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....ट्रांसफार्मर नहीं, जिंदा जल रहे थे तीन मासूम

Thu, 21 Mar 2019 01:45 AM IST
vivek shukla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा Published by: vivek shukla Updated Thu, 21 Mar 2019 01:45 AM IST
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three children burnt alive in power house greater noida side story
children burnt

सेक्टर फाई-तीन के बिजली सबस्टेशन के अंदर से बुधवार दोपहर धुआं निकल रहा था जो धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा था। यह देखकर आसपास के लोगों ने सोचा कि ट्रांसफार्मर में आग लग गई है। उन्होंने इसकी सूचना 100 नंबर पर पुलिस व बिजली कंपनी एनपीसीएल को दी और उनके आने का इंतजार करने लगे। इस दौरान किसी को नहीं पता था कि अंदर ट्रांसफार्मर नहीं, बल्कि तीन बच्चे जिंदा जल रहे हैं। बाद में जब पता चला तो सबके होश उड़ गए। 

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लोगों ने बताया कि दोपहर करीब एक बजे धुआं निकलने लगा था। कुछ देर बाद बदबू भी आने लगी थी। सबस्टेशन के अंदर देखने का प्रयास किया गया, लेकिन कुछ नहीं दिखा। केवल पैनल बॉक्स से धुआं निकलता दिख रहा था। ट्रांसफार्मर में आग लगने से बड़ा हादसा होने के डर से पुलिस और एनपीसीएल को सूचना दी थी। करीब डेढ़ बजे जब बिजली आपूर्ति बंद हुई तो एनपीसीएल कर्मचारियों ने अंदर जाकर देखा तो दंग रह गए, तीनों बच्चे बुरी तरह जल चुके थे। दो बच्चे बैठे हुए थे, जबकि एक बच्चा सामने पड़ा हुआ था। यह देखकर आसपास के लोगों के होश उड़ गए। बच्चों की मौत की सूचना होने पर परिजनों ने अपने-अपने बच्चों की तलाश शुरू की। उसके बाद परिजनों को हादसे का पता चला। 

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एंबुलेंस के आगे लेट गए परिजन
जिस समय पुलिस बच्चों के शव को एंबुलेंस में लेकर अस्पताल के लिए निकल रही थी, तभी तीनों बच्चों की मां और परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया और एंबुलेंस के आगे लेट गए। परिजन बच्चों का चेहरा दिखाने की मांग कर रहे थे। पुलिस ने किसी तरह बच्चों के पिता को चेहरा दिखाया, लेकिन जैसे ही मां भी चेहरा देखने लगी तो पुलिस ने इंकार कर दिया और एंबुलेंस को वहां से रवाना कर दिया। तीनों मां और परिजनों की चीख को सुनकर सभी की आंखों में आंसू आ गए। 

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तीनों पढ़ने में काफी अच्छे थे
रिंकू चूहड़पुर गांव के सरकारी स्कूल की कक्षा पांच में पढ़ता था। उसकी एक बहन है। वहीं, विवेक की एक बड़ी व एक छोटी बहन हैं। विवेक कक्षा तीन का छात्र था। सागर का एक बड़ा भाई अमन और एक बड़ी बहन सपना हैं। सागर जीबीएम पब्लिक स्कूल खानपुर में कक्षा दो का छात्र था। परिजनों ने बताया कि तीनों पढ़ने में काफी अच्छे थे। 

तीनों बच्चों के दोस्तों को भी दर्द
रिंकू, सागर और विवेक अलग-अलग स्कूल में पढ़ते थे, लेकिन तीनों के घर आसपास ही थे। तीनों दोस्त थे और अन्य बच्चों के साथ मिलकर खेलते थे। उनके एक दोस्त ने बताया कि सभी साथ खेलते थे, लेकिन आज वह उनके साथ नहीं थे।

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एनपीसीएल की लापरवाही पर फुटा लोगों को गुस्सा 
हादसे में एनपीसीएल की लापरवाही सामने आई है। विद्युत सबस्टेशन के दोनों गेट खुले थे। कोई भी अंदर जा सकता था। यहीं नहीं, अंदर बनी बिल्डिंग में लगे शटर भी खुले थे। उन शटर के अंदर पैनल बॉक्स लगे हैं। सेक्टर की आरडब्ल्यूए के उपाध्यक्ष संजीव भाटी का कहना है कि एनपीसीएल में कई बार शिकायत की, लेकिन कंपनी ने कभी समस्या पर ध्यान नहीं दिया। सेक्टर में जगह-जगह पैनल बॉक्स खुले हैं। उनमें हर समय हादसा होने का डर सताता रहता है। कंपनी की लापरवाही को लेकर सेक्टर के लोगों ने हंगामा किया और एनपीसीएल पर कार्रवाई करने की मांग की।
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