गोरखपुर में बाढ़ से हुए नुकसान की आकलन रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 17 हजार हेक्टेअर से अधिक फसल बर्बाद हुई है तो वहीं 314 किलोमीटर सड़क को भी नुकसान पहुंचा है। फसल के मुआवजे के तौर पर 22 करोड़ रुपये की मांग की गई है।
गोरखपुर में बाढ़ से 17 हजार हेक्टेअर फसल बर्बाद, 314 किलोमीटर सड़क को हुआ नुकसान
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रिपोर्ट में कहा गया कि 406 एकड़ जमीन नदी में विलीन हो गई। पहली बार रिपोर्ट में 22 हजार परिवारों के लिए आजीविका भत्ता की भी सिफारिश की गई है। कुल मिलाकर 54.84 करोड़ रुपये का नुकसान आंका गया है। जिला प्रशासन का कहना है कि प्रस्ताव भेज दिया गया है। शासन स्तर से स्वीकृति मिलते ही मुुआवजे का वितरण शुरू कर दिया जाएगा।
बाढ़ से हुए नुकसान की रिपोर्ट सितंबर में ही भेज दी गई थी, मगर मौके पर 22 सितंबर को सत्यापन करने पहुंची केंद्रीय टीम ने आजीविका भत्ता, नदी में विलीन हुई जमीन आदि नुकसान का भी जिक्र कर संशोधित रिपोर्ट भेजने को कहा था। इसपर फिर से सर्वे कर रिपोर्ट बनाई गई, जिसे अब भेजा गया है।
पहले 28 करोड़ रुपये के क्षति का आकलन था, जो अब बढ़कर 54.84 करोड़ रुपये हो गया है। केंद्र की तरफ से संयुक्त सचिव एनडीएमए रमेश कुमार गंटा के नेतृत्व में आई टीम में वित्त मंत्रालय में सलाहकार आरबी कौल, कृषि मंत्रालय में निदेशक डॉ. मान सिंह व उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण लखनऊ के परियोजना निदेशक बलवीर सिंह शामिल थे।
60 और 40 रुपये मिलेगा आजीविका भत्ता
पहली बार उन लोगों को भी सरकार की ओर से आर्थिक मदद मिल सकेगी, जो बाढ़ के कारण काम पर नहीं जा पाए और उनकी आजीविका का साधन बंद हो गया। प्रभावित तहसीलों में ऐसे लोगों की सूची बनाकर उसका जिक्र शासन को भेजी गई आकलन रिपोर्ट में भी किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे 22 हजार परिवार चिह्नित किए गए हैं जिनकी आजीविका बाढ़ की वजह से प्रभावित हुई। इन्हें मुआवजा देने के लिए प्रशासन ने 5.94 करोड़ रुपये की मांग की है। प्रभावित परिवार के हर वयस्क सदस्य को 60 रुपये और अवयस्क को 45 रुपये प्रतिदिन के मुताबिक भुगतान किया जाएगा।