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Gorakhpur News: काला मोतियाबिंद छीन रही आंखों की रोशनी, तेजी से बढ़ रहे मामले

Tue, 29 Nov 2022 11:46 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 29 Nov 2022 11:46 AM IST
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black cataract snatching eyesight in Gorakhpur
eye - फोटो : Social Media

काला मोतियाबिंद मरीजों की आंखों की रोशनी छीन रहा है। मोतियाबिंद को नजर अंदाज करने वाले लोग इस बीमारी के शिकार हो रहे हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में काला मोतियाबिंद से पीड़ित मरीजों की संख्या पिछले एक साल में तेजी से बढ़ी है। पहले जहां हर माह 10 फीसदी मरीज आते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 20 से 25 फीसदी हो गई है। इनमें पांच प्रतिशत मरीजों की आंखों की रोशनी चली जा रही है।  



जानकारी के मुताबिक, बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हर माह मोतियाबिंद के करीब 200 ऑपरेशन होते हैं। इनमें 25 से 30 मरीज काला मोतियाबिंद से पीड़ित मिल रहे हैं। इनके अलावा 10-12 प्रतिशत मरीजों को दवा देकर इलाज किया जाता है। डॉक्टरों की भाषा में इस बीमारी को ग्लूकोमा भी कहते हैं।

 

black cataract snatching eyesight in Gorakhpur
BRD - फोटो : अमर उजाला।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ राम कुमार जायसवाल ने बताया कि काला मोतियाबिंद बेहद खतरनाक बीमारी है। इस बीमारी में मरीजों को कोई लक्षण दिखाई नहीं देता है। यही वजह है कि इस बीमारी में मरीजों की आंखों की रोशनी चली जाती है।

 

black cataract snatching eyesight in Gorakhpur
eye - फोटो : pixa

काला मोतियाबिंद में आंखों की नसों (ऑप्टिक नर्व) पर दबाव पड़ता है, इससे उन्हें काफी नुकसान पहुंचता है। लगातार दबाव पड़ने से नर्व तक ब्लड की सप्लाई नहीं पहुंचती है, इससे नर्व नष्ट हो जाती है। इसी ऑप्टिक नर्व के जरिए सूचनाएं और चित्र दिमाग तक पहुंचता है। यदि ऑप्टिक नर्व और आंखों के अन्य भागों पर पड़ने वाले दबाव को कम न किया जाए, तो आंखों की रोशनी चली जाती है।

एक बार अगर काला मोतियाबिंद से आंखों की रोशनी चली गई, तो दोबारा रोशनी नहीं मिलती है। बताया कि इस बीमारी का शिकार 40 से 45 वर्ष के युवा भी हो रहे हैं। तीन से चार युवा ऐसे मिले हैं, जिनकी आंखों की रोशनी 70 फीसदी से अधिक जा चुकी है। इनकी सर्जरी भी अब नहीं हो सकती है। दवा देकर इलाज किया जा रहा है।
 

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Cataracts

पांच तरह का होता है काला मोतियाबिंद
डॉ राम कुमार जायसवाल ने बताया कि काला मोतियाबिंद पांच तरह का होता है। पहला प्राथमिक या ओपन एंगल ग्लूकोमा, एंगल क्लोजन ग्लूकोमा, लो टेंशन या नार्मल टेंशन ग्लूकोमा, कोनजेनाइटल ग्लूकोमा और सेकेंडरी ग्लूकोमा होता है। बताया कि पूर्वांचल में सबसे अधिक मरीज ओपन एंगल ग्लूकोमा के मिलते हैं। हर माह 25 से 30 मरीज काला मोतियाबिंद के इलाज के लिए आ रहे हैं। इनमें पांच फीसदी मरीजों की आंखों की रोशन भी चली जा रही है।
 

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eye

काला मोतियाबिंद के लक्षण
डॉ. राम कुमार जायसवाल ने बताया कि आमतौर पर काला मोतियाबिंद का कोई विशेष लक्षण नहीं होता है। यही वजह है कि लोगों को इस बीमारी का पता समय से नहीं चल पाता है। इलाज में देरी की वजह से मरीजों की आंखों की रोशनी चली जाती है। आंखों और सिर में तेज दर्द होना। नजर कमजोर होना या धुंधला दिखाई देना। आंखें लाल होना। रोशनी के चारों ओर रंगीन छल्ले दिखाई देना। जी मचलाना और उल्टी होना जैसे लक्षण मिलते हैं।

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