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निर्भया की याद दिला गई उन्नाव पीड़िता, आंखों से छलक उठे आंसू, भावुक कर देंगे नर्सों के ये बोल

Sat, 07 Dec 2019 08:17 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्राची प्रियम Updated Sat, 07 Dec 2019 08:17 PM IST
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Unnao case victim in Safdarjung Hospital Doctors and nurses cried remembering Nirbhaya
unnao rape burning case - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में देश का सबसे बेहतर बर्न यूनिट होने की वजह से यहां आएदिन जलने के मामले आते हैं, लेकिन शुक्रवार देर रात उन्नाव पीड़िता के दम तोड़ने की खबर सुनते ही अस्पताल के डॉक्टर व नर्सों की आंखों में भी आंसू छलक उठे। हर कोई सात वर्ष पहले इसी दिसंबर के महीने में अस्पताल पहुंची निर्भया को याद करने लगे। 

Unnao case victim in Safdarjung Hospital Doctors and nurses cried remembering Nirbhaya

डॉक्टरों का कहना था कि निर्भया की तरह ही उन्नाव पीड़िता बड़ी हिम्मत वाली थी। पूरा शरीर जलने के बाद भी वह हिम्मत नहीं हार रही थी। अस्पताल की नर्स शकुंतला देवी बताती हैं कि सात वर्ष पहले जब निर्भया अस्पताल पहुंची थी, उस वक्त अस्पताल में मौजूद हर कर्मचारी की रूह तक कांप उठी थी। ठीक वैसा ही उन्नाव पीड़िता को देखकर महसूस हुआ। 

Unnao case victim in Safdarjung Hospital Doctors and nurses cried remembering Nirbhaya
पीड़िता का शव उन्नाव ले जाने की हो रही तैयारी - फोटो : एएनआई

पूरे शरीर पर बंधी पट्टियां और काला पड़ा चेहरा रोंगटे खड़े कर दे रहा था। वहीं अस्पताल के ही डॉ. विष्णु कुमार का कहना है कि कोई इतना भी जालिम कैसे हो सकता है? एक डॉक्टर होने के नाते वे आग की लपटों के शिकार मरीजों की पीड़ा समझ सकते हैं, लेकिन एक आम व्यक्ति जब ऐसे मरीज को देखता है तो उसकी आंखों में आंसू ही दिखाई देते हैं। 

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Unnao case victim in Safdarjung Hospital Doctors and nurses cried remembering Nirbhaya
उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के परिजनों का भी छलका दर्द - फोटो : एएनआई

नर्स प्रेमरोज ने बताया कि उन्नाव पीड़िता की हालत शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। इस केस ने निर्भया की याद दिला दी। सात वर्ष पहले भी जघन्य अपराध की शिकार निर्भया जिस दर्द से कराह रही थी, वैसा ही उन्नाव पीड़िता अस्पताल में जब आई थी तब उसकी कराने की आवाज सुनकर महसूस किया जा सकता था, लेकिन वो कुछ वक्त तक होश में रह पाई और उसके बाद वह वेंटीलेटर पर चली गई।
 

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Unnao case victim in Safdarjung Hospital Doctors and nurses cried remembering Nirbhaya
पीड़िता की मौत पर छलके सबके आंसू - फोटो : अमर उजाला

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुनील गुप्ता का कहना है कि शुरूआत से ही उन्नाव पीड़िता की हालत बेहद गंभीर थी। उसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास डॉक्टरों की ओर से किए गए थे, लेकिन चिकित्सीय विज्ञान भी अत्यधिक फीसदी बर्न केस में लाचार हो जाता है। वहीं बर्न विभागाध्यक्ष डॉ. शलभ कुमार का कहना था कि उन्नाव पीड़िता का दर्द न सिर्फ उनके विभाग, बल्कि अस्पताल में मौजूद हर कोई कर्मचारी, डॉक्टर या नर्स महसूस कर रही थी। उसकी मौत की खबर ने वाकई सभी को गहरा दुख पहुंचाया है।

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