बीजेपी के दिग्गज नेता शाहनवाज हुसैन उन लोगों में से हैं जिनकी छवि काफी खुले विचारों वाली रही है और उनकी सोच उनके जीवन से भी झलकती है। उन्होंने दिल्ली की एक हिंदू लड़की से प्रेम विवाह किया। लेकिन यह इतना आसान नहीं था इसके लिए उन्हें एक-दो साल नहीं पूरे 9 साल तक पापड़ बेलने पड़े थे।
साल 1986 में शाहनवाज हुसैन अपनी ग्रैजुएशन की पढ़ाई के दौरान डीटीसी की बसों से सफर किया करते थे। रोज की यात्रा में उनकी निगाह एक लड़की पर पड़ी। पहली ही नजर में उन्हें वो जंच गई। शाहनवाज ने अपने एक साक्षात्कार में कहा है कि, 'उनकी आंखें बेहद खूबसूरत हैं, बस मैंने उनकी आंखें देखी और खो गया', बहुत कुछ बोलती हैं उनकी आंखें।'
अगर कहें कि उन्हें देखते ही शाहनवाज उन पर फिदा हो गए तो कुछ गलत न होगा, लेकिन जिस पर वो फिदा हुए वो अचानक कहीं खो गई। कुछ दिनों बाद फिर शाहनवज को वह लड़की दिल्ली की बस में ही मिल गई। इसके बाद शाहनवाज ने लड़की को फॉलो करना शुरू किया। कई बार बस में हुई मुलाकात के बाद एक दिन ऐसा मौका आया जब बस में शाहनवाज को तो सीट मिल गई, लेकिन उस लड़की को नहीं मिली, तो उन्होंने उसे अपनी सीट ऑफर कर दी।
इसी आपाधापी में शाहनवाज एक दिन उस लड़की के घर पहुंच गए। इधर-उधर की बातों से लड़की के घर वालों से अच्छा रिश्ता बना लिया। इसके बाद वह लड़की घर आने-जाने लगे। बातचीत में शाहनवाज पहले से माहिर थे, इसलिए लड़की के घरवालों से अच्छी जान-पहचान हो गई।
लेकिन असल बात बनते नहीं दिख रही थी, तो अंत में शाहनवाज ने ठान लिया कि अब वह लड़की को अपने दिल की बात बता कर रहेंगे। तभी किसी रिश्तेदार के यहां कोई पार्टी हुई। उसमें शाहनवाज हुसैन और वह लड़की दोनों पहुंचे। वहीं पर बातों ही बातों शाहनवाज ने अपने दिल की बात लड़की बताई। लेकिन उनकी बातें सुनकर लड़की गुस्सा हो गई।