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चिंता: गोरखपुर में सात माह में मिले 5897 टीबी के मरीज, 2025 तक टीबी मुक्त नहीं हो पाएगा जिला
Wed, 04 Aug 2021 12:53 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 04 Aug 2021 12:53 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
इस साल के सात महीनों में गोरखपुर जिले में टीबी के 5897 मरीज मिले हैं। जनवरी माह से लेकर 31 जुलाई के बीच हर दिन औसतन टीबी के 28 मरीज मिले हैं। कुल संख्या में निजी अस्पतालों के 2550 मरीज भी शामिल हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के 2025 तक टीबी मुक्त जिला मुहिम को झटका लगना तय है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला।
ये लक्षण दिखें तो कराएं टीबी की जांच
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रामेश्वर मिश्र ने बताया कि दो सप्ताह या अधिक समय तक खांसी आना, खांसी के साथ बलगम आना, बलगम में कभी-कभी खून आना, सीने में दर्द होना, शाम को हल्का बुखार आना, वजन कम होना और भूख न लगना टीबी के सामान्य लक्षण हैं। ऐसे लक्षण मिलने पर तत्काल टीबी की जांच कराएं।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रामेश्वर मिश्र ने बताया कि दो सप्ताह या अधिक समय तक खांसी आना, खांसी के साथ बलगम आना, बलगम में कभी-कभी खून आना, सीने में दर्द होना, शाम को हल्का बुखार आना, वजन कम होना और भूख न लगना टीबी के सामान्य लक्षण हैं। ऐसे लक्षण मिलने पर तत्काल टीबी की जांच कराएं।
सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
इन मामलों में भी टीबी की जांच जरूरी
डॉ. रामेश्वर मिश्र ने बताया कि अगर कोई कोविड मरीज ठीक हो जाता है और उसकी जांच रिपोर्ट निगेटिव आ जाती है, फिर भी खांसी नहीं रुक रही है तो उसकी टीबी जांच अवश्य कराएं। कोविड के लक्षण वाले व्यक्ति की जांच कराने पर अगर रिपोर्ट निगेटिव है तब भी टीबी जांच अवश्य करवा लें। इस समय टीबी की ट्रूनेट विधि से जांच की सुविधा जिला क्षय रोग केंद्र के अलावा सीएचसी पिपराईच, सीएचसी भटहट, सीएचसी कैंपियरगंज, पीएचसी खोराबार, सीएचसी बड़हलगंज और सीएचसी सहजनवां में भी उपलब्ध है।
डॉ. रामेश्वर मिश्र ने बताया कि अगर कोई कोविड मरीज ठीक हो जाता है और उसकी जांच रिपोर्ट निगेटिव आ जाती है, फिर भी खांसी नहीं रुक रही है तो उसकी टीबी जांच अवश्य कराएं। कोविड के लक्षण वाले व्यक्ति की जांच कराने पर अगर रिपोर्ट निगेटिव है तब भी टीबी जांच अवश्य करवा लें। इस समय टीबी की ट्रूनेट विधि से जांच की सुविधा जिला क्षय रोग केंद्र के अलावा सीएचसी पिपराईच, सीएचसी भटहट, सीएचसी कैंपियरगंज, पीएचसी खोराबार, सीएचसी बड़हलगंज और सीएचसी सहजनवां में भी उपलब्ध है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला।
एक नजर आंकड़ों पर
वर्ष मरीज
2019 11473
2020 8658
2021(31 जुलाई तक) 5894
वर्ष मरीज
2019 11473
2020 8658
2021(31 जुलाई तक) 5894
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
साढ़े पांच करोड़ रुपये भेजी गई सहायता राशि
जिले में पिछले तीन वर्षों के अंदर 21,182 मरीजों के खाते में सहायता राशि के तौर पर पांच करोड़ 42 लाख रुपये भेजे गए हैं। टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत टीबी मरीजों को प्रति माह 500 रुपये बेहतर खानपान के लिए भेजे जाते हैं।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रामेश्वर मिश्र ने बताया कि कोविड महामारी के बीच कुछ माह तक टीबी अभियान प्रभावित रहा। लेकिन, जैसे ही महामारी की रफ्तार कम हुई फिर से जांच का दायरा बढ़ा दिया गया। अब तक छह हजार के आसपास टीबी के मरीज मिल चुके हैं। इनमें सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज कराने वाले मरीजों को निशुल्क दवाएं और सुविधाएं दी जा रहीं हैं।
जिले में पिछले तीन वर्षों के अंदर 21,182 मरीजों के खाते में सहायता राशि के तौर पर पांच करोड़ 42 लाख रुपये भेजे गए हैं। टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत टीबी मरीजों को प्रति माह 500 रुपये बेहतर खानपान के लिए भेजे जाते हैं।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रामेश्वर मिश्र ने बताया कि कोविड महामारी के बीच कुछ माह तक टीबी अभियान प्रभावित रहा। लेकिन, जैसे ही महामारी की रफ्तार कम हुई फिर से जांच का दायरा बढ़ा दिया गया। अब तक छह हजार के आसपास टीबी के मरीज मिल चुके हैं। इनमें सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज कराने वाले मरीजों को निशुल्क दवाएं और सुविधाएं दी जा रहीं हैं।