तीन तलाक पर केंद्र सरकार के अध्यादेश को तीन तलाक पीड़िता रानी शबनम ने पीड़िताओं को इंसाफ दिलाने के लिए उठाया गया पहला कदम बताया है। साथ ही कहा कि सरकार का आदेश पीड़ित याचिकाकर्ताओं की जीत है। एक अन्य पीड़िता फरजाना का मानना है कि अध्यादेश के आने से महिलाओं पर अत्याचार रुकेगा।
सिकंदराबाद के मोहल्ला भाटियावाड़ा निवासी फरजाना और अगौता थाना क्षेत्र के गांव जौलीगढ़ निवासी रानी उर्फ शबनम ने समाजसेवी डा. समीना की मदद से तीन तलाक, बहुविवाह, हलाला के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को अवैध करार दे दिया था।
तीन तलाक को अवैध करार दिए जाने के बाद उसे कानून की शक्ल देने के लिए भाजपा ने लोकसभा में तीन तलाक के खिलाफ प्रस्ताव पास कर राज्यसभा के लिए भेज दिया था। विपक्षियों का समर्थन नहीं मिलने के कारण बिल राज्यसभा में अटका हुआ था। बुधवार को केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाकर तीन तलाक को अवैध करार दे दिया। केंद्र सरकार के इस फैसले का तीन तलाक पीड़िताओं ने स्वागत किया है।
पीड़िता फरजाना का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदम से तीन तलाक पीड़िताओं को राहत मिलेगी। महिलाओं पर अत्याचारों में कमी आएगी। वही तलाक के मामलों में कमी आएगी। दूसरी ओर तीन तलाक और एसिड अटैक की शिकार हुई रानी उर्फ शबनम ने कहा कि सरकार ने महिलाओं के हक में अध्यादेश जारी किया है।
अब महिलाओं को इस्तेमाल की वस्तु नहीं समझा जाएगा। उन्हें भी अपने इच्छानुसार जीवन जीने का हक मिलेगा। बताया कि तीन तलाक पर अध्यादेश तीन तलाक पीड़िताओं को इंसाफ के लिए उठाया गया पहला कदम है। हालांकि अभी मंजिल दूर है। इसके लिए अभी लंबी लड़ाई लड़नी होगी। तीन तलाक, बहुविवाह, हलाला बिल को राज्यसभा में पास कराने के लिए मुस्लिम महिलाओं को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।