डिजिटल रिव्यू: थप्पड़ (ट्रेलर)
क्या दो प्रेमी एक दूसरे से किसी भी तरह पेश आ सकते हैं? क्या वे अन-बन होने पर एक दूसरे को थप्पड़ भी जड़ सकते हैं? क्या प्यार में यह भी जायज है? कुछ इसी तरह के सवालों को कुरेदता है तापसी पन्नू की फिल्म 'थप्पड़' का ट्रेलर।
Thappad Trailer Release: तापसी को यूं पड़ा 'थप्पड़', लीक तोड़ने की अब आई असली चुनौती
फिल्म में तापसी पन्नू एक सुखी वैवाहिक जीवन जी रही हैं। पति से लेकर पूरे परिवार के साथ उनके मधुर संबंध है। फिर अचानक एक रात भरी महफिल में पति (पावेल गुलाटी) अपनी पत्नी (तापसी पन्नू) को थप्पड़ मार देता है। इसके बाद पत्नी अपने पति से अलग होना चाहती है लेकिन लोगों की नजरों में यह कारण बहुत ही छोटा है जिसे नजरअंदाज कर देना चाहिए।
तापसी को वकील से लेकर उसके घरवाले औरत होने की वजह से थोड़ा सहन करने की सलाह देते हैं। वे इतनी छोटी बात पर तलाक ना लेकर रिश्ते निभाने की सलाह देते हैं। पत्नी के अंदर यह डर बैठाया जाता है कि तलाक शुदा के तमगे के बाद तुम्हारी बहुत बेइज्जती होगी। लेकिन तापसी का कहना है, 'उसने मुझे मारा, भले पहली बार, लेकिन नहीं मार सकता है।' कोर्ट में तापसी पर ही तरह-तरह के इल्जाम लगने लगते हैं। इन सभी चीजों का तापसी डटकर सामना करती हुई नजर आती हैं।
फिल्म में तापसी पन्नू का अभिनय हमेशा की तरह प्रभावी है। उनके संवाद और भाव उनकी फिल्म 'पिंक' और 'मुल्क' की यादों में पहुंचा देते हैं। यही मजबूत पक्ष तापसी के लिए नकारात्मक पक्ष भी है कि वह अपने चिर परिचित रूप से कुछ अलग करने में नाकामयाब साबित हुई दिखती हैं। फिल्म में उन्होंने एक खुशहाल पारिवारिक महिला के साथ-साथ एक दृढ़ महिला का किरदार भी निभाया है। जो वक्त पड़ने पर अकेले दुनिया की दकियानुसी सोच को चुनौती देती है। दर्शक पहले ही उन्हें इस तरह के किरदारों में देख चुके हैं इस वजह से उन्हें थोड़ी निराशा भी हो सकती है।
पावेल गुलाटी से लेकर रत्ना पाठक शाह, मानव कौल, दीया मिर्जा समेत दूसरे कलाकारों ने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है। सभी किरदारों की ताकत उसके संवाद ही दिखते हैं। फिल्म में कई सारे ऐसे संवाद और परिस्थितियां हैं जो समाज में हर दिन के घटनाक्रमों से उठाए गए हैं। हालांकि यह फिल्म अनुभव की 'मुल्क' और 'आर्टिकल 15' के स्तर की तुलना में कुछ पीछे खड़ी नजर आती है।