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दिल्ली एसआईआर: कुल 33 फीसदी मतदाता ड्राफ्ट सूची से बाहर, अल्पसंख्यक बहुल-आरक्षित सीटों में 20 से 45% नाम हटे
Wed, 02 Sep 2026 03:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 02 Sep 2026 03:05 AM IST
सार
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से सोमवार को जारी प्रारूप सूची के मुताबिक, पुनरीक्षण से पहले दिल्ली में करीब 1.45 करोड़ मतदाता दर्ज थे। इनमें से 47,56,722 नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। यह कुल मतदाताओं का करीब 33 फीसदी है। इन नामों को अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत, दोहरी प्रविष्टि और अन्य श्रेणियों में रखा गया है।
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प्रतीक चित्र
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत जारी प्रारूप मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम बाहर हुए हैं। खास तौर पर अल्पसंख्यक बहुल और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों में विलोपन का आंकड़ा 20 से 45 फीसदी तक है। अल्पसंख्यक बहुल सीटों में ओखला में सबसे अधिक 45 फीसदी और आरक्षित सीटों में पटेल नगर में 42 फीसदी मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची में नहीं हैं।
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मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से सोमवार को जारी प्रारूप सूची के मुताबिक, पुनरीक्षण से पहले दिल्ली में करीब 1.45 करोड़ मतदाता दर्ज थे। इनमें से 47,56,722 नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। यह कुल मतदाताओं का करीब 33 फीसदी है। इन नामों को अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत, दोहरी प्रविष्टि और अन्य श्रेणियों में रखा गया है।
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अल्पसंख्यक बहुल सीटों में ओखला के बाद चांदनी चौक में 38 फीसदी, बल्लीमारान में 32 फीसदी, मुस्तफाबाद में 28 फीसदी, बाबरपुर में 26 फीसदी, मटिया महल में 24 फीसदी और सीलमपुर में 23 फीसदी नाम बाहर हुए हैं। ओखला में 3,62,813 में से 1,63,829 नाम प्रारूप सूची में नहीं हैं। वहीं चांदनी चौक में 48,405, मुस्तफाबाद में 80,804, बाबरपुर में 55,264, बल्लीमारान में 49,640, सीलमपुर में 45,105 और मटिया महल में 32,099 नाम बाहर किए गए हैं।
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करोल बाग में 40 फीसदी और अंबेडकर नगर में 39 फीसदी के नाम नहीं
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 12 विधानसभा क्षेत्रों में भी कई सीटों पर 20 फीसदी से अधिक नाम प्रारूप सूची से बाहर हुए हैं। पटेल नगर में यह आंकड़ा 42 फीसदी है। करोल बाग में 40 फीसदी और अंबेडकर नगर में 39 फीसदी मतदाताओं के नाम सूची में नहीं हैं। देवली और कोंडली में 37-37 फीसदी, त्रिलोकपुरी में 33 फीसदी, जबकि सीमापुरी और सुल्तानपुर माजरा में 31-31 फीसदी नाम बाहर हुए हैं। गोकलपुर में 25 फीसदी तथा बवाना और मादीपुर में 23-23 फीसदी नाम हटे हैं। मंगोलपुरी में यह आंकड़ा 21 फीसदी रहा।
43.33 लाख नाम अनुपस्थित या स्थानांतरित श्रेणी में
प्रारूप सूची से बाहर हुए 47,56,722 मतदाताओं में सबसे बड़ी संख्या अनुपस्थित या स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं की है। इस श्रेणी में 43,32,775 नाम हैं। इसके अलावा 2,82,412 मृत मतदाताओं और 1,41,535 दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। निर्वाचन विभाग के अनुसार प्रारूप सूची से नाम बाहर होना अंतिम रूप से मताधिकार समाप्त होने का अर्थ नहीं है। संबंधित मतदाताओं को दावा पेश कर नाम दोबारा शामिल कराने का अवसर मिलेगा।
दावा-आपत्ति का है मौका
प्रारूप सूची में नाम नहीं मिलने वाले मतदाता 30 सितंबर तक दावा और आपत्ति दाखिल कर सकते हैं। अनुपस्थित या स्थानांतरित श्रेणी में रखे गए मतदाता निर्धारित प्रपत्र के माध्यम से नाम शामिल कराने का आवेदन कर सकेंगे। दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद चार नवंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। ऐसे में प्रारूप सूची में नाम नहीं होने वाले मतदाताओं के लिए दावा-आपत्ति की अवधि महत्वपूर्ण होगी।