चीन के यूवू शहर की तरह दिल्ली में भी होलसेल फेस्टिवल का आयोजन होगा। इस उत्सव में तीन मुख्य आकर्षण खरीदारी, मनोरंजन और खाना होगा। व्यापारियों को एसजीएसटी रिफंड देकर उन्हें डिस्काउंट तो दिया ही जाएगा साथ ही आम ग्राहकों को भी बेहतर खरीदारी करने का मौका मिलेगा। खरीदारी करने पर 25 प्रतिशत की छूट भी आम ग्राहकों को मिलेगी।
बंपर छूट का मिलेगा फायदा: चीन के यूवू शहर की तरह दिल्ली में होगा होलसेल फेस्टिवल, चार से छह सप्ताह तक लगेगा बड़ा मेला
दिल्ली सरकार का मानना है कि चीन में जेयांग के यूवू शहर में होने वाला होलसेल शॉपिग फेस्टिवल एक गेम चेंजर वहां की अर्थव्यवस्था के लिए साबित हुआ है। दुनियाभर के ग्राहक चीन के तरफ आकर्षित हुए है। अगर इसी तरह का फेस्टिवल दिल्ली में आयोजित किया जाता है तो चीन के सामान के प्रति भरोसे के आगे दिल्ली के सामान के प्रति भरोसा सैकड़ों गुना ज्यादा होगा। इस तरह से दिल्ली का सामान देश के होलसेल बाजार में अपनी जगह बनाएगा। यह भी सरकार ने तर्क दिया है कि दिल्ली में हो रहे व्यापार का 60 प्रतिशत होलसेल से ही होता है। लिहाजा इस होलसेल मार्केट को दिल्ली ही नहीं दुनिया में एक अलग पहचान मिलेगी। छोटे उद्यमी को भी बड़ा बाजार मिल जाएगा। इसके लिए दिल्ली सरकार ने 250 करोड़ रुपया बजट में प्रस्तावित भी किया है।
हर साल डेढ़ से दो महीने तक चलेगा फेस्टिवल
दिल्ली होलसेल फेस्टिवल प्रगति मैदान में हर साल लगने वाले दिल्ली अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला की तरह दो सप्ताह का नहीं बल्कि पूरे चार से छह सप्ताह तक चलेगा। सरकार की योजना है कि एक तरह से उत्सव की तरह मनाया जाए। इस उत्सव में खरीदारी पर छूट दी जाएगी।
दिल्ली के वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था अंर्तमुखी है। इस तरह के उत्सव से खपत करने की क्षमता बढ़ेगी। छूट की आकर्षक योजना होगी। दिल्ली का माल मतलब भरोसे का माल। मार्केट एसोसिएशन के साथ मिलकर बाजार को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। गांधी नगर टेक्सटाइल मार्केट जिसका प्रतिदिन का टर्न ओवर 100 लाख रुपया है इसका ब्रांडिंग कर टर्न ओवर बढ़ाया जाएगा और ग्रैंड गारमेंट हब के रूप में विकसित किया जाएगा।
शॉपिंग मॉल्स के युग में दिल्ली का बाजार भी कम नहीं रहेगा
दिल्ली सरकार की योजना है कि आधुनिक शॉपिंग मॉल्स के युग में दिल्ली का बाजार कही पिछड़ ना जाए। प्रतिष्ठित बजारों के प्रति आकर्षण विकसित किया जाएगा। दिल्ली सरकार का मानना है कि आज भी दिल्ली और उसके आसपास के 150-200 किलोमीटर के दायरे के लोग अभी भी दिल्ली के परंपरागत बजारों में शॉपिंग करने में अधिक विश्वास रखते है। यहां के व्यापारियों ने आज भी लोगों के दिल में विश्वास को कायम रखा है। लिहाजा इन पारंपरिक बजारों के इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य सुविधाओं का विकास आवश्यक है।
इनक्यूबेशन सेंटर बनेगा
चीन की तरह ही अब भारत में इनक्यूबेशन सेंटर बनेगा। बकौल मनीष सिसोदिया अगर किसी की मूल कल्पना स्टार्टअप को लेकर है तो इस कल्पना को साकार करने में युवाओं को मूल काम छोड़कर सरकारी कामकाज में उलझना पड़ता है। टैक्स, एनफोर्समेंट, जीएसटी, एमसीडी, पेटेंट जैसे कामों में 90 प्रतिशत समय देना पड़ता है। आइडिया पर काम करने का 10 प्रतिशत समय ही बचता है। लेकिन दिल्ली सरकार के इनक्यूबेशन सेंटर में युवा अगर स्टार्टअप सेट करना चाहते है तो मार्केटिंग, मेंटरिंग और इनवेस्टमेंट के लिए सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। फाइनेंस के लिए बैंक और इन्वेस्टर्स के साथ उनका टाइअप सरकार कराएगी।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया माइक्रो एंड स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक गुप्ता का कहना है कि चीन में गुनझाउ विदेशी खरीदारों को तो आकर्षित करता ही है साथ ही बेहतर मंच भी देता है। टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सदस्य राजीव बत्रा का कहना है चीन के यीयू शहर में बुतियान मार्केट में सूई से जहाज तक की खरीदारी संभव है। इस तरह का प्रयास दिल्ली में भी करने की आवश्यकता है। इलेक्ट्रॉनिक सिटी में इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग होने से इलेक्ट्रॉनिक पार्ट के लिए भरोसे चीन पर नहीं रहना होगा। बिजनेस लीडर तैयार होंगे।