उत्तर प्रदेश में इस वक्त राज्यसभा चुनाव के वोटों की गिनती शुरू हो चुकी है। कहा जा रहा है कि कुल 400 विधायकों ने इस मतदान में हिस्सा लिया है। इस पूरे चुनाव के दौरान जिस एक सीट ने सबसे ज्यादा सस्पेंस क्रिएट करके रखा है वो है 10वीं सीट।
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अखिलेश यादव और राजा भैया
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दरअसल यूपी के आठ सीटों पर तो भाजपा की जीत तय मानी जा रही है और 9वीं सीट पर समाजवादी पार्टी उम्मीदवार जया बच्चन की जीत का सबको भरोसा है। लेकिन दसवीं सीट जिस पर सपा-बसपा के गठबंधन की परीक्षा है वह सबसे अहम है।
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akhilesh yadav, jaya bachchan and raja bhaiya
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इस सीट को जीतने के लिए बसपा उम्मीदवार को कुल 10 वोटों की दरकार है। हालांकि संख्या बल न होने की वजह से मायावती ने अखिलेश यादव से इसकी जीत के लिए 10 वोटों की मदद मांगी थी। लेकिन माना जा रहा है कि इन 10 वोटों में से राजा भैया और उनके सहयोगी विनोद सरोज का वोट बसपा को नहीं गया है। क्योंकि राजा भैया और उनके सहयोगी निर्दलीय विधायक हैं। और निर्दलीय विधायकों को एक खास अधिकार होता है।
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निर्दलीय विधायक राजा भैया
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बता दें कि राज्यसभा चुनाव में मतदान करने वाले विधायकों वोट देने के बाद बूथ पर ही मौजूद पोलिंग एजेंट को यह दिखाना होता है कि वह किसे वोट दे रहे हैं। लेकिन निर्दलीय विधायकों के लिए ऐसी कोई बाध्यता नहीं होती कि वोट देने के बाद वह किसी को ये दिखाएं या ना दिखाएं कि उन्होंने किसको वोट दिया।
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निर्दलीय विधायक राजा भैया व सीएम योगी आदित्यनाथ।
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यही वजह है कि निर्दलीय विधायक राजा भैया और विनोद सरोज ने किसी को नहीं दिखाया कि उन्होंने किसे वोट दिया है। और वोट देने के बाद वो भाजपा नेताओं के साथ सीएम योगी से मिलने चले गए जिसकी वजह से ही सारी सुगबुगाहटें हो रही हैं।