मिलिए एक ऐसे पहलवान से, जिनका सीना 53 इंच का था। वे इतने लंबे-चौड़े थे कि उन्होंने 200 किलो वजनी रेसलर को उठाकर फेंक दिया था, जानिए ऐसी ही 5 अनसुनी बातें।
एक भी मुकाबला नहीं हारे
धारावाहिक रामायण में हनुमान का यादगार रोल निभाने वाले पहलवान दारा सिंह ने अपनी जिंदगी में 500 से ज्यादा फाइट लड़ी और वे एक भी मुकाबला नहीं हारे। दारा सिंह ने अपने समय के सभी बड़े पहलवानों को हराया था, जिसके लिए उन्हें 'रुस्तम-ए-पंजाब' और 'रुस्तम-ए-हिंद' का खिताब दिया गया था।
दारा सिंह रन्धावा का जन्म 19 नवम्बर 1928 को अमृतसर (पंजाब) के गांव धरमूचक में श्रीमती बलवन्त कौर और श्री सूरत सिंह रन्धावा के यहां हुआ था। कम आयु में ही घर वालों ने उनकी मर्जी के बिना उनसे आयु में बहुत बड़ी लड़की से उनकी शादी कर दी। मां ने इस उद्देश्य से कि पट्ठा जल्दी जवान हो जाए, उसे सौ बादाम की गिरियों की खांड मक्खन में कूटकर खिलाना व ऊपर से भैंस का दूध पिलाना शुरू कर दिया।
नतीजा यह हुआ कि 17 साल की नाबालिग उम्र में ही दारा सिंह प्रद्युम्न नामक बेटे के बाप बन गए। दारा सिंह का एक छोटा भाई सरदारा सिंह भी था, जिसे लोग रंधावा के नाम से जानते थे। दारा सिंह और रंधावा दोनों ने मिलकर पहलवानी करनी शुरू कर दी और धीरे-धीरे गांव के दंगलों से लेकर शहरों तक में ताबड़तोड़ कुश्तियां जीतकर अपने गांव का नाम रोशन किया।
दारा सिंह की लंबाई 6 फीट 2 इंच थी और छाती 53 इंच की थी। लंबा चौड़ा शरीर होने की वजह से उन्हें रेस्लिंग में हाथ आजमाने को कहा जाता था। जिसकी शुरुआत उन्होंने मेलों और बाजारों में छोटी-छोटी फाइट से की थी। आप को विश्वास नही होगा, लेकिन दारा सिंह ने एक मुकाबले में अपने से कहीं ज्यादा वजनी 200 किलो के ऑस्ट्रेलिया के किंग कांग को पहले तो रिंग में पटखनी दी और फिर उन्हें उठाकर रिंग के बाहर ही फेंक दिया था।