हाथों में तिरंगा लिए हुए सड़कों विद्यार्थी और लोगों का हुजूम। वंदेमातरम और भारत माता के जयघोष। स्वागत में फूलों की वर्षा। माहौल पूरी तरह देशभक्तिमय हो गया। यह दृश्य देखकर लगा जैसे हर कोई आजादी का जश्न मनाने को जुटा है। इस तरह का नजारा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की तरफ से आयोजित आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान दिखा।
गोरखपुर: वंदेमातरम व भारत माता के जयघोष से देशभक्तिमय हुआ माहौल, तस्वीरें देखकर करेंगे गर्व
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आजादी के उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। विद्यार्थी व लोग उत्साहित दिखे। सब देशभक्ति के तरानों पर झूमते दिखे। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का रंग भी जमा। उत्साहित मुख्य अतिथि व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजेंद्र नाथ लाहिड़ी की भतीजी गीता लाहिड़ी ने कहा कि यह कार्यक्रम उन बलिदानियों के प्रति वास्तव में बड़ा सम्मान है, जो हमारे बीच नहीं हैं। स्वाधीनता के पुरानेस्वरूप को बनाए रखना होगा। यह हर भारतीय का नैतिक कर्तव्य है। अमर बलिदानियों को नमन व वंदन किया जाना चाहिए।
दीप जलाकर किया शुभारंभ
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजेंद्र नाथ लाहिड़ी की भतीजी गीता लाहिड़ी, आरएसएस गोरक्ष प्रांत के प्रचारक सुभाष, गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो राजेश सिंह, नगर आयुक्त अविनाश सिंह, उद्योगपति विष्णु अजीत सरिया, प्रो शिवशरण दास, मंकेश्वरनाथ पांडेय, मेजर जनरल अतुल वाजपेयी, डॉ आरएन गुप्ता और डॉ महेंद्र अग्रवाल दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
स्वदेशी व भारतीयता अपनाने का मंत्र मिला
वंदेमातरम के सामूहिक गायन व भारत माता की आरती के दौरान आरएसएस गोरक्ष प्रांत के प्रचारक सुभाष ने विद्यार्थियों को स्वदेशी व भारतीयता अपनाने का मंत्र दिया। प्रांत प्रचारक ने कहा कि अमर क्रांतिकारी व बलिदानियों का सपना था कि भारत सिरमौर बने। इस सपने को पूरा करना है। अपने धर्म,संस्कृति की रक्षा करनी है। स्वराज्य, संपूर्ण समाज,जंगल, जमीन को बचाना है। स्वदेशी अपनाना है। भारतीयता को बढ़ाना है, तभी तब देश का उत्थान होगा। महान क्रांतिकारियों ने जो भारत बनाकर दिया, उसे बचाकर अखंड बनाना है।
प्रांत प्रचारक ने कहा कि पूरा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। भारत माता के गुमनाम बलिदानियों को श्रद्धा सुमन अर्पित व उनके सपने को पूरा करने का समय है। अंग्रेजों का कार्यकाल क्रूरता से भरता था। 75 वर्ष में हम कहां हैं, यह विचार करते रहना होगा। हमारा देश महान था, है और रहेगा। भारत ने ही विश्व को मलमल, सूरत-उज्जैन का वस्त्र दिया। मसाले, खाद्यान्न के साथ सबसे सस्ता व अच्छा लोहा भी दिया। आयुर्वेदिक दवाओं को उपलब्ध कराके अपनी संस्कृति सर्वे सन्तु निरामया: का पालन किया। कोरोना काल में आयुर्वेद के काढ़ा ने पूरे विश्व को बचाया। योग,ज्ञान, वेद, शिक्षा, विज्ञान के क्षेत्र में भारत की उपलब्धि बड़ी है।