाथ मंदिर की दीवार को ढहा कर औरों के लिए एक नया मानक तय कर दिया। साथ ही एक बड़ा संदेश भी दिया। संदेश यह कि विकास के राह में कोई भी आड़े नहीं आना चाहिए।
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सीएम योगी और उनके माता-पिता। (File)
- फोटो : अमर उजाला।
हाल के दिनों में यह दूसरी बार है जब मुख्यमंत्री ने बड़ी नजीर कायम की है। इसके पहले अपने पिता के अंतिम संस्कार में न जाकर उन्होंने बताया कि राजधर्म क्या होता है? एक बड़े परिवार का मुखिया होने का क्या मतलब होता है?
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गोरखनाथ मंदिर।
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मालूम हो कि गोरखनाथ मंदिर का शुमार उत्तर भारत के प्रमुख मंदिरों में होता है। यह करोड़ों लोगों के आस्था का केंद्र भी है। यह उस नाथपंथ का मुख्यालय है जिससे योगी जी का ताल्लुक है। वह गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर भी हैं।
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- फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर फोरलेन के रास्ते में आने वाले किसी और को अपने मकान और दुकान के ध्वस्तीकरण पर आपत्ति न हो इसके लिए मुख्यमंत्री होने के बावजूद उन्होंने अपने मंदिर की दीवार को ढहाने का आदेश दे दिया। बाकियों की दुकान और मकान के ध्वस्त होने पर बाया गोरखनाथ मंदिर, धर्मशाला, मोहद्दीपुर, कूड़ाघाट और नंदानगर होते हुए एयरपोर्ट तक का आना-जाना आसान हो जाएगा।
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मुख्यमंत्री होने के बाद और बतौर सांसद वह बार-बार यह कहते रहे हैं कि जनहित और विकास एक दूसरे के पूरक हैं। इसमें किसी तरह की बाधा स्वीकार्य नहीं। लोक कल्याण के लिए विकास हर जनप्रतिनिधि का फर्ज है। सीएम योगी इसे लगातार साबित भी कर रहे हैं।