गोरखपुर जिले के सहजनवां में लगीं दो फैक्ट्रियां राख उगल रही हैं। इससे आसपास के करीब पांच हजार की आबादी रोजाना घुट-घुटकर जीने को मजबूर है। स्थिति इतनी खराब हैं कि खिड़कियां हमेशा बंद रखने के बावजूद घरों में राख की काली परत बिछ जा रही है। लोगों ने छत पर जाना भी बंद कर दिया है। शाम को लोग बच्चों को खेलने के लिए नहीं भेजते हैं। ज्यादातर लोग सांस के रोगी हो गए हैं। एलर्जी भी होने लगी है। एक तरह से कहा जाए तो यहां के लोग राख के ढेर में जी रहे हैं। कभी बड़े अरमानों के साथ अपनी मेहनत की कमाई से बनाया गया आशियाना लोग अब बेचने की तैयारी करने लगे हैं।
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लोगों का कहना है कि फैक्ट्री से निकलने वाली राख हवा के साथ पूरे मोहल्ले में फैल रही है। इसका कालापन घरों की छतों, दीवारों, रसोईघर और बेडरूम तक नजर आता है। यहां की रहने वाली निशा सिंह कहती हैं, रोजाना सुबह जब नींद खुलती है तो राख से सामना होता है। रसोईघर से लेकर बाथरूम और बरामदे के अलावा कमरों में राख की काली परत पसरी नजर आती है। पिछले दो माह से राख ने लोगों का सुख चैन छीन लिया है। छत पर कपड़ा सुखाना बंद कर दिया है, गेंहू धुलकर सुखाने की हिम्मत नहीं कर पा रही हूं। आटा खरीद कर मंगा रही हूं।
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फैक्ट्री ने किया जीना मुहाल
हमारे किचन से लेकर छत तक राख फैली हुई है। सुबह जागने के बाद छत से लेकर कमरे तक सिर्फ राख ही राख नजर आती है। सरिया बनाने वाली फैक्ट्री की राख से जीना मुहाल हो गया है। : सरोज सिंह
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फर्श पर दो इंच से अधिक राख
सांसद रहते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि यहां पर हथकरघा उद्योग लगाया जाएगा। अब यहां पर सरिया की फैक्ट्री खुल गई है। बगल के मैरेज हॉल की छत पर जाइए। वहां दो इंच से अधिक राख फर्श पर नजर आएगी। : केशव सिंह
मकान बेचकर जाने की तैयारी
हम लोग प्रदूषण ग्रुप बनाकर सोशल मीडिया पर समस्या के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। राख की वजह से कुछ लोगों ने मकान बेचकर जाने की तैयारी कर ली है। लेकिन, सवाल उठता है कि इस परिस्थितियों में खरीदेगा कौन? : राहुल तिवारी
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हम लोग नरक भोग रहे
यहां पेड़ की पत्तियां काली पड़ गईं हैं। दिन में दो घंटे पूरे मोहल्ले में घूम लीजिए। आप की सफेद शर्ट काली पड़ जाएगी। बस जान लीजिए, हम लोग नरक भोग रहे हैं। इसने निजात मिलती भी नहीं दिख रही। : प्रदीप कुमार, मोहल्लावासी
अधिकारियों ने क्या कहा
क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पंकज यादव ने कहा कि लोगों की शिकायत पर दोनों फैकिट्रयों की जांच कराई गई है। दोनों जगहों पर प्रदूषण संबंधित गड़बड़ियां मिली हैं। सुधार के लिए प्रबंधन को सात दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। इसके बाद फिर जांच की जाएगी। अगर फिर गड़बड़ी पाई जाती है, तो कार्रवाई की जाएगी।
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गीडा सीईओ पवन अग्रवाल ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को समय-समय पर जांच के लिए निर्देशित किया गया है। मानक का अनुपालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दी गई है। फैक्ट्री संचालकों को भी निर्देश दिया गया है कि मानक के अनुसार ही फैक्ट्री का संचालन करें, जिससे की प्रदूषण न फैले।