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सीएम योगी ने जिसे बनाया था अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी, यहां पढ़ें उनके संघर्षों की दास्तां

Mon, 11 May 2020 03:33 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 11 May 2020 03:33 PM IST
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bjp leader Upendra Dutt shukla died struggle political career special story
मार्च 2018 में लोकसभा उपचुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उपेंद्र दत्त शुक्ला। - फोटो : अमर उजाला।

भाजपा नेता उपेंद्र दत्त शुक्ला के असामयिक निधन पर भाजपा समेत सभी दलों के नेताओं ने शोक प्रकट किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टेलीफोन से भाजपा नेता के बेटे से बात भी की और शोक जताया। उन्होंने कहा कि उपेंद्र दत्त शुक्ला भाजपा के जनप्रिय और मिलनसार नेता थे। उनके असामयिक निधन से अपूरणीय क्षति हुई है। गुरु गोरक्षनाथ से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को चिर शांति प्रदान करें।

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रोते बिलखते परिजन। - फोटो : अमर उजाला।

उपेंद्र दत्त रविवार को बेतियाहाता स्थित आवास पर थे। उन्हें बेचैनी हुई तो परिजन छात्रसंघ चौराहा  स्थित निजी अस्पताल लेकर गए। अस्पताल के चिकित्सकों डॉ अखिलेश पटेल और डॉ विजय पांडेय ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। चिकित्सकों के मुताबिक अस्पताल लाने से पहले ही भाजपा नेता का निधन हो चुका था।

इसकी सूचना मिलते ही भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष डॉ धर्मेंद्र सिंह, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष डॉ सत्येंद्र सिन्हा और प्रदीप शुक्ला सहित कई नेता पहुंच गए। उपेंद्र अपने पीछे पत्नी सुभावती, दो बेटे अरविंद शुक्ला, अमित दत्त शुक्ला और बेटी विंध्यवासिनी सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं।

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रवि किशन के साथ उपेंद्र दत्त शुक्ला (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला।
क्षेत्रीय अध्यक्ष डॉ धर्मेंद्र सिंह ने उपेंद्र दत्त शुक्ला के निधन को अपूरणीय क्षति बताया। क्षेत्रीय अध्यक्ष ने कहा कि संगठन के अलग-अलग पदों की जिम्मेदारी संभालने वाले उपेंद्र मृदुभाषी व सरल स्वभाव के थे। नेता और कार्यकर्ताओं के बीच काफी लोकप्रिय थे। सहज, सरल व्यक्तित्व के धनी थे।  
 
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उपेंद्र दत्त शुक्ला (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला।

तीन बार कौड़ीराम से विधानसभा चुनाव लड़े थे
संगठन को चुस्त-दुरुस्त बनाने में माहिर उपेंद्र दत्त शुक्ला चुनाव नहीं जीत पाए थे। वह कौड़ीराम विधानसभा क्षेत्र से तीन बार चुनाव लड़े थे लेकिन हार का सामना करना पड़ा। लोकसभा उपचुनाव में भी हार मिली थी।

आपको बताएं, जब उपेंद्र दत्त शुक्ला क्षेत्रीय अध्यक्ष थे, तभी यूपी में विधानसभा चुनाव हुए थे। भाजपा ने गोरखपुर क्षेत्र की 62 में से 44 सीटें जीती थीं। इसमें से दो सीट सहयोगी पार्टियों को मिले थे। उपेंद्र भाजयुमो के प्रदेश मंत्री भी थे। गोरखपुर इकाई के जिलाध्यक्ष भी थे।
 

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उपेंद्र दत्त शुक्ला (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला।

योगी ने बनाया था राजनीतिक उत्तराधिकारी
मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने तत्कालीन भाजपा गोरखपुर क्षेत्र के अध्यक्ष उपेंद्र दत्त शुक्ला को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाया था। मुख्यमंत्री ने शहर संसदीय सीट से इस्तीफा दिया तो 2018 में उपचुनाव कराया गया।

जिस सीट से योगी आदित्यनाथ लंबे समय तक सांसद रहे, उससे उपेंद्र को चुनाव लड़ने का मौका मिला लेकिन वह हार गए। इस सीट से सपा के तत्कालीन प्रत्याशी प्रवीण निषाद को जीत मिली थी। उपचुनाव में हार के बाद भी उपेंद्र को भाजपा की प्रदेश इकाई में जगह मिली और उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया।  

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