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Mahakumbh 2025: गोरखपुर पहुंचे आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण, कहा- अपूर्व और विलक्षण है प्रयागराज महाकुंभ
Sat, 22 Feb 2025 04:33 PM IST
रोहित सिंह
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: रोहित सिंह
Updated Sat, 22 Feb 2025 04:33 PM IST
सार
आचार्य मिथिलेशनंदिनी शनिवार को महाराणा प्रताप महाविद्यालय, जंगल धूसड़ के कला संकाय के तत्वावधान में ‘महाकुंभ 2025 : परम्परा, अनुष्ठान और महत्ता’ विषयक दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के शुभारंभ सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
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आचार्य मिथिलेशनंदनी शरण
- फोटो : अमर उजाला
सुपरिचित संत, आध्यात्मिक विचारक एवं सिद्धपीठ श्रीहनुमन्निवास धाम अयोध्या के महंत आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण ने प्रयागराज महाकुंभ 2025 को अपूर्व और विलक्षण बताते हुए कहा है कि दुनिया के इस सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजन को व्यवस्था की दृष्टि से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस सुचारुता से सुनिश्चित किया वह अभिनंदनीय है। उन्होंने कहा कि हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि हमारे पास धर्मनिष्ठा से संपन्न नायक योगी आदित्यनाथ हैं।
आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण
- फोटो : अमर उजाला
आध्यात्मिक और धार्मिक वैभव का वैश्विक अग्रदूत है उत्तर प्रदेश
आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण ने कहा कि उत्तर प्रदेश आध्यात्मिक और धार्मिक वैभव का वैश्विक अग्रदूत है और इसके मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या, काशी और मथुरा के बिना भारत की कल्पना नहीं की जा सकती और यह तीनों महत्वपूर्ण स्थल उत्तर प्रदेश में है।
देश के अन्य राज्यों में तीर्थ हैं लेकिन तीर्थराज प्रयाग उत्तर प्रदेश में है। प्रयागराज में इस बार का महाकुंभ इसलिए भी विलक्षण है कि जहां पहले के कुंभ प्रश्नों और चिताओं के कुंभ होते थे, वहीं इस बार का महाकुंभ उत्तर का कुंभ है।
पहले कुंभ के आयोजनों में यह प्रश्न उठते थे या चिंताएं होती थीं कि अयोध्या में रामलला विराजमान हो पाएंगे क्या, कश्मीर से धारा 370 हट पाएगी क्या लेकिन इस बार के कुंभ में इन सभी सवालों के उत्तर पर विमर्श हो रहा है। केंद्र से उत्तर प्रदेश तक धर्मसत्ता अनुप्राणित जीवन की अवधारणा को समझने वाली सरकार के होने से यह संभव हुआ है।
आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण ने कहा कि उत्तर प्रदेश आध्यात्मिक और धार्मिक वैभव का वैश्विक अग्रदूत है और इसके मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या, काशी और मथुरा के बिना भारत की कल्पना नहीं की जा सकती और यह तीनों महत्वपूर्ण स्थल उत्तर प्रदेश में है।
देश के अन्य राज्यों में तीर्थ हैं लेकिन तीर्थराज प्रयाग उत्तर प्रदेश में है। प्रयागराज में इस बार का महाकुंभ इसलिए भी विलक्षण है कि जहां पहले के कुंभ प्रश्नों और चिताओं के कुंभ होते थे, वहीं इस बार का महाकुंभ उत्तर का कुंभ है।
पहले कुंभ के आयोजनों में यह प्रश्न उठते थे या चिंताएं होती थीं कि अयोध्या में रामलला विराजमान हो पाएंगे क्या, कश्मीर से धारा 370 हट पाएगी क्या लेकिन इस बार के कुंभ में इन सभी सवालों के उत्तर पर विमर्श हो रहा है। केंद्र से उत्तर प्रदेश तक धर्मसत्ता अनुप्राणित जीवन की अवधारणा को समझने वाली सरकार के होने से यह संभव हुआ है।
डॉ सुबोध कुमार शुक्ल
- फोटो : अमर उजाला
शिव की तरह महाकुंभ से निकले विष को आत्मसात किया सीएम योगी ने
श्रीहनुमन्निवास धाम अयोध्या के महंत ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ को 1947 के बाद सबसे बड़ा आंदोलन या धार्मिक पुनर्जागरण कहा जाना चाहिए। 60 करोड लोग एक ही शहर की यात्रा पर हों, ऐसा पहली बार हुआ है। उन्होंने कहा कि कुछ व्यवस्थागत कठिनाइयां जरूर हुई लेकिन भारतीय चेतना दुर्घटना से कुंठित नहीं होती।
भारतीय चेतना महाभारत जैसे विशाल युद्ध में भी गीता जैसे ज्ञान अमृत को निकालने वाली है। आचार्य मिथिलेशनंदिनी ने कहा कि मंथन से अमृत निकालने में उससे निकलने वाला गरल (विष) भी पचाना पड़ता है। समुद्र मंथन से निकले गरल को महादेव शिव ने अपने कंठ में ग्रहण किया तो इस बार महाकुंभ के गरल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आत्मसात किया और देश-दुनिया ने इसे देखा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा ऐसा करने की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता।
गंगा को मात्र नदी कहने वाले दया के पात्र
आचार्य मिथिलेशनंदिनी ने कहा कि गंगा को मात्र नदी कहने वाले दया के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि विश्व को संकट या खतरा अज्ञ (अनपढ़), विज्ञ (ज्ञानी) से नहीं बल्कि कम जानने वालों से है। गंगा के जल के प्रदूषित होने की बात वही लोग कह रहे हैं जो ठीक से न जानने वाले हैं। उन्होंने कहा कि गंगा जी को लेकर विज्ञान का हौव्वा उपनिवेश की कुंठा से जनित अवधारणा है।
श्रीहनुमन्निवास धाम अयोध्या के महंत ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ को 1947 के बाद सबसे बड़ा आंदोलन या धार्मिक पुनर्जागरण कहा जाना चाहिए। 60 करोड लोग एक ही शहर की यात्रा पर हों, ऐसा पहली बार हुआ है। उन्होंने कहा कि कुछ व्यवस्थागत कठिनाइयां जरूर हुई लेकिन भारतीय चेतना दुर्घटना से कुंठित नहीं होती।
भारतीय चेतना महाभारत जैसे विशाल युद्ध में भी गीता जैसे ज्ञान अमृत को निकालने वाली है। आचार्य मिथिलेशनंदिनी ने कहा कि मंथन से अमृत निकालने में उससे निकलने वाला गरल (विष) भी पचाना पड़ता है। समुद्र मंथन से निकले गरल को महादेव शिव ने अपने कंठ में ग्रहण किया तो इस बार महाकुंभ के गरल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आत्मसात किया और देश-दुनिया ने इसे देखा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा ऐसा करने की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता।
गंगा को मात्र नदी कहने वाले दया के पात्र
आचार्य मिथिलेशनंदिनी ने कहा कि गंगा को मात्र नदी कहने वाले दया के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि विश्व को संकट या खतरा अज्ञ (अनपढ़), विज्ञ (ज्ञानी) से नहीं बल्कि कम जानने वालों से है। गंगा के जल के प्रदूषित होने की बात वही लोग कह रहे हैं जो ठीक से न जानने वाले हैं। उन्होंने कहा कि गंगा जी को लेकर विज्ञान का हौव्वा उपनिवेश की कुंठा से जनित अवधारणा है।
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प्रो के रामचंद्र रेड्डी
- फोटो : अमर उजाला
भारतपुरुष का विराट रूप दर्शन है महाकुंभ 2025
आचार्य मिथिलेशनंदिनी ने प्रयागराज महाकुंभ 2025 को भारतपुरुष का विराट रूप दर्शन बताया। उन्होंने कहा कि इस महाकुंभ ने सारे दुष्प्रचारों को दरकिनार कर यह दिखाया है कि भारत की पारंपरिकता और एकात्मकता की निष्ठा सर्वोपरि है।
यह ऐसा आयोजन है जहां संपूर्ण भारत भाषा, वेशभूषा, भोजन, क्षेत्र आदि सारे विभेद भूलकर एक साथ सोच रहा है। एक साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसा कोई धर्म दर्शन नहीं है जहां मनुष्य, ईश्वर के समकक्ष माना जाता हो। जीव और ईश्वर साथ चल सकते हैं तो यह भारतीय चेतना का ही अमृत है। प्रयागराज महाकुंभ दुनिया का सबसे बड़ा उत्सव है जहां एक भाव, एक विचार, एक लक्ष्य लेकर लोग एक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
मलिनता से मुक्त करती हैं मां गंगा
श्रीहनुमन्निवास धाम अयोध्या के महंत ने कहा कि मां गंगा मलिनता से मुक्त करती हैं। पतित से पतित व्यक्ति भी मां गंगा से अपनी शुद्धि की कामना करता है। उन्होंने कहा कि अन्य धार्मिक अवधारणाओं में जहां पाप करने वालों को उनके ही पाप में जलाने की बात है तो वहीं भारतीय चिंतन में यह कहा गया है कि यदि पाप की पराकाष्ठा वाला व्यक्ति भी आत्मग्लानि के भाव से मां गंगा में डुबकी लगा ले तो वह पाप मुक्त हो जाता है। उन्होंने बताया कि 10 हजार मुख्य तीर्थों और 60 करोड़ गौड़ तीर्थो का निवास प्रयागराज में है। संगम इस तीर्थराज का सिंहासन है और अक्षय वट इसका छत्र।
आचार्य मिथिलेशनंदिनी ने प्रयागराज महाकुंभ 2025 को भारतपुरुष का विराट रूप दर्शन बताया। उन्होंने कहा कि इस महाकुंभ ने सारे दुष्प्रचारों को दरकिनार कर यह दिखाया है कि भारत की पारंपरिकता और एकात्मकता की निष्ठा सर्वोपरि है।
यह ऐसा आयोजन है जहां संपूर्ण भारत भाषा, वेशभूषा, भोजन, क्षेत्र आदि सारे विभेद भूलकर एक साथ सोच रहा है। एक साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसा कोई धर्म दर्शन नहीं है जहां मनुष्य, ईश्वर के समकक्ष माना जाता हो। जीव और ईश्वर साथ चल सकते हैं तो यह भारतीय चेतना का ही अमृत है। प्रयागराज महाकुंभ दुनिया का सबसे बड़ा उत्सव है जहां एक भाव, एक विचार, एक लक्ष्य लेकर लोग एक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
मलिनता से मुक्त करती हैं मां गंगा
श्रीहनुमन्निवास धाम अयोध्या के महंत ने कहा कि मां गंगा मलिनता से मुक्त करती हैं। पतित से पतित व्यक्ति भी मां गंगा से अपनी शुद्धि की कामना करता है। उन्होंने कहा कि अन्य धार्मिक अवधारणाओं में जहां पाप करने वालों को उनके ही पाप में जलाने की बात है तो वहीं भारतीय चिंतन में यह कहा गया है कि यदि पाप की पराकाष्ठा वाला व्यक्ति भी आत्मग्लानि के भाव से मां गंगा में डुबकी लगा ले तो वह पाप मुक्त हो जाता है। उन्होंने बताया कि 10 हजार मुख्य तीर्थों और 60 करोड़ गौड़ तीर्थो का निवास प्रयागराज में है। संगम इस तीर्थराज का सिंहासन है और अक्षय वट इसका छत्र।
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अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी
- फोटो : अमर उजाला
अपनी शुद्धि प्रमाणित करें गंगा की शुद्धि पर बोलने वाले
आचार्य मिथिलेशनंदिनी ने गंगा की शुद्धता पर प्रतिकूल टिप्पणी करने वाले लोगों को दो टूक सुनाते हुए कहा कि गंगा की शुद्धि पर बोलने वाले पहले अपनी शुद्धि प्रमाणित करें। उन्होंने कहा कि वास्तव में यह ऐसे और असंतोष से भरे लोग हैं जो मीडिया की नजर में आपदा में अपना अवसर खोज रहे हैं।
पौराणिक काल मे अमृत की चाह में कुछ और चाटकर दो भाग में अपनी जीभ कराने वाले सर्पों की भांति ऐसे लोगों की जीभ भी मीडिया में लपलपा रही है। उन्होंने कहा कि यह गंगा की पावनता है कि घर पर आरओ वाटर पीने वाले लोग भी महाकुंभ स्नान के बाद बोतल में भरकर गंगाजल अपने घर ला रहे हैं। मां गंगा सबको शुद्ध करने वाली पावन धारा हैं। उनकी पवित्रता पर बोलने वालों ने भारतीय परंपराओं को मलिन करने का काम किया है।
आस्था का पुनर्जागरण काल है प्रयागराज महाकुंभ
आचार्य मिथिलेश नंदनी शरण ने कहा कि 2025 में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ आस्था का पुनर्जागरण काल है और इतिहास इसे इसी रूप में दर्ज करेगा। उन्होंने कहा कि परंपरा, अनुष्ठान के रूप में महाकुंभ सदैव बना रहेगा। प्रयागराज महाकुंभ ने 60 करोड लोगों को एकात्मक कर दिया।
आचार्य मिथिलेशनंदिनी ने गंगा की शुद्धता पर प्रतिकूल टिप्पणी करने वाले लोगों को दो टूक सुनाते हुए कहा कि गंगा की शुद्धि पर बोलने वाले पहले अपनी शुद्धि प्रमाणित करें। उन्होंने कहा कि वास्तव में यह ऐसे और असंतोष से भरे लोग हैं जो मीडिया की नजर में आपदा में अपना अवसर खोज रहे हैं।
पौराणिक काल मे अमृत की चाह में कुछ और चाटकर दो भाग में अपनी जीभ कराने वाले सर्पों की भांति ऐसे लोगों की जीभ भी मीडिया में लपलपा रही है। उन्होंने कहा कि यह गंगा की पावनता है कि घर पर आरओ वाटर पीने वाले लोग भी महाकुंभ स्नान के बाद बोतल में भरकर गंगाजल अपने घर ला रहे हैं। मां गंगा सबको शुद्ध करने वाली पावन धारा हैं। उनकी पवित्रता पर बोलने वालों ने भारतीय परंपराओं को मलिन करने का काम किया है।
आस्था का पुनर्जागरण काल है प्रयागराज महाकुंभ
आचार्य मिथिलेश नंदनी शरण ने कहा कि 2025 में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ आस्था का पुनर्जागरण काल है और इतिहास इसे इसी रूप में दर्ज करेगा। उन्होंने कहा कि परंपरा, अनुष्ठान के रूप में महाकुंभ सदैव बना रहेगा। प्रयागराज महाकुंभ ने 60 करोड लोगों को एकात्मक कर दिया।