गांव खेड़ी गुजरान में सेना के स्क्रैप से कास्ट आयरन निकालने के दौरान विस्फोट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर इसके लिए कौन जिम्मेदार है कि स्क्रैप में जिंदा मोर्टार सेना की बिना जांच के बाहर आ गया और उसमें विस्फोट हुआ।
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faridabad bomb blast
- फोटो : अमर उजाला
स्थानीय स्तर पर प्रशासन ने अब इसकी जांच शुरू कर दी है। डीसी अतुल कुमार ने पूरे मामले की जांच एसडीएम को सौंपी है। उन्होंने एक सप्ताह में मामले की रिपोर्ट मांगी है। डीसी अतुल कुमार ने बताया कि सेना का स्क्रैप सीधे ऐसे ही नहीं खरीदा जा सकता। सेना के स्तर से ही इसके लिए पूरी प्रक्रिया होती है।
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गहन जांच के बाद ही स्क्रैप नीलामी तक पहुंचता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर सेना से यह जिंदा मोर्टार कबाड़ बनकर बाहर कैसे आए। डीसी ने यह भी बताया कि खेड़ी गुजरान में चल रहे इस कारोबार की जानकारी उन्होंने नगर निगम से मांगी है। उनसे पूछा गया है कि क्या कारोबारियों के पास किसी प्रकार का लाइसेंस था या फिर अवैध रूप से ही इसे संचालित किया जा रहा था।
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उधर, पुलिस पूछताछ में जावेद ने बताया कि वे लोग करीब पांच दिन पहले ही हरिद्वार की सेंचुरी कंपनी से यह माल लेकर आए थे। सेंचुरी कंपनी सेना से उनका स्क्रैप खरीदती है और फिर उसे नीलाम करती है। घटनास्थल पर मौजूद बम निरोधक दस्ते के एक अधिकारी ने बताया कि सेना से तो सारा सामान जांच के बाद ही निकलता है।
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मगर कई बार लॉच करने पर कोई मोर्टार या ग्रेनेड नहीं फटता है। जब तक सैनिक उसे अभ्यास के बाद उठाने जाएं, तब तक आसपास के ग्रामीण उसे चुरा लेते हैं और कबाड़ियों को बेच देते हैं। इस तरह कई बार जिंदा विस्फोटक भी बाहर आ जाते हैं।